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महापरिनिर्वाण मंदिर में बौद्ध भिक्षुओं ने की पूजा
Thu, 16 May 2019 11:50 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 16 May 2019 11:50 PM IST
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कुशीनगर में भिक्षुओं को संघदान करते बौद्ध धर्मानुयायी।
- फोटो : अमर उजाला
कसया/जौरा बाजार। बुद्ध पूर्णिमा के उपलक्ष्य में बृहस्पतिवार को कुशीनगर में लोगों ने अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध भिक्षुओं को संघ दान किया। बताया गया कि बुद्ध पूर्णिमा के दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म, बुद्धत्व प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था।
अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के पूर्व अध्यक्ष भंते नंदरतन ने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा को त्रिविध पावन पूर्णिमा भी कहते हैं। उन्होंने बताया कि वैशाख पूर्णिमा को ही यशोधरा, कंथक, कालुदायी, अजानीय, गजराज, कंथक घोड़ा और महाबोधि वृक्ष का भी जन्म हुआ था। यही कारण है कि विश्व के संपूर्ण बौद्धों के लिए यह पूर्णिमा बहुत महत्वपूर्ण है। संघ दान के बाद बुद्ध के महापरिनिर्वाण मंदिर में विशेष पूजा की गई।
इस मौके पर एबी ज्ञानेश्वर, भंते नंदका, पी. सोंगक्रान, भिक्षुणी धम्मनैना, भंते तेंजिन, टीके राय, मोरिन राय, अशोक बरुआ, टेनी विश्वकर्मा, धर्मेंद्र गुप्त, ओमप्रकाश, रामनगीना, फूलबदन, मल्लिका, खेमा, विनोद यादव आदि मौजूद रहे।
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मधुरिया में घाघी (कुकुत्था) नदी के घाट पर बृहस्पतिवार को बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने कुकुत्था महोत्सव मनाया गया। इस महोत्सव में भगवान बुद्ध के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनके चिंतन को समाज के सभी वर्गों के लिए प्रासंगिक बताया गया।
भंते महेंद्र ने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़ा है। हमें भगवान बुद्ध के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए और उसे अपने जीवन में उतारना चाहिए। क्योंकि उनका चिंतन
आज भी विश्व के हर वर्ग के लोगों के लिए प्रासंगिक हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता शारदा यादव और संचालन भंते विमल कीर्ति ने किया।
इस दौरान ग्राम प्रधान महातम यादव, नंदलाल गोंड, अनमोल दास पारखी, डॉक्टर रमाकांत कुशवाहा, रत्नेश सिंह, रामबली गौतम, डॉ. चंदा मणि, संगीता मौर्या, फूलबदन अंबेडकर, डॉक्टर लालजी, डॉ. रामनाथ भारती, निर्भय कुमार जायसवाल, मनोज सिंह, नागेंद्र गुप्त, शंभू चौहान, प्रमोद नाथ गुप्त, मालती मौर्या, संतोष चौहान, ठग चौहान आदि मौजूद रहे।
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अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के पूर्व अध्यक्ष भंते नंदरतन ने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा को त्रिविध पावन पूर्णिमा भी कहते हैं। उन्होंने बताया कि वैशाख पूर्णिमा को ही यशोधरा, कंथक, कालुदायी, अजानीय, गजराज, कंथक घोड़ा और महाबोधि वृक्ष का भी जन्म हुआ था। यही कारण है कि विश्व के संपूर्ण बौद्धों के लिए यह पूर्णिमा बहुत महत्वपूर्ण है। संघ दान के बाद बुद्ध के महापरिनिर्वाण मंदिर में विशेष पूजा की गई।
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इस मौके पर एबी ज्ञानेश्वर, भंते नंदका, पी. सोंगक्रान, भिक्षुणी धम्मनैना, भंते तेंजिन, टीके राय, मोरिन राय, अशोक बरुआ, टेनी विश्वकर्मा, धर्मेंद्र गुप्त, ओमप्रकाश, रामनगीना, फूलबदन, मल्लिका, खेमा, विनोद यादव आदि मौजूद रहे।
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मधुरिया में घाघी (कुकुत्था) नदी के घाट पर बृहस्पतिवार को बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने कुकुत्था महोत्सव मनाया गया। इस महोत्सव में भगवान बुद्ध के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनके चिंतन को समाज के सभी वर्गों के लिए प्रासंगिक बताया गया।
भंते महेंद्र ने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़ा है। हमें भगवान बुद्ध के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए और उसे अपने जीवन में उतारना चाहिए। क्योंकि उनका चिंतन
आज भी विश्व के हर वर्ग के लोगों के लिए प्रासंगिक हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता शारदा यादव और संचालन भंते विमल कीर्ति ने किया।
इस दौरान ग्राम प्रधान महातम यादव, नंदलाल गोंड, अनमोल दास पारखी, डॉक्टर रमाकांत कुशवाहा, रत्नेश सिंह, रामबली गौतम, डॉ. चंदा मणि, संगीता मौर्या, फूलबदन अंबेडकर, डॉक्टर लालजी, डॉ. रामनाथ भारती, निर्भय कुमार जायसवाल, मनोज सिंह, नागेंद्र गुप्त, शंभू चौहान, प्रमोद नाथ गुप्त, मालती मौर्या, संतोष चौहान, ठग चौहान आदि मौजूद रहे।