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Kushinagar News: निजी वाहनों के भरोसे 30 किमी का सफर...दो बार बदलनी पड़ती है सवारी
Mon, 15 Jun 2026 01:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 15 Jun 2026 01:47 AM IST
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पडरौना। कसया से सेवरही तक 30 किलोमीटर की दूरी तय करने में दो बार सवारी बदलनी पड़ती है। इस रूट पर सुबह-शाम केवल एक-एक रोडवेज की बस चलती है। नियमित बस सेवा नहीं होने से डग्गामार टेंपो, मैजिक और निजी बसों का सहारा लेना पड़ता है। मजबूरी में यात्रियों को दो जगह सवारी बदलनी पड़ती है। मनमाना किराया भी देना पड़ता है। यात्रियों ने कई बार रोडवेज बस चलाने की मांग की, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं दिखी।
यात्रियों को पहले कसया से तुर्कपट्टी जाना पड़ता है, फिर तुर्कपट्टी से सेवरही के लिए दूसरा वाहन पकड़ना पड़ता है। कई बार तुर्कपट्टी में 30-40 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है। इस 30 किमी के सफर में डेढ़ से दो घंटे लग जाते हैं, जबकि सीधी बस से 45 मिनट में दूरी तय हो सकती है। अजय कुशवाहा ने बताया कि रोज 150 रुपये सिर्फ आने-जाने में खर्च हो जाते हैं। डग्गामार वाहन चालक 10 की जगह 15 सवारियां बैठाते हैं। बस होती तो पास बन जाता और किराया भी आधा लगता।
गुरवलिया निवासी आशा देवी ने कहा इलाज के लिए सेवरही सीएचसी जाना पड़ता है। टेंपो वाले मरीज देखकर भी तेज चलाते हैं। कई बार रास्ते में उतार देते हैं। गुरवलिया बाजार के दुकानदार राजेश गुप्ता ने कहा कि माल लाने-ले जाने में दिक्कत होती है। रोडवेज बस चलती तो सामान भी आसानी से आ जाता। डग्गामार वाहन चालक दोगुना भाड़ा वसूलते हैं। लोगों ने बताया कि इस रूट पर 50 से ज्यादा डग्गामार टेंपो और मैजिक चल रहे हैं। क्षमता 10 की है पर 15-18 सवारियां बैठाते हैं, किराया भी मनमाना वसूलते हैं।
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वर्जन
कसया-सेवरही वाया तुर्कपट्टी रूट पर रोडवेज की बस चलाने के लिए सर्वे कर शासन को भेजा गया है। इस मार्ग पर अभी सुबह एक बस और शाम को एक बस संचालित होती है। उच्चाधिकारियों का निर्देश मिलते ही इस मार्ग पर नियमित बसों का संचालन शुरू करा दिया जाएगा। -जयप्रकाश प्रधान, एआरएम पडरौना डिपो
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यात्रियों को पहले कसया से तुर्कपट्टी जाना पड़ता है, फिर तुर्कपट्टी से सेवरही के लिए दूसरा वाहन पकड़ना पड़ता है। कई बार तुर्कपट्टी में 30-40 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है। इस 30 किमी के सफर में डेढ़ से दो घंटे लग जाते हैं, जबकि सीधी बस से 45 मिनट में दूरी तय हो सकती है। अजय कुशवाहा ने बताया कि रोज 150 रुपये सिर्फ आने-जाने में खर्च हो जाते हैं। डग्गामार वाहन चालक 10 की जगह 15 सवारियां बैठाते हैं। बस होती तो पास बन जाता और किराया भी आधा लगता।
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गुरवलिया निवासी आशा देवी ने कहा इलाज के लिए सेवरही सीएचसी जाना पड़ता है। टेंपो वाले मरीज देखकर भी तेज चलाते हैं। कई बार रास्ते में उतार देते हैं। गुरवलिया बाजार के दुकानदार राजेश गुप्ता ने कहा कि माल लाने-ले जाने में दिक्कत होती है। रोडवेज बस चलती तो सामान भी आसानी से आ जाता। डग्गामार वाहन चालक दोगुना भाड़ा वसूलते हैं। लोगों ने बताया कि इस रूट पर 50 से ज्यादा डग्गामार टेंपो और मैजिक चल रहे हैं। क्षमता 10 की है पर 15-18 सवारियां बैठाते हैं, किराया भी मनमाना वसूलते हैं।
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कसया-सेवरही वाया तुर्कपट्टी रूट पर रोडवेज की बस चलाने के लिए सर्वे कर शासन को भेजा गया है। इस मार्ग पर अभी सुबह एक बस और शाम को एक बस संचालित होती है। उच्चाधिकारियों का निर्देश मिलते ही इस मार्ग पर नियमित बसों का संचालन शुरू करा दिया जाएगा। -जयप्रकाश प्रधान, एआरएम पडरौना डिपो