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Kushinagar News: रात में दो जूनियर डॉक्टरों के जिम्मे 200 मरीज, वार्ड में दलालों का कब्जा
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वार्डों में रात को भर्ती मरीजों की तबीयत बिगड़ने पर इमरजेंसी से बुलाए जाते हैं डॉक्टर
एमसीएच विंग और मेडिसिन वार्ड में ड्यूटी से नदारद मिले डॉक्टर, दलाल लगा रहा था ग्लूकोज
वार्डों में स्टाफ नर्स और वार्ड बाॅय के भरोसे रह रहे मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। रात में जिला अस्पताल के वार्डों में दलालों का बोल-बाला है। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर नहीं आते हैं। स्टाफ नर्स और वार्ड बॉय के भरोसे मरीजों की रात कटती है। तबीयत बिगड़ने पर इमरजेंसी से डॉक्टरों को बुलाया जाता है। वार्ड से लेकर इमरजेंसी तक सुरक्षा के नाम पर तैनात एक होमगार्ड तक मौजूद नहीं रहते हैं। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का इलाज जूनियर डॉक्टरों के जिम्मे रहता है। बृहस्पतिवार रात की गई पड़ताल में जिला अस्पताल में जहां अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं, वहीं मरीजों ने भी अपना दर्द बयां किया।
रात 11.00 बजे, सर्जिकल वार्ड
बृहस्पतिवार रात 11 बजे जंगल खिरकिया निवासी मारपीट में घायल शुभम यादव को वार्ड बॉय आसिफ अली इमरजेंसी से लाकर सर्जिकल वार्ड में भर्ती कर दिए। तीमारदार ने बताया कि वार्ड बाॅय से कई बार कहने के बाद भी ग्लूकोज नहीं लगा। वार्ड में घूम रहे युवक ने ग्लूकोज लगाया। ग्लूकोज लगाने वाले युवक से पूछने पर बताया कि साहब लोगों के साथ रहता हूं। पूरी रात वह इमरजेंसी से वार्ड तक घूमता है। सर्जिकल मेल और फीमेल वार्ड में स्टाफ नर्स लक्ष्मी, स्नेहलता और अर्चना की ड्यूटी रात को थी, लेकिन सिर्फ एक स्टाफ नर्स और वार्ड बॉय विजय बहादर कुशवाहा मौजूद थे। वार्ड में भर्ती रामकृपाल ने बताया कि उनका पोता ट्रेन से गिर गया है। वार्ड में कोई स्टाफ नर्स नहीं आ रही हैं। दिक्कत होने पर दौड़कर इमरजेंसी में जाना पड़ रहा है। वार्ड में कई दलाल घूम रहे हैं, जो इंजेक्शन लगाने या इलाज में मदद के लिए 100 से 50 रुपये की मांग करते हैं।
रात: 11:45 बजे, मेडिसिन वार्ड
रात करीब 11.45 बजे मेडिसिन वार्ड में 46 मरीज भर्ती थे। स्टाफ नर्स रीता यादव, राजमुनी और वार्ड बॉय अमित इंजेक्शन में दवा भर रहे थे। उन्होंने बताया कि रात में 8 बजे से जूनियर डॉ. आकाश की ड्यूटी है, लेकिन अभी आए नहीं हैं। डॉक्टर का चैंबर खाली पड़ा था।
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रात 11.30 बजे, चिल्ड्रेन वार्ड
चिल्ड्रेन वार्ड में स्टाफ नर्स अर्चना, ज्योति और वार्ड बॉय मनहरन की ड्यूटी थी, लेकिन सिर्फ एक स्टाफ नर्स मौजूद मिली। रामावती अपने बच्चे काे नेबुलाइज करा रही थीं। उन्होंने बताया कि बच्चे को सांस लेने में दिक्कत बढ़ी तो कई बार कहने पर नेबुलाइज हुआ। रात को दिक्कत होने पर स्टाफ नर्स बोलती हैं कि सुबह डॉक्टर राउंड पर आएंगे तो बताइएगा। रात को कोई नहीं आएगा। स्टाफ नर्स ने बताया कि रात को कोई यहां पर डॉक्टर नहीं रहता है। किसी मरीज की परेशानी बढ़ती है तो फोन कर इमरजेंसी से डॉक्टर को बुलाया जाता है।
रात 11:55, एमसीएच विंग
इसी तरह एमसीएच विंग में सीजर के बाद 19 महिलाओं को भर्ती किया गया था। स्टाफ नर्स प्रीति पटेल और शारदा प्रसूताओं को इंजेक्शन लगा रही थीं। बिना चादर वाले बेड पर भी प्रसूताओं को लिटाया गया था। प्रसूताओं ने बताया कि 24 घंटे बाद भी बेड के चादर नहीं बदले गए हैं। इस सवाल पर स्टाफ नर्सों ने बताया कि यह हम लोगों का विषय नहीं है। डॉ. नीलकमल की ड्यूटी है। वह क्यों नहीं आई हैं, इसकी जानकारी नहीं है। वहीं हेल्प डेस्क के रेलिंग पर एक तीमारदार अपने बच्चे को लेकर सो रहा था। कई अनजान चेहरे रात को भी अस्पताल के अंदर घूम रहे थे। सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं था।
रात 11:20 इमरजेंसी वार्ड
11.20 बजे इमरजेंसी में मिल्की के पास सड़क हादसे में घायल को लेकर कुछ युवक आए। जूनियर डॉक्टर बाहर जाकर मरीज को देखे और सिर में चोट होने के कारण हालत गंभीर बताकर वहीं से रेफर कर दिए। इमरजेंसी में जूनियर डॉक्टर खालिद रब्बानी, सरफराज अहमद, फार्मासिस्ट विशाल सिंह के अलावा इंटर्नशिप करने वाले युवक और स्टाफ नर्स मौजूद थे। सीनियर डॉ. अनवर की ड्यूटी इमरजेंसी में थी, लेकिन वह किसी कारण से आए नहीं थे। उनके न आने की जानकारी वहां मौजूद कर्मचारी भी नहीं दे सके। जिला अस्पताल में करीब 200 मरीज रात को भर्ती थे, लेकिन वार्ड में ड्यूटी से डॉक्टर गायब थे। दो जूनियर डॉक्टरों के जिम्मे मरीजों का इलाज था।
प्राचार्य की जांच में भी ड्यूटी से गायब मिली थीं स्टाफ नर्स
रात को एक वार्ड में तीन स्टाॅफ नर्स की ड्यूटी रहती है, लेकिन मेडिसिन वार्ड में दो, सर्जरी और चिल्ड्रेन वार्ड में एक-एक स्टाफ नर्स ड्यूटी पर मौजूद थीं। बाकी स्टाफ नर्सों का पता नहीं था। कुछ दिन पूर्व रात में प्राचार्य के निरीक्षण में भी स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी से गायब मिल चुके हैं। नोटिस देने के बाद भी व्यवस्था में कोई सुधार नहीं दिख रहा है।
इमरजेंसी से आने में लगती है देर
दूसरी मंजिल पर चिल्ड्रेन वार्ड और पहली मंजिल पर मेडिसिन व सर्जिकल फिमेल वार्ड है। वार्ड में भर्ती मरीजों की तबीयत बिगड़ने पर इमरजेंसी से डॉक्टरों के आने में देरी लगती है। इमरजेंसी में भी मरीजों की भीड़ रात में रहती है। इसी लिहाज से प्राचार्य ने वार्ड में भी जूनियर डॉक्टरों की ड्यूटी लगा रखी है। इसके बावजूद डॉक्टर रात को ड्यूटी नहीं कर रहे हैं।
रात को वार्डों में जूनियर डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। दो शिफ्ट में डॉक्टर ड्यूटी करते हैं। इमरजेंसी में एक सीनियर डॉक्टर के अलावा दो जूनियर डॉक्टर की ड्यूटी रहती है। वार्ड में स्टाफ के अलावा बाहरी लोगों के आने की जांच कराई जाएगी। ड्यूटी से जो स्टाफ गायब हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. आरके शाही, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज/जिला अस्पताल
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एमसीएच विंग और मेडिसिन वार्ड में ड्यूटी से नदारद मिले डॉक्टर, दलाल लगा रहा था ग्लूकोज
वार्डों में स्टाफ नर्स और वार्ड बाॅय के भरोसे रह रहे मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। रात में जिला अस्पताल के वार्डों में दलालों का बोल-बाला है। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर नहीं आते हैं। स्टाफ नर्स और वार्ड बॉय के भरोसे मरीजों की रात कटती है। तबीयत बिगड़ने पर इमरजेंसी से डॉक्टरों को बुलाया जाता है। वार्ड से लेकर इमरजेंसी तक सुरक्षा के नाम पर तैनात एक होमगार्ड तक मौजूद नहीं रहते हैं। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का इलाज जूनियर डॉक्टरों के जिम्मे रहता है। बृहस्पतिवार रात की गई पड़ताल में जिला अस्पताल में जहां अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं, वहीं मरीजों ने भी अपना दर्द बयां किया।
रात 11.00 बजे, सर्जिकल वार्ड
बृहस्पतिवार रात 11 बजे जंगल खिरकिया निवासी मारपीट में घायल शुभम यादव को वार्ड बॉय आसिफ अली इमरजेंसी से लाकर सर्जिकल वार्ड में भर्ती कर दिए। तीमारदार ने बताया कि वार्ड बाॅय से कई बार कहने के बाद भी ग्लूकोज नहीं लगा। वार्ड में घूम रहे युवक ने ग्लूकोज लगाया। ग्लूकोज लगाने वाले युवक से पूछने पर बताया कि साहब लोगों के साथ रहता हूं। पूरी रात वह इमरजेंसी से वार्ड तक घूमता है। सर्जिकल मेल और फीमेल वार्ड में स्टाफ नर्स लक्ष्मी, स्नेहलता और अर्चना की ड्यूटी रात को थी, लेकिन सिर्फ एक स्टाफ नर्स और वार्ड बॉय विजय बहादर कुशवाहा मौजूद थे। वार्ड में भर्ती रामकृपाल ने बताया कि उनका पोता ट्रेन से गिर गया है। वार्ड में कोई स्टाफ नर्स नहीं आ रही हैं। दिक्कत होने पर दौड़कर इमरजेंसी में जाना पड़ रहा है। वार्ड में कई दलाल घूम रहे हैं, जो इंजेक्शन लगाने या इलाज में मदद के लिए 100 से 50 रुपये की मांग करते हैं।
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रात: 11:45 बजे, मेडिसिन वार्ड
रात करीब 11.45 बजे मेडिसिन वार्ड में 46 मरीज भर्ती थे। स्टाफ नर्स रीता यादव, राजमुनी और वार्ड बॉय अमित इंजेक्शन में दवा भर रहे थे। उन्होंने बताया कि रात में 8 बजे से जूनियर डॉ. आकाश की ड्यूटी है, लेकिन अभी आए नहीं हैं। डॉक्टर का चैंबर खाली पड़ा था।
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रात 11.30 बजे, चिल्ड्रेन वार्ड
चिल्ड्रेन वार्ड में स्टाफ नर्स अर्चना, ज्योति और वार्ड बॉय मनहरन की ड्यूटी थी, लेकिन सिर्फ एक स्टाफ नर्स मौजूद मिली। रामावती अपने बच्चे काे नेबुलाइज करा रही थीं। उन्होंने बताया कि बच्चे को सांस लेने में दिक्कत बढ़ी तो कई बार कहने पर नेबुलाइज हुआ। रात को दिक्कत होने पर स्टाफ नर्स बोलती हैं कि सुबह डॉक्टर राउंड पर आएंगे तो बताइएगा। रात को कोई नहीं आएगा। स्टाफ नर्स ने बताया कि रात को कोई यहां पर डॉक्टर नहीं रहता है। किसी मरीज की परेशानी बढ़ती है तो फोन कर इमरजेंसी से डॉक्टर को बुलाया जाता है।
रात 11:55, एमसीएच विंग
इसी तरह एमसीएच विंग में सीजर के बाद 19 महिलाओं को भर्ती किया गया था। स्टाफ नर्स प्रीति पटेल और शारदा प्रसूताओं को इंजेक्शन लगा रही थीं। बिना चादर वाले बेड पर भी प्रसूताओं को लिटाया गया था। प्रसूताओं ने बताया कि 24 घंटे बाद भी बेड के चादर नहीं बदले गए हैं। इस सवाल पर स्टाफ नर्सों ने बताया कि यह हम लोगों का विषय नहीं है। डॉ. नीलकमल की ड्यूटी है। वह क्यों नहीं आई हैं, इसकी जानकारी नहीं है। वहीं हेल्प डेस्क के रेलिंग पर एक तीमारदार अपने बच्चे को लेकर सो रहा था। कई अनजान चेहरे रात को भी अस्पताल के अंदर घूम रहे थे। सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं था।
रात 11:20 इमरजेंसी वार्ड
11.20 बजे इमरजेंसी में मिल्की के पास सड़क हादसे में घायल को लेकर कुछ युवक आए। जूनियर डॉक्टर बाहर जाकर मरीज को देखे और सिर में चोट होने के कारण हालत गंभीर बताकर वहीं से रेफर कर दिए। इमरजेंसी में जूनियर डॉक्टर खालिद रब्बानी, सरफराज अहमद, फार्मासिस्ट विशाल सिंह के अलावा इंटर्नशिप करने वाले युवक और स्टाफ नर्स मौजूद थे। सीनियर डॉ. अनवर की ड्यूटी इमरजेंसी में थी, लेकिन वह किसी कारण से आए नहीं थे। उनके न आने की जानकारी वहां मौजूद कर्मचारी भी नहीं दे सके। जिला अस्पताल में करीब 200 मरीज रात को भर्ती थे, लेकिन वार्ड में ड्यूटी से डॉक्टर गायब थे। दो जूनियर डॉक्टरों के जिम्मे मरीजों का इलाज था।
प्राचार्य की जांच में भी ड्यूटी से गायब मिली थीं स्टाफ नर्स
रात को एक वार्ड में तीन स्टाॅफ नर्स की ड्यूटी रहती है, लेकिन मेडिसिन वार्ड में दो, सर्जरी और चिल्ड्रेन वार्ड में एक-एक स्टाफ नर्स ड्यूटी पर मौजूद थीं। बाकी स्टाफ नर्सों का पता नहीं था। कुछ दिन पूर्व रात में प्राचार्य के निरीक्षण में भी स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी से गायब मिल चुके हैं। नोटिस देने के बाद भी व्यवस्था में कोई सुधार नहीं दिख रहा है।
इमरजेंसी से आने में लगती है देर
दूसरी मंजिल पर चिल्ड्रेन वार्ड और पहली मंजिल पर मेडिसिन व सर्जिकल फिमेल वार्ड है। वार्ड में भर्ती मरीजों की तबीयत बिगड़ने पर इमरजेंसी से डॉक्टरों के आने में देरी लगती है। इमरजेंसी में भी मरीजों की भीड़ रात में रहती है। इसी लिहाज से प्राचार्य ने वार्ड में भी जूनियर डॉक्टरों की ड्यूटी लगा रखी है। इसके बावजूद डॉक्टर रात को ड्यूटी नहीं कर रहे हैं।
रात को वार्डों में जूनियर डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। दो शिफ्ट में डॉक्टर ड्यूटी करते हैं। इमरजेंसी में एक सीनियर डॉक्टर के अलावा दो जूनियर डॉक्टर की ड्यूटी रहती है। वार्ड में स्टाफ के अलावा बाहरी लोगों के आने की जांच कराई जाएगी। ड्यूटी से जो स्टाफ गायब हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. आरके शाही, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज/जिला अस्पताल