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फीकी रहेगी अध्यापकों की दीपावली
Kushinagar
Updated Tue, 13 Nov 2012 12:00 PM IST
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पडरौना। इस बार बेसिक शिक्षा विभाग के अध्यापकों की दीपावली फीकी ही रहेगी। कारण यह कि जनपद के प्राथमिक और जूनियर शिक्षकों का वेतन नहीं मिल सका है। विभागीय लापरवाही की वजह से पर्व पर बोनस की आकांक्षा पाले अध्यापकों को उनके मेहनत की कीमत तक नहीं मिल सकी है।
जनपद के प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में लगभग 3500 अध्यापक/अध्यापिका कार्यरत हैं। इन अध्यापक/अध्यापिकाआें को इस बार दीपावली बिना तनख्वाह के ही मनानी पड़ेगी। कारण यह कि अभी तक इन अध्यापकों का वेतन पास नहीं हो सका है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि अक्टूबर माह का वेतन इस बार कंप्यूटराइज्ड तरीके से सबके खाते में जाना था। इसके लिए फीडिंग भी हो गयी थी। लेकिन विभागीय उदासीनता एवं कुछ जिम्मेदारों की आपसी खींचातानी के बीच बेचारे अध्यापक मारे गये। सूत्र बताते हैं कि डाटा फीडिंग का हवाला देकर वेतन बिल नहीं बनाया गया। वेतन नहीं मिल पाने की वजह से अधिकतर शिक्षकों की दीपावली फीकी हो गयी है।
शिक्षक नेता सुनील कुमार दुबे बताते हैं कि दीपावली एवं होली सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। लेकिन इन अवसरों पर भी वेतन नहीं मिलना लापरवाही का सबूत है। वेतन ही एकमात्र आय का जरिया है। दुबे बताते हैं कि अध्यापकों को दीपावली पर बोनस मिलता है। लेकिन अब यह भी समय से नहीं मिल पा रहा है। तीन साल पुराना बोनस अब जाकर मिला है। पडरौना विकास खंड के शिक्षकों का तो और बुरा हाल है, इनके खाते में बोनस भी ट्रांसफर नहीं हो पाया है।
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जनपद के प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में लगभग 3500 अध्यापक/अध्यापिका कार्यरत हैं। इन अध्यापक/अध्यापिकाआें को इस बार दीपावली बिना तनख्वाह के ही मनानी पड़ेगी। कारण यह कि अभी तक इन अध्यापकों का वेतन पास नहीं हो सका है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि अक्टूबर माह का वेतन इस बार कंप्यूटराइज्ड तरीके से सबके खाते में जाना था। इसके लिए फीडिंग भी हो गयी थी। लेकिन विभागीय उदासीनता एवं कुछ जिम्मेदारों की आपसी खींचातानी के बीच बेचारे अध्यापक मारे गये। सूत्र बताते हैं कि डाटा फीडिंग का हवाला देकर वेतन बिल नहीं बनाया गया। वेतन नहीं मिल पाने की वजह से अधिकतर शिक्षकों की दीपावली फीकी हो गयी है।
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शिक्षक नेता सुनील कुमार दुबे बताते हैं कि दीपावली एवं होली सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। लेकिन इन अवसरों पर भी वेतन नहीं मिलना लापरवाही का सबूत है। वेतन ही एकमात्र आय का जरिया है। दुबे बताते हैं कि अध्यापकों को दीपावली पर बोनस मिलता है। लेकिन अब यह भी समय से नहीं मिल पा रहा है। तीन साल पुराना बोनस अब जाकर मिला है। पडरौना विकास खंड के शिक्षकों का तो और बुरा हाल है, इनके खाते में बोनस भी ट्रांसफर नहीं हो पाया है।
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