लीबिया से लौटे मुन्ना चौहान, घरवालों ने किया स्वागत

Gorakhpur Bureauगोरखपुर ब्यूरो Updated Thu, 29 Oct 2020 11:39 PM IST
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लीबिया से लौटे मुन्ना चौहान, घरवालों ने किया स्वागत
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खड्डा(कुशीनगर)। फिरौती के लिए लीबिया में अपहृत खड्डा क्षेत्र के मुन्ना चौहान अपहर्ताओं के चंगुल से मुक्त होने के बाद बृहस्पतिवार को अपने घर पहुंचे तो परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। मौत के मुंह से वापस लौटे मुन्ना का घर के लोगों ने तिलक लगाकर स्वागत किया।
खड्डा विकासखंड के गढ़हिया बसंतपुर गांव निवासी मुन्ना चौहान एक साल पहले कतर की एक कंपनी में काम करने गए थे। कतर पहुंचने पर उन्हें दो माह के लिए लीबिया की एक कंपनी में भेज दिया गया। मुन्ना लीबिया के बेंगाजी स्थित कंपनी अलसोला अलमुडिया में काम करने पहुंचे। कोरोना व वीजा अवधि समाप्ति होने के चलते ये लोग वहां फंस गए थे। बड़ी मुश्किलों के बाद 13 सितंबर को मुन्ना व देवरिया जनपद के महेंद्र सिंह, बिहार प्रांत के बगहा क्षेत्र के अजय शाह, गुजरात के इब्राहिम मुल्तानी, आंध्रप्रदेश के धनैया, वैंकट राव व जोगा राव समेत सात मजदूर घर वापसी के लिए टैक्सी से लीबिया की राजधानी त्रिपोली हवाई अड्डा जा रहे थे। सबा शहर के पास हथियारबंद तीन आतंकवादियों ने इनका अपहरण कर लिया। कंपनी ने फिरौती देकर सभी को मुक्त कराया। परिजनों की पहल पर भारतीय दूतावास भी सक्रिय हुआ और सभी सात लोगों को सरकार ने अपने खर्च से स्वदेश बुलाया। मुन्ना के घर पहुंचते ही पत्नी संजू कुछ देर तक उसे अपलक निहारती रहीं। पति के अपहरण की जानकारी मिलने के बाद से ही देवी-देवताओं के दर पर मत्था टेक रही संजू के लिए यह क्षण बेहद भावुक था। घर पहुंचे मुन्ना ने कहा कि अपने देश व अपने परिवार में आकर लग रहा है कि दूसरा जीवन मिल गया है।
अपहरण हुआ नहीं बची थी जीवन की आस
मुन्ना ने बताया कि बेंगाजी शहर से टैक्सी पर सवार सात लोग 1400 किलोमीटर दूर त्रिपोली हवाई अड्डा जा रहे थे। लगभग एक हजार किलोमीटर दूर (सबा) शहर के पास 14 सितंबर की सुबह सेना की वर्दी पहने लोगों के वाहन ने उनकी टैक्सी को ओवरटेक कर रोक लिया। टैक्सी में सवार सभी सात भारतीयों का हाथ वायर से बांधकर टैक्सी को अगवा कर लिया गया। चार घंटे तक सफर के बाद हथियारबंद लोगों ने एक कमरे में ले जाकर उन्हें बंद कर दिया। दो दिन तक कब्जे में रखने के बाद सभी को हमजा नाम के आतंकी गुट को सौंप दिया गया। इस गुट ने जिस जगह बंधक बनाया, वहां पहले से दो लोग बंधक बनाए गए थे। वे किसी अन्य देश के थे। बीच में एक दिन अपहर्ताओं ने फोन से देवरिया के महेंद्र सिंह के घर बात कराई तो अपहरण की जानकारी परिजनों को मिली। अपहर्ताओं ने कंपनी अलसोला अलमुडिया के मालिक से संपर्क कर फिरौती की मांग की। कंपनी के मालिक ने मुन्ना सहित सभी सात भारतीयों को 10 अक्तूबर की रात में फिरौती की रकम देकर मुक्त कराया। सभी सुरक्षित कंपनी पहुंचे तब जाकर जान में जान आई। मुन्ना ने घर सकुशल लौटने पर अपने कंपनी मालिक मूसा, सांसद विजय दूबे व विदेश मंत्रालय के प्रति आभार जताया है।
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