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गंडक के बाद बांसी नदी भी उफनाई
ब्यूरो/अमर उजाला कुशीनगर
Updated Thu, 28 Jul 2016 11:26 PM IST
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गांवों में भरा बाढ़ का पानी।
- फोटो : अमर उजाला
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गंडक के बाद अब बांसी नदी भी उफना गई है। जलस्तर बढ़ने के बाद बुधवार की देर शाम गोलाघाट पर पीडब्ल्यूडी की तरफ से बनवाए गए पीपा पुल को खोल दिया गया है। इसके चलते बाढ़ प्रभावित इलाके के लोगों की दिक्कत और बढ़ गई है।
बांसी नदी के गोलाघाट पर पीपा पुल बना है। इस पुल से होकर पिपराघाट सहित बेनिया, पिपरा, जोगनी टोला, इमिलिया टोला, बुटनटोला, मोतीराय टोला, नरवाजोत और बिहार के नौका टोला, रूपा टोला, मुसहरी, ठकरहा आदि गांवों के लोग आते-जाते हैं। बुधवार को बांसी नदी का जलस्तर भी अचानक तेजी से बढने लगा। इसके चलते पीपा पुल के बराबर तक पानी बहने लगा। इसके बाद एहतियात के तौर पर पीडब्ल्यूडी के कर्मचारियों ने इस पुल को खोल दिया। क्षेत्र के रामा निषाद, प्रमोद सिंह, पन्नालाल यादव, अंजनी तिवारी, मुन्नीलाल चौधरी, ध्रुव निषाद आदि का कहना है कि पुल न होने के चलते गंडक व बांसी नदी के बीच बसे हजारों लोगों को बाढ़ के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
बंधे के समानांतर बहने लगी गंडक
जलस्तर में हुई तीव्र वृद्धि के चलते गंडक नदी एपी तटबंध के करीब से समानांतर बहने लगी है। जवहीं दयाल के सामने तटबंध पर दबाव बढ़ गया है। जलस्तर में उतार-चढ़ाव से लोग सहमे हुए हैं।
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बीते चार जुलाई को वाल्मिकीनगर बैराज से गंडक नदी में 1.83 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद एपी तटबंध पर जवही दयाल गांव के सामने दबाव बना हुआ है। इस संवेदनशील प्वाइंट की सुरक्षा के लिए बाढ़ खंड डिवीजन लगातार काम करा रहा है, लेकिन दबाव अब तक कम नहीं हुआ है। संभावित खतरे को देखते हुए सिचाई विभाग के चीफ इंजीनियर आरपी यादव व अधीक्षण अभियंता आरडी यादव भी दो बार आकर जायजा ले चुके हैं। अब नदी बंधे से सटकर समानांतर बहने लगी है। इस क्षेत्र के निवासी बाबूलाल, सीताराम, सुबाष, अंगद आदि ने बचाव कार्य में तेजी लाए जाने की मांग की है। इस संबंध में बाढ़ खंड डिवीजन के अधिशासी अभियंता बीपी सिंह का कहना है कि सभी संवदेनशील स्थानों को सुरक्षित बनाने के लिए तेजी से कार्य कराया जा रहा है।
बाढ़ पीड़ितों के लिए नहीं हुआ इंतजाम
गंडक नदी की बाढ़ में फंसे खड्डा, दुदही और सेवरही क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए प्रशासन की तरफ से अब तक कोई इंतजाम नहीं कराया गया है। बाढ़ में घिरे लोगों तक भोजन-पानी व जरूरी दवाइयां भी नहीं भेजी जा रही हैं। एक सप्ताह बाद भी प्रशासन ने कोई राहत शिविर भी नहीं खोला है।
खड्डा क्षेत्र में मरचहवा, बसंतपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर समेत एक दर्जन गांव एक सप्ताह से बाढ़ की चपेट में हैं। बीते मंगलवार को अचानक ही जलस्तर बढ़ने की आशंका पर प्रशासन ने इन गांवों के लोगों को सतर्क करते हुए सुरक्षित स्थान पर चले जाने को कहा। परंतु इनके लिए न तो कोई राहत शिविर खोला गया और न ही बाढ़ में फंसे लोगों तक ही भोजन-पानी भेजा गया। दुदही क्षेत्र का खैरटिया गांव भी चार दिन से बाढ़ के पानी से घिरा है। इस गांव के 50 से अधिक परिवार अमवा खास बंधे पर शरण लिए हैं लेकिन प्रशासन की तरफ से इनकी खोज-खबर भी नहीं ली गई। सेवरही ब्लाक के गांव पिपराघाट के एक दर्जन पुरवे भी हफ्ता भर से बाढ़ की चपेट में हैं। इन पुरवों के तमाम लोग अभी भी बाढ़ से घिरे हैं तो कुछ लोग आकर बंधे पर शरण लिए हुए हैं। बृहस्पतिवार को दिन भर बारिश के बीच ये बाढ़ पीड़ित परेशान घूमत रहे। प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
इस संबंध में खड्डा के तहसीलदार पवन जायसवाल का कहना है कि बाढ़ में घिरे लोगों को बाहर निकालने के लिए नाव लगाई गई है। पीड़ितों को अनाज उपलब्ध कराने के लिए डिमांड भेजी गई है। वहीं तमकुहीराज के तहसीलदार रामसुधार का कहना है कि पीड़ित लोगों को नाव के सहारे बाहर निकाला जा रहा है।
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बांसी नदी के गोलाघाट पर पीपा पुल बना है। इस पुल से होकर पिपराघाट सहित बेनिया, पिपरा, जोगनी टोला, इमिलिया टोला, बुटनटोला, मोतीराय टोला, नरवाजोत और बिहार के नौका टोला, रूपा टोला, मुसहरी, ठकरहा आदि गांवों के लोग आते-जाते हैं। बुधवार को बांसी नदी का जलस्तर भी अचानक तेजी से बढने लगा। इसके चलते पीपा पुल के बराबर तक पानी बहने लगा। इसके बाद एहतियात के तौर पर पीडब्ल्यूडी के कर्मचारियों ने इस पुल को खोल दिया। क्षेत्र के रामा निषाद, प्रमोद सिंह, पन्नालाल यादव, अंजनी तिवारी, मुन्नीलाल चौधरी, ध्रुव निषाद आदि का कहना है कि पुल न होने के चलते गंडक व बांसी नदी के बीच बसे हजारों लोगों को बाढ़ के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
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बंधे के समानांतर बहने लगी गंडक
जलस्तर में हुई तीव्र वृद्धि के चलते गंडक नदी एपी तटबंध के करीब से समानांतर बहने लगी है। जवहीं दयाल के सामने तटबंध पर दबाव बढ़ गया है। जलस्तर में उतार-चढ़ाव से लोग सहमे हुए हैं।
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बीते चार जुलाई को वाल्मिकीनगर बैराज से गंडक नदी में 1.83 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद एपी तटबंध पर जवही दयाल गांव के सामने दबाव बना हुआ है। इस संवेदनशील प्वाइंट की सुरक्षा के लिए बाढ़ खंड डिवीजन लगातार काम करा रहा है, लेकिन दबाव अब तक कम नहीं हुआ है। संभावित खतरे को देखते हुए सिचाई विभाग के चीफ इंजीनियर आरपी यादव व अधीक्षण अभियंता आरडी यादव भी दो बार आकर जायजा ले चुके हैं। अब नदी बंधे से सटकर समानांतर बहने लगी है। इस क्षेत्र के निवासी बाबूलाल, सीताराम, सुबाष, अंगद आदि ने बचाव कार्य में तेजी लाए जाने की मांग की है। इस संबंध में बाढ़ खंड डिवीजन के अधिशासी अभियंता बीपी सिंह का कहना है कि सभी संवदेनशील स्थानों को सुरक्षित बनाने के लिए तेजी से कार्य कराया जा रहा है।
बाढ़ पीड़ितों के लिए नहीं हुआ इंतजाम
गंडक नदी की बाढ़ में फंसे खड्डा, दुदही और सेवरही क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए प्रशासन की तरफ से अब तक कोई इंतजाम नहीं कराया गया है। बाढ़ में घिरे लोगों तक भोजन-पानी व जरूरी दवाइयां भी नहीं भेजी जा रही हैं। एक सप्ताह बाद भी प्रशासन ने कोई राहत शिविर भी नहीं खोला है।
खड्डा क्षेत्र में मरचहवा, बसंतपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर समेत एक दर्जन गांव एक सप्ताह से बाढ़ की चपेट में हैं। बीते मंगलवार को अचानक ही जलस्तर बढ़ने की आशंका पर प्रशासन ने इन गांवों के लोगों को सतर्क करते हुए सुरक्षित स्थान पर चले जाने को कहा। परंतु इनके लिए न तो कोई राहत शिविर खोला गया और न ही बाढ़ में फंसे लोगों तक ही भोजन-पानी भेजा गया। दुदही क्षेत्र का खैरटिया गांव भी चार दिन से बाढ़ के पानी से घिरा है। इस गांव के 50 से अधिक परिवार अमवा खास बंधे पर शरण लिए हैं लेकिन प्रशासन की तरफ से इनकी खोज-खबर भी नहीं ली गई। सेवरही ब्लाक के गांव पिपराघाट के एक दर्जन पुरवे भी हफ्ता भर से बाढ़ की चपेट में हैं। इन पुरवों के तमाम लोग अभी भी बाढ़ से घिरे हैं तो कुछ लोग आकर बंधे पर शरण लिए हुए हैं। बृहस्पतिवार को दिन भर बारिश के बीच ये बाढ़ पीड़ित परेशान घूमत रहे। प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
इस संबंध में खड्डा के तहसीलदार पवन जायसवाल का कहना है कि बाढ़ में घिरे लोगों को बाहर निकालने के लिए नाव लगाई गई है। पीड़ितों को अनाज उपलब्ध कराने के लिए डिमांड भेजी गई है। वहीं तमकुहीराज के तहसीलदार रामसुधार का कहना है कि पीड़ित लोगों को नाव के सहारे बाहर निकाला जा रहा है।