{"_id":"70-77917","slug":"Kushinagar-77917-70","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक ही मंच पर सुझाव, समाधान और तकनीक ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक ही मंच पर सुझाव, समाधान और तकनीक
Kushinagar
Updated Thu, 12 Dec 2013 05:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पडरौना (कुशीनगर)। ‘अमर उजाला’ के विराट किसान मेले का दूसरा दिन भी मेलों के इतिहास में बेमिसाल रहा। मेले में जिले भर से किसान बड़ी संख्या में शामिल हुए। किसानों के हुजूम और उनकी दिलचस्पी देखते ही बन रही थी। कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया के वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश कुमार दुबे और डॉ. अशोक राय ने खेती से संबंधित विस्तृत जानकारी दी। कठपुतली नृत्य हर उम्र के लोग बड़े चाव से देख रहे थे। स्टॉलों पर किसानों का तांता लगा हुआ था। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के धमाल का लुत्फ लेने के लिए दूसरे दिन की प्रदर्शनी समाप्त होने तक दर्शक पंडाल में जमे रहे।
उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री एवं पूर्व विधायक डॉ. पीके राय ‘अमर उजाला’ के विराट किसान मेला के दूसरे दिन मुख्य अतिथि थे। नगर के उदित नारायण इंटरमीडिएट कॉलेज में आयोजित इस विराट किसान मेले में पहुंचकर डॉ. राय ने माता सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन करके इस मेले की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि ‘अमर उजाला’ ने विराट किसान मेले में किसानों के साथ-साथ स्कूली छात्रों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया है। नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अंग्रेजी में जिस खूबी के साथ अपने नाम और काम का उच्चारण किया, उससे बदलाव साफ दिख रहा है। ऐसे ही परिवर्तन की जरूरत है, तभी इस प्रदेश का यह अंतिम छोर भी तरक्की की होड़ में शामिल हो पाएगा। उन्होंने कहा कि वह जिस क्षेत्र से हैं, जो गन्ना, गंडक और गरीबी से प्रभावित है। हमारे और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ने की रिकवरी में काफी अंतर है। यही अंतर गन्ना मूल्य को प्रभावित करता है। गन्ना और नहर हमारी प्राथमिकताओं में है।
डॉ. राय ने कहा कि बड़ी गंडक के किनारे वर्ष 1955 में बंधा बना था। उस जमाने में विपक्ष की बातें भी सरकारें बड़ी गंभीरता से सुनती थीं और कार्य कराने के लिए धन भी उपलब्ध कराती थीं। पीएच10 ऐसी प्रजाति का गेहूं था, जो अमेरिका से मंगाया जाता था। बसों में आगे की दो सीटें उच्च श्रेणी के लोगाें को आरक्षित होती थीं। उस समय 33 करोड़ की आबादी थी। आबादी तो बढ़ गई लेकिन जमीन नहीं बढ़ी। आज 33 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर कर रहे हैं। जमाना बदल गया है। इसलिए खेती में भी बदलाव लाने की जरूरत है। तकनीकी और वैज्ञानिक सलाह अपनाकर खेती करनी होगी। 118 किलोमीटर लंबाई में बहने वाली और किसानों की लाइफलाइन मुख्य पश्चिमी गंडक नहर के जीर्णोद्धार पर पहले 127 करोड़ रुपये लागत थी। अब 237 करोड़ रुपये हो गई है। इस नहर में क्षमता के 40 प्रतिशत ही पानी आ रहा है। इसमें पूरा पानी लाना हमारा प्रयास है। उन्हाेंने इंसेफेलाइटिस के प्रति जागरूकता बढ़ाए जाने पर भी जोर दिया। अंत में कहा कि ‘अमर उजाला’ ने पत्रकारिता के साथ-साथ किसानों, छात्रों और नौजवानों में जागरूकता के लिए विराट किसान मेले का आयोजन करके अत्यंत सराहनीय कार्य किया है। इसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए, वह कम है।
विज्ञापन
इससे पहले मुख्य अतिथि का ‘अमर उजाला’ परिवार की ओर से बुके और फूलमालाओं के साथ अभिनंदन किया गया। इसके बाद मुख्य अतिथि ने फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता, लकी ड्रॉ के प्रतिभागियों और प्रगतिशील किसान पारसनाथ सिंह को पुरस्कार भेंट किया। छात्राओं ने मां शारदे दया की एक दृष्टि हम पे रखना...सरस्वती वंदना और सौभाग्य है हमारा दर्शन हम जो पाए....स्वागत गीत प्रस्तुत करके कार्यक्रम की रौनक बढ़ा दी।
कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया के वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश कुमार दुबे और डॉ. अशोक राय ने खेती-किसानी के जरिए आमदनी और पैदावार बढ़ाने की बड़ी ही गूढ़ जानकारी दी। साथ ही उन्हें कृषि संबंधी किसी भी समस्या के समाधान के लिए कृषि विज्ञान केंद्र पर आमंत्रित करके कृषि मेले के औचित्य को परिभाषित किया।
कवि एवं शिक्षक हरेकृष्ण पांडेय ने कार्यक्रम का बेजोड़ संचालन किया। अब न गेहूं न धान बोते हैं, अपनी किस्मत किसान बोते हैं...सरीखी कई पंक्तियां बीच-बीच में प्रस्तुत करके उन्होंने किसान मेले में चार चांद लगा दिए। कई अन्य विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर बन्नी देवी स्कूल की प्रधानाचार्य सरिता देवी, हिंदू युवा वाहिनी के मंडल प्रभारी राजन जायसवाल, जिलाध्यक्ष संजय सिंह मुन्ना, जिला प्रभारी अजय गोविंद राव शिशु, आशुतोष गोविंद राव, पप्पू पांडेय, पूर्व ब्लाक प्रमुख शेषनाथ यादव, फूलबदन कुशवाहा, ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि उदय नारायण गुप्ता सहित पडरौना शहर और जिले के विभिन्न हिस्सों से आए लोग मौजूद थे।
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री एवं पूर्व विधायक डॉ. पीके राय ‘अमर उजाला’ के विराट किसान मेला के दूसरे दिन मुख्य अतिथि थे। नगर के उदित नारायण इंटरमीडिएट कॉलेज में आयोजित इस विराट किसान मेले में पहुंचकर डॉ. राय ने माता सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन करके इस मेले की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि ‘अमर उजाला’ ने विराट किसान मेले में किसानों के साथ-साथ स्कूली छात्रों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया है। नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अंग्रेजी में जिस खूबी के साथ अपने नाम और काम का उच्चारण किया, उससे बदलाव साफ दिख रहा है। ऐसे ही परिवर्तन की जरूरत है, तभी इस प्रदेश का यह अंतिम छोर भी तरक्की की होड़ में शामिल हो पाएगा। उन्होंने कहा कि वह जिस क्षेत्र से हैं, जो गन्ना, गंडक और गरीबी से प्रभावित है। हमारे और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ने की रिकवरी में काफी अंतर है। यही अंतर गन्ना मूल्य को प्रभावित करता है। गन्ना और नहर हमारी प्राथमिकताओं में है।
विज्ञापन
डॉ. राय ने कहा कि बड़ी गंडक के किनारे वर्ष 1955 में बंधा बना था। उस जमाने में विपक्ष की बातें भी सरकारें बड़ी गंभीरता से सुनती थीं और कार्य कराने के लिए धन भी उपलब्ध कराती थीं। पीएच10 ऐसी प्रजाति का गेहूं था, जो अमेरिका से मंगाया जाता था। बसों में आगे की दो सीटें उच्च श्रेणी के लोगाें को आरक्षित होती थीं। उस समय 33 करोड़ की आबादी थी। आबादी तो बढ़ गई लेकिन जमीन नहीं बढ़ी। आज 33 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर कर रहे हैं। जमाना बदल गया है। इसलिए खेती में भी बदलाव लाने की जरूरत है। तकनीकी और वैज्ञानिक सलाह अपनाकर खेती करनी होगी। 118 किलोमीटर लंबाई में बहने वाली और किसानों की लाइफलाइन मुख्य पश्चिमी गंडक नहर के जीर्णोद्धार पर पहले 127 करोड़ रुपये लागत थी। अब 237 करोड़ रुपये हो गई है। इस नहर में क्षमता के 40 प्रतिशत ही पानी आ रहा है। इसमें पूरा पानी लाना हमारा प्रयास है। उन्हाेंने इंसेफेलाइटिस के प्रति जागरूकता बढ़ाए जाने पर भी जोर दिया। अंत में कहा कि ‘अमर उजाला’ ने पत्रकारिता के साथ-साथ किसानों, छात्रों और नौजवानों में जागरूकता के लिए विराट किसान मेले का आयोजन करके अत्यंत सराहनीय कार्य किया है। इसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए, वह कम है।
विज्ञापन
इससे पहले मुख्य अतिथि का ‘अमर उजाला’ परिवार की ओर से बुके और फूलमालाओं के साथ अभिनंदन किया गया। इसके बाद मुख्य अतिथि ने फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता, लकी ड्रॉ के प्रतिभागियों और प्रगतिशील किसान पारसनाथ सिंह को पुरस्कार भेंट किया। छात्राओं ने मां शारदे दया की एक दृष्टि हम पे रखना...सरस्वती वंदना और सौभाग्य है हमारा दर्शन हम जो पाए....स्वागत गीत प्रस्तुत करके कार्यक्रम की रौनक बढ़ा दी।
कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया के वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश कुमार दुबे और डॉ. अशोक राय ने खेती-किसानी के जरिए आमदनी और पैदावार बढ़ाने की बड़ी ही गूढ़ जानकारी दी। साथ ही उन्हें कृषि संबंधी किसी भी समस्या के समाधान के लिए कृषि विज्ञान केंद्र पर आमंत्रित करके कृषि मेले के औचित्य को परिभाषित किया।
कवि एवं शिक्षक हरेकृष्ण पांडेय ने कार्यक्रम का बेजोड़ संचालन किया। अब न गेहूं न धान बोते हैं, अपनी किस्मत किसान बोते हैं...सरीखी कई पंक्तियां बीच-बीच में प्रस्तुत करके उन्होंने किसान मेले में चार चांद लगा दिए। कई अन्य विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर बन्नी देवी स्कूल की प्रधानाचार्य सरिता देवी, हिंदू युवा वाहिनी के मंडल प्रभारी राजन जायसवाल, जिलाध्यक्ष संजय सिंह मुन्ना, जिला प्रभारी अजय गोविंद राव शिशु, आशुतोष गोविंद राव, पप्पू पांडेय, पूर्व ब्लाक प्रमुख शेषनाथ यादव, फूलबदन कुशवाहा, ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि उदय नारायण गुप्ता सहित पडरौना शहर और जिले के विभिन्न हिस्सों से आए लोग मौजूद थे।