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रिटायर्ड डॉक्टरों से भी ली जा सकती है सेवा
Kushinagar
Updated Tue, 04 Feb 2014 02:45 PM IST
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पडरौना। यदि शासन की योजना रंग लाई तो वह दिन दूर नहीं होगा, जब सेवानिवृत्त विशेषज्ञ डॉक्टर अस्पतालों में मरीजों का इलाज करते नजर आएंगे। यह अस्पतालों में नए सिरे से चिकित्सकों की नियुक्ति न होने और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को देखते हुए किया जा रहा है। इसके लिए प्रमुख सचिव के निर्देश पर महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उत्तर प्रदेश शासन ने सरकारी अस्पतालों में तैनात विशेषज्ञ चिकित्सकों का ब्योरा मांगा है।
तकरीबन सभी सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की बेहद कमी है। अकेले कुशीनगर जिले के संयुक्त जिला चिकित्सालय में 33 चिकित्सकों का पद है, जिनमें 21 पुरुष एवं 12 महिला चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए। लेकिन यहां बमुश्किल 20 चिकित्सक ही नियुक्त हैं। इनमें भी केवल एक ही महिला चिकित्सक हैं। पूरे जिले के सरकारी अस्पतालों की बात करें, तो सौ से अधिक चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। यही दशा अन्य जिलों के अस्पतालों में भी है। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन ने महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उत्तर प्रदेश, लखनऊ से सभी अस्पतालों में कार्यरत विशेषज्ञ चिकित्सकों का ब्योरा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। पत्र के मुताबिक विभाग में प्रादेशिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के विशेषज्ञता के हिसाब से चिकित्सालयों में डॉक्टरों को सेवानिवृत्त के बाद 65 वर्ष की उम्र तक सेवा में लिया जाना है।
प्रमुख सचिव के निर्देश का पालन कराने के लिए महानिदेशक एएस राठौर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उत्तर प्रदेश लखनऊ ने प्रदेश भर के सभी मंडलीय अपर निदेशक, सीएमओ और सीएमएस से अस्पतालों में कार्यरत विशेषज्ञ चिकित्सकों की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। ताकि चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे सरकारी अस्पतालों में रिटायरमेंट के बाद इन विशेषज्ञ डॉक्टरों से 65 वर्ष की आयु तक चिकित्सा सेवा ली जा सके। सीएमएस डॉ. सीपी दुबे ने बताया कि जिला अस्पताल में सृजित पदों के सापेक्ष कार्यरत चिकित्सकों की सूची शासन को भेज दी गई है।
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तकरीबन सभी सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की बेहद कमी है। अकेले कुशीनगर जिले के संयुक्त जिला चिकित्सालय में 33 चिकित्सकों का पद है, जिनमें 21 पुरुष एवं 12 महिला चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए। लेकिन यहां बमुश्किल 20 चिकित्सक ही नियुक्त हैं। इनमें भी केवल एक ही महिला चिकित्सक हैं। पूरे जिले के सरकारी अस्पतालों की बात करें, तो सौ से अधिक चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। यही दशा अन्य जिलों के अस्पतालों में भी है। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन ने महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उत्तर प्रदेश, लखनऊ से सभी अस्पतालों में कार्यरत विशेषज्ञ चिकित्सकों का ब्योरा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। पत्र के मुताबिक विभाग में प्रादेशिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के विशेषज्ञता के हिसाब से चिकित्सालयों में डॉक्टरों को सेवानिवृत्त के बाद 65 वर्ष की उम्र तक सेवा में लिया जाना है।
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प्रमुख सचिव के निर्देश का पालन कराने के लिए महानिदेशक एएस राठौर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उत्तर प्रदेश लखनऊ ने प्रदेश भर के सभी मंडलीय अपर निदेशक, सीएमओ और सीएमएस से अस्पतालों में कार्यरत विशेषज्ञ चिकित्सकों की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। ताकि चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे सरकारी अस्पतालों में रिटायरमेंट के बाद इन विशेषज्ञ डॉक्टरों से 65 वर्ष की आयु तक चिकित्सा सेवा ली जा सके। सीएमएस डॉ. सीपी दुबे ने बताया कि जिला अस्पताल में सृजित पदों के सापेक्ष कार्यरत चिकित्सकों की सूची शासन को भेज दी गई है।
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