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Kushinagar News: प्रदूषण से पिड़ारी गांव में बढ़ रहे दमा और सांस के मरीज
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- त्रिवेणी चीनी मिल से पिड़ारी गांव की हवा हो रही जहरीली
- मिल के प्रदूषण की वजह से ग्रामीण गठिया के साथ बैगासोसिस नामक बीमारी से ग्रसित
- अब तक गांव में नहीं लगा कोई स्वास्थ्य शिविर
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। रामकोला विकास खंड के पिड़ारी गांव के करीब 40 फीसदी लोग दमा और गठिया के साथ-साथ बैगासोसिस नामक बीमारी की चपेट में हैं। त्रिवेणी चीनी मिल में पेराई सत्र शुरू होते ही इसके आसपास रहने वाली आबादी प्रदूषण की चपेट में आ जाती है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अफसर इससे अंजान हैं। उनकी ओर से अब तक कोई शिविर नहीं लगाया गया है।
जानकारों का कहना है कि चीनी मिल के बॉयलर में बगास (गन्ने का खोइया) ईंधन के रूप में प्रयोग में किया जाता है, और जलने के बाद इसकी डस्ट पार्टिकल फ्लाई एश के रूप में काफी दूर तक फैल जाता है। इससे हवा दूषित होने की वजह से आसपास बसे लोग दमा के साथ-साथ बैगासोसिस नामक सांस की बीमारी से पीड़ित हैं। रामकोला विकासखंंड का पिड़ारी गांव शुगर फैक्टरी के सबसे नजदीक है। इसलिए इसकी चिमनियों से निकलने वाले फ्लाई एश के वजह से घरों की छतों, गाड़ियों के शीशों और हर तरफ राख फैली रहती है। मिल से निकलने वाले दूषित जल और वेस्ट मटेरियल को मिल के रेजर वायर के बजाय गांव से सटे गड्ढे में छोड़ दिया जाता है, जिस वजह से कई तरह की बीमारियां उत्पन्न हो रही हैं।
गांव के देवानंद प्रजापति, अमर यादव, राजेंद्र यादव, गोपाल पटेल और जय प्रकाश प्रजापति ने बताया कि मिल से होने वाले प्रदूषण की वजह से गांव के लोग सांस फूलने और दमा से पीड़ित हैं। यहां के हैंडपंपों से निकला पानी एक घंटे के अंदर ही पीला और बदबूदार हो जाता है। इन लोगों के मुताबिक कई बार चीनी मिल प्रबंध तंत्र से इस मामले की शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। गांव के लोग बीमार हवा में जीने के साथ-साथ जनपद का सबसे दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। आज तक गांव में स्वास्थ्य विभाग ने कोई शिविर नहीं लगाया है।
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कोट-
फ्लाई एश के कारण बैगासोसिस नामक बीमारी का खतरा बना रहता है। दमा की शिकायत और सांस फूलने जैसी बीमारी के मामले बढ़ जाते हैं। इस गांव के लोग रामकोला सीएचसी में इन बीमारियों का इलाज कराने आते हैं। लोगों से मास्क पहनने और स्वच्छ उबले पानी का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
- डाॅ. रजनीश श्रीवास्तव, चिकित्साधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामकोला
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पिड़ारी गांव से आने वाले मरीजों में दमा और सांस फूलने की शिकायत सबसे ज्यादा आती है। चार साल पहले दूषित पानी के कारण पिड़ारी गांव के लोग संक्रमित बीमारी की चपेट में आ गए थे। चीनी मिल में पेराई के दौरान चिमनियों से निकलने वाले फ्लाई एश और डस्ट पार्टिकल पूरे क्षेत्र में घरों की छतों और हर तरफ फैल जाता है। वायु प्रदूषण के साथ-साथ मिल से निकलने वाले दूषित जल के कारण भी आसपास का भूगर्भ जल दूषित हो गया है। लोगों से मास्क पहनने और स्वच्छ उबले पानी के सेवन की सलाह दी जाती है। किसी भी तरह की अस्वस्थता की स्थिति में क्षेत्रवासी नजदीकी सामुदायिक अथवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर जांच कराएं।
- डाॅ. एसके विश्वकर्मा, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामकोला
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पिड़ारी गांव में इस बीमारी से ग्रस्त लोगों के बारे में जानकारी नहीं थी। जल्द ही स्वास्थ्य शिविर लगाकर पूरे गांव का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।
-डॉ. सुरेश पटारिया, मुख्य चिकित्साधिकारी
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ऐसी कोई बात नहीं है। चीनी मिल का पानी अपनी जमीन में ही गिराया जाता है। अगर गांववालों को कभी पानी की जरूरत होगी तो हम अपने ोरेजर वायर से पानी जरूर देंगे।
-यशराज सिंह, महाप्रबंधक, त्रिवेणी चीनी मिल, रामकोला
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- मिल के प्रदूषण की वजह से ग्रामीण गठिया के साथ बैगासोसिस नामक बीमारी से ग्रसित
- अब तक गांव में नहीं लगा कोई स्वास्थ्य शिविर
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। रामकोला विकास खंड के पिड़ारी गांव के करीब 40 फीसदी लोग दमा और गठिया के साथ-साथ बैगासोसिस नामक बीमारी की चपेट में हैं। त्रिवेणी चीनी मिल में पेराई सत्र शुरू होते ही इसके आसपास रहने वाली आबादी प्रदूषण की चपेट में आ जाती है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अफसर इससे अंजान हैं। उनकी ओर से अब तक कोई शिविर नहीं लगाया गया है।
जानकारों का कहना है कि चीनी मिल के बॉयलर में बगास (गन्ने का खोइया) ईंधन के रूप में प्रयोग में किया जाता है, और जलने के बाद इसकी डस्ट पार्टिकल फ्लाई एश के रूप में काफी दूर तक फैल जाता है। इससे हवा दूषित होने की वजह से आसपास बसे लोग दमा के साथ-साथ बैगासोसिस नामक सांस की बीमारी से पीड़ित हैं। रामकोला विकासखंंड का पिड़ारी गांव शुगर फैक्टरी के सबसे नजदीक है। इसलिए इसकी चिमनियों से निकलने वाले फ्लाई एश के वजह से घरों की छतों, गाड़ियों के शीशों और हर तरफ राख फैली रहती है। मिल से निकलने वाले दूषित जल और वेस्ट मटेरियल को मिल के रेजर वायर के बजाय गांव से सटे गड्ढे में छोड़ दिया जाता है, जिस वजह से कई तरह की बीमारियां उत्पन्न हो रही हैं।
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गांव के देवानंद प्रजापति, अमर यादव, राजेंद्र यादव, गोपाल पटेल और जय प्रकाश प्रजापति ने बताया कि मिल से होने वाले प्रदूषण की वजह से गांव के लोग सांस फूलने और दमा से पीड़ित हैं। यहां के हैंडपंपों से निकला पानी एक घंटे के अंदर ही पीला और बदबूदार हो जाता है। इन लोगों के मुताबिक कई बार चीनी मिल प्रबंध तंत्र से इस मामले की शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। गांव के लोग बीमार हवा में जीने के साथ-साथ जनपद का सबसे दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। आज तक गांव में स्वास्थ्य विभाग ने कोई शिविर नहीं लगाया है।
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फ्लाई एश के कारण बैगासोसिस नामक बीमारी का खतरा बना रहता है। दमा की शिकायत और सांस फूलने जैसी बीमारी के मामले बढ़ जाते हैं। इस गांव के लोग रामकोला सीएचसी में इन बीमारियों का इलाज कराने आते हैं। लोगों से मास्क पहनने और स्वच्छ उबले पानी का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
- डाॅ. रजनीश श्रीवास्तव, चिकित्साधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामकोला
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पिड़ारी गांव से आने वाले मरीजों में दमा और सांस फूलने की शिकायत सबसे ज्यादा आती है। चार साल पहले दूषित पानी के कारण पिड़ारी गांव के लोग संक्रमित बीमारी की चपेट में आ गए थे। चीनी मिल में पेराई के दौरान चिमनियों से निकलने वाले फ्लाई एश और डस्ट पार्टिकल पूरे क्षेत्र में घरों की छतों और हर तरफ फैल जाता है। वायु प्रदूषण के साथ-साथ मिल से निकलने वाले दूषित जल के कारण भी आसपास का भूगर्भ जल दूषित हो गया है। लोगों से मास्क पहनने और स्वच्छ उबले पानी के सेवन की सलाह दी जाती है। किसी भी तरह की अस्वस्थता की स्थिति में क्षेत्रवासी नजदीकी सामुदायिक अथवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर जांच कराएं।
- डाॅ. एसके विश्वकर्मा, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामकोला
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पिड़ारी गांव में इस बीमारी से ग्रस्त लोगों के बारे में जानकारी नहीं थी। जल्द ही स्वास्थ्य शिविर लगाकर पूरे गांव का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।
-डॉ. सुरेश पटारिया, मुख्य चिकित्साधिकारी
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ऐसी कोई बात नहीं है। चीनी मिल का पानी अपनी जमीन में ही गिराया जाता है। अगर गांववालों को कभी पानी की जरूरत होगी तो हम अपने ोरेजर वायर से पानी जरूर देंगे।
-यशराज सिंह, महाप्रबंधक, त्रिवेणी चीनी मिल, रामकोला