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Kushinagar News: ठंड बढ़ी तो बढ़ गए मानसिक अवसाद के मरीज
Thu, 19 Dec 2024 12:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 19 Dec 2024 12:05 AM IST
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पडरौना। ठंड बढ़ने के साथ ही मानसिक अवसाद के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग में हर दिन करीब 50 मरीज पहुंच रहे हैं। डॉक्टर इन मरीजों को इलाज के साथ दवा और बचाव के तरीके बता रहे हैं। पुराने मरीजों को सर्दी में बेवजह बाहर न निकलने के लिए कहा जा रहा है। डॉक्टर का कहना है कि सर्दियों के मौसम में दिमाग के अंदर रसायनिक प्रक्रिया काफी तेजी से होती है। बाहर के मौसम के अनुरूप वह ढल नहीं पता है। यह समस्या अवसाद ग्रसित लोगों में ज्यादा रहती है। अत्याधिक दिक्कत घने कोहरे और तीन से चार दिन तक सूरज न निकले के कारण होती है।
मानसिक रोग विभाग के डॉ. गौरव यादव ने बताया कि ओपीडी में सामान्य दिनों के मुकाबले ठंड के मौसम में मानसिक तनाव ग्रस्त मरीज तेजी से बढ़े हैं। हर दिन 45 से 50 मरीज उपचार कराने पहुंच रहे हैं। डॉ. गौरव ने बताया कि सर्दी में सूर्य की रोशनी कम मिलती है। ऐसे में मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर घटने लगते हैं। इसे सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर कहते हैं। वर्तमान में पुराने मरीजों या पहले से ठीक मरीज भी बीमार हो रहे हैं। इसके अलावा नए मरीज भी आ रहे हैं। जिन मरीजों को शुगर, बीपी, सर्वाइकल आदि की समस्या है। उन्हें भी परेशानी हो रही है। क्योंकि, इनकी वजह से भी शरीर में चिड़चिड़ापन पैदा होता है। ओपीडी में आने वाले मरीजों में अधिकतर युवा हैं। उनमें नौकरी, रोजगार, शादी को लेकर अवसाद बना हुआ है। वह अपने लक्ष्य पर कामयाब नहीं हो सके हैं, घरवाले भी उनकी भावनाओं को समझ नहीं पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ठंड में मानसिक तनाव बढ़ता है। खासकर महिलाएं इसकी सबसे ज्यादा शिकार होती हैं। महिलाएं ज्यादातर समय घर के अंदर रहती हैं, इसलिए सूर्य की किरणों से दूरी बनी रहती है। तनाव के मरीज में सर्दियों में उदासी आ जाती है। घर में शारीरिक व मानसिक गतिविधियों में हिस्सा लें। कोई परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सक से सलाह लें।
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ये करें उपाय, दूर होगा तनाव :
- शारीरिक रूप से तनदुरुस्त रहें।
- नियमित व्यायाम करें।
- स्वयं को अकेला न समझें।
- तेल वाले पदार्थ न खाएं।
- घर के अंदर शारीरिक व मानसिक गतिविधि करें।
- एक साथ ज्यादा खाना न खाएं।
- हरी पत्तेदार सब्जियां व पौष्टिक आहार लें।
- दवा नियमित रूप से लें, लक्षण न रहने पर भी बिना सलाह दवा न रोकें।
- तनाव मुक्त वातावरण में रहें।
- मरीज के सम्मान और जरूरतों का ध्यान रखें।
- दिक्कत होने पर डॉक्टर की सलाह लें।
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मानसिक रोग विभाग के डॉ. गौरव यादव ने बताया कि ओपीडी में सामान्य दिनों के मुकाबले ठंड के मौसम में मानसिक तनाव ग्रस्त मरीज तेजी से बढ़े हैं। हर दिन 45 से 50 मरीज उपचार कराने पहुंच रहे हैं। डॉ. गौरव ने बताया कि सर्दी में सूर्य की रोशनी कम मिलती है। ऐसे में मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर घटने लगते हैं। इसे सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर कहते हैं। वर्तमान में पुराने मरीजों या पहले से ठीक मरीज भी बीमार हो रहे हैं। इसके अलावा नए मरीज भी आ रहे हैं। जिन मरीजों को शुगर, बीपी, सर्वाइकल आदि की समस्या है। उन्हें भी परेशानी हो रही है। क्योंकि, इनकी वजह से भी शरीर में चिड़चिड़ापन पैदा होता है। ओपीडी में आने वाले मरीजों में अधिकतर युवा हैं। उनमें नौकरी, रोजगार, शादी को लेकर अवसाद बना हुआ है। वह अपने लक्ष्य पर कामयाब नहीं हो सके हैं, घरवाले भी उनकी भावनाओं को समझ नहीं पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ठंड में मानसिक तनाव बढ़ता है। खासकर महिलाएं इसकी सबसे ज्यादा शिकार होती हैं। महिलाएं ज्यादातर समय घर के अंदर रहती हैं, इसलिए सूर्य की किरणों से दूरी बनी रहती है। तनाव के मरीज में सर्दियों में उदासी आ जाती है। घर में शारीरिक व मानसिक गतिविधियों में हिस्सा लें। कोई परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सक से सलाह लें।
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ये करें उपाय, दूर होगा तनाव :
- शारीरिक रूप से तनदुरुस्त रहें।
- नियमित व्यायाम करें।
- स्वयं को अकेला न समझें।
- तेल वाले पदार्थ न खाएं।
- घर के अंदर शारीरिक व मानसिक गतिविधि करें।
- एक साथ ज्यादा खाना न खाएं।
- हरी पत्तेदार सब्जियां व पौष्टिक आहार लें।
- दवा नियमित रूप से लें, लक्षण न रहने पर भी बिना सलाह दवा न रोकें।
- तनाव मुक्त वातावरण में रहें।
- मरीज के सम्मान और जरूरतों का ध्यान रखें।
- दिक्कत होने पर डॉक्टर की सलाह लें।