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Kushinagar News: तीन दशक बाद थानों में फिर से मनाई जाएगी जन्माष्टमी
Fri, 15 Aug 2025 12:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 15 Aug 2025 12:32 AM IST
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कुशीनगर। जिले के थानों में तीन दशक बाद फिर से जन्माष्टमी मनाई जाएगी। भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से थाना परिसर गूंजेंगे। 1994 में जन्माष्टमी के दिन दस्यु गिरोह के बदमाशों और कुशीनगर पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई थी। इसमें छह पुलिसकर्मियों की शहादत हुई थी। इसके बाद यह पर्व जिले के पुलिस लाइंस और थानों में मनाना बंद हो गया। पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व को थानों और पुलिस लाइंस में धूमधाम से मनाए जाने के निर्देश दिए थे। इसका भी अनुपालन कुशीनगर पुलिस एक श्रद्धांजलि परंपरा के कारण नहीं कर पा रही थी, लेकिन अब 31 साल बाद पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार मिश्रा ने कृष्ण जन्माष्टमी के पर्व को सभी थानों और पुलिस लाइंस में मनाने का आदेश दिया है। कुशीनगर से लगे बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के गंडक नदी के किनारे का इलाका विशेषकर बगहा अनुमंडल नब्बे के दशक में जंगल के डकैतों की वजह से चर्चा में रहता था। यहां दस्यु सरगना वासुदेव उर्फ तिवारी का गिरोह, रामभजु गिरोह, राधा उर्फ चुम्मन गिरोह चर्चा में थे। वर्चस्व को लेकर यूपी के सीमावर्ती इलाकों के इनकी भिड़ंत दिखती थी।
अपहरण, लूट, हत्या जैसी वारदातों को रोकने के लिए शासन ने सीमावर्ती क्षेत्र में हनुमानगंज, जटहां बाजार व बरवापट्टी थाना खोला। इसी दौरान सब इंस्पेक्टर अनिल कुमार पांडेय की जिले में तैनाती हुई। मुठभेड़ में माहिर अनिल कुमार पांडेय ने गंडक के दियारा क्षेत्र में जंगल के डकैतों को मारना शुरू किया। 13 मई 1994 को देवरिया से अलग होकर कुशीनगर जिला तब पडरौना के रूप में अस्तित्व में आया तो अनिल पांडेय को बिहार बार्डर से सटे तरयासुजान थाने पर तैनाती मिली।
30 अगस्त 1994 की रात में जन्माष्टमी के दिन खबर मिली कि कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के पचरुखिया घाट के दूसरी तरफ बांसी नदी के किनारे डकैत मौजूद हैं। एसपी ने एसओ अनिल कुमार पांडेय के नेतृत्व में पुलिस टीम को भेज दिया, परंतु पुलिस टीम के आने की भनक डकैतों को लग गई। मुठभेड़ में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसओ अनिल कुमार पांडेय, एसआई राजेंद्र यादव और सिपाही नागेंद्र पांडेय, खेदन सिंह, परशुराम गुप्ता व विश्वनाथ यादव शहीद हो गए।
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पुलिस की अन्य टीमें जब तक पहुंचीं डकैत अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले थे। अगले दिन डीजीपी समेत तमाम पुलिस अफसर मौके पर पहुंचे और रणनीति बनाकर गंडक नदी के दियारा में रहने वाले जंगल डकैतों का सफाया शुरू कराया। अब एसपी के आदेश के बाद जिले के सभी 22 थानों में जन्माष्टमी पर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
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अपहरण, लूट, हत्या जैसी वारदातों को रोकने के लिए शासन ने सीमावर्ती क्षेत्र में हनुमानगंज, जटहां बाजार व बरवापट्टी थाना खोला। इसी दौरान सब इंस्पेक्टर अनिल कुमार पांडेय की जिले में तैनाती हुई। मुठभेड़ में माहिर अनिल कुमार पांडेय ने गंडक के दियारा क्षेत्र में जंगल के डकैतों को मारना शुरू किया। 13 मई 1994 को देवरिया से अलग होकर कुशीनगर जिला तब पडरौना के रूप में अस्तित्व में आया तो अनिल पांडेय को बिहार बार्डर से सटे तरयासुजान थाने पर तैनाती मिली।
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30 अगस्त 1994 की रात में जन्माष्टमी के दिन खबर मिली कि कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के पचरुखिया घाट के दूसरी तरफ बांसी नदी के किनारे डकैत मौजूद हैं। एसपी ने एसओ अनिल कुमार पांडेय के नेतृत्व में पुलिस टीम को भेज दिया, परंतु पुलिस टीम के आने की भनक डकैतों को लग गई। मुठभेड़ में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसओ अनिल कुमार पांडेय, एसआई राजेंद्र यादव और सिपाही नागेंद्र पांडेय, खेदन सिंह, परशुराम गुप्ता व विश्वनाथ यादव शहीद हो गए।
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पुलिस की अन्य टीमें जब तक पहुंचीं डकैत अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले थे। अगले दिन डीजीपी समेत तमाम पुलिस अफसर मौके पर पहुंचे और रणनीति बनाकर गंडक नदी के दियारा में रहने वाले जंगल डकैतों का सफाया शुरू कराया। अब एसपी के आदेश के बाद जिले के सभी 22 थानों में जन्माष्टमी पर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं।