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पशु तस्करी : फर्जी और बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों पर शिकंजे की चुनाैती

Thu, 06 Feb 2025 12:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Thu, 06 Feb 2025 12:21 AM IST
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Animal smuggling: Crackdown on fake and vehicles without number plates
संवाद न्यूज एजेंसी गुरवलिया बाजार/पडरौना। पश्चिमी यूपी के सहारनपुर, शामली, मुरादाबाद, मेरठ, रामपुर आदि शहरों से बिहार वाया बंगाल तक होने वाली तस्करी में जिले के तस्करों के साथ यहां के रूट (मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग) और तस्करी में माध्यम बनी पिकअप का बड़ा योगदान है।
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पशुओं की खेप बड़े कंटेनर और ट्रक से गोरखपुर के आसपास के इलाकों में लाकर उतारी जाती है और फिर वहां से डीलिंग के मुताबिक तस्कर पिकअप वाहन से पहुंचते हैं और खेप को बिहार में पहुंचाते हैं। स्थानीय रूट से वाकिफ तस्कर लाइनर की भूमिका अदा करता है। सुकरौली के समीप तस्कर गोरखपुर से कुशीनगर जिले की सीमा में दाखिल होते हैं। यहां से बिहार (गोपालगंज) सीमा में दाखिल होने में रूट पर हाटा, कसया, तुर्कपट्टी, पटहेरवा, तमकुही राज, तरयासुजान आदि थाना क्षेत्र की चौकियां और थाने पड़ते हैं। इसके अलावा इसी रूट पर हेतिमपुर और सलेमगढ़ में टोल प्लाजा है, जहां कैमरे लगे हुए हैं। पुलिस अगर हाईवे पर पूर्ण सख्ती दिखाती तो तस्कर इन अलग-अलग थानों और चौकियों के समीप पकड़ ही लिए जाते, लेकिन पुलिस महज मुखबिर तंत्र के भरोसे है। वहीं तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र से जुड़े राष्ट्रीय राजमार्ग-28 का कुकुत्था और घाघी नदी पशु तस्करों और पुलिस की कारगुजारी के कारण चर्चा का केंद्र बना हुआ है। जहां कुकुत्था नदी घाघी पुल इस क्षेत्र का ऐसा स्थल है, जहां पुलिस महज मुठभेड़ में तस्करों से टकराती है। यहां कुछ वर्ष पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग पर ही पुलिस सहायता केंद्र था। इसे यहां की आपराधिक गतिविधियों को कंट्रोल करने के लिए बनाया गया था लेकिन 2018 के आसपास से यह बंद है।
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लोगों का मानना है कि न केवल इसके बंद होने से यह पूरा इलाका तस्करों के लिए मुफीद हो गया है, बल्कि पुलिस भी तस्करों से मुठभेड़ करने के लिए इसी सुनसान जगह को चुनती है। बिहार में होने वाली पशु तस्करी में तुर्कपट्टी का रूट बहुत मुफीद है। पुलिस से जुड़े पुराने कर्मचारियों ने बताया कि अगर पुलिस कप्तान तस्करों के लिए विशेष प्लान बनाना चाहते हैं तो हाईवे से जुड़े थाने और चौकियों को सक्रिय करने के साथ पुलिस सहायता केंद्र को शुरू कर दिया जाए।
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