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या हुसैन के नारों के साथ दफन हुए ताजिये

Sat, 16 Nov 2013 05:40 AM IST
Kushinagar
Kushinagar Updated Sat, 16 Nov 2013 05:40 AM IST
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पडरौना। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाए जाने वाले मोहर्रम के दिन शुक्रवार को जिले में जगह-जगह ताजिए का जुलूस निकाला गया। साथ में चल रहे अखाड़े के खिलाड़ियों ने प्रदर्शन से सबको दांतों तले उंगली दबाने पर विवश कर दिया। ग्रामीण इलाकों में ताजिये का जुलूस दिन में ही निकाला गया जबकि पडरौना शहर में यह शाम को जुलूस निकाला गया। हर साल की तरह इस बार भी शहर में तीन स्थानों पर जुलूस के साथ ताजिये पहुुंचे। देर रात तक अखाड़े के खिलाड़ी प्रदर्शन करते रहे। ताजियों का मिलन कराने के बाद मेला समाप्त हो गया और सभी ताजिये अपने-अपने मुहल्ले में लौट गए। मोहर्रम को शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने के लिए भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात की गई थी।
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मान्यता है कि 1400 साल पहले हजरत मुहम्मद साहब के नवासे यानी नाती हजरत इमाम हुसैन और यजीद के सैनिकों के बीच जंग हुई थी। दसवें दिन हजरत इमाम हुसैन की शहादत के बाद जंग समाप्त हुई थी। उनकी शहादत की याद में ही मोहर्रम मनाया जाता है। तब से हर साल ताजिये निकाले जाते हैं। अखाड़े के खिलाड़ी प्रदर्शन करते हैं। फातेहा पढ़ा जाता है। सभी ताजियों का मिलन कराने के बाद उन्हें कर्बला में दफन कर दिया जाता है। इस मौके पर जगह-जगह मेला भी लगता है। पडरौना शहर और इसके आस-पास के ताजिये पगरा गांव के पास बने कर्बला में दफन किए जाते हैं।
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हर साल की तरह इस बार भी पडरौना शहर के बलुचहां, खिरिया टोला, छावनी के घोसी टोला, बाजार टोला, राईन मुहल्ला, मुगलपुरा, नोनियापट्टी, हरिहर छत्तर, सोहरौना, पकड़ी बुुजुर्ग के ताजिये शाम को सुभाष चौक पहुंचे। वहां फातेहा पढ़ा गया। यहां लगे मेले में बड़ी संख्या में लोगों ने भागीदारी की। देर रात तक मेला चलता रहा।
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नगर के हथिसार मुहल्ला, पंवरिया टोला, जमालपुर, बेलवा मीरगंज, फुलवारी दरबार, रामधाम पोखरा, नौका टोला, मिस्कारी मुहल्ला, कसेरा टोली और कुरैशी मुहल्ला के ताजिये तिलक चौक पहुंचे। इसी तरह बंधूछपरा, केवल छपरा, घोसी टोला और सेवक छपरा के ताजिये बावली चौक पर पहुंचे। इन स्थानों पर देर रात तक मेला लगा रहा। ट्यूबलाइट की रोशनी में जगमगाते ताजियों की आभा देखते ही बन रही थी। ताजियों और अखाड़ों के साथ ध्वनि विस्तारक यंत्रों से लगाए जा रहे या हुसैन, या हुसैन... के नारे से शहर गूंजता रहा। ताजियों का मिलान कराने के बाद वे सभी अपने-अपने मुहल्ले में लौट गए। ताजिये के जुलूस में हाजी जब्बार अली, याकूब, अनिल, बाबूलाल, मोहशिन, जहीर, अब्दुल हमीद, मैनुद्दीन अहमद सिद्दीकी, निजाम, हाजी हजरत, तैय्यब अली आदि शामिल हुए। इसी तरह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में भी ताजिये का जुलूस निकाला गया।
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