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गंडक नदी बदल रही रास्ता, बंधों पर बढ़ा दबाव
Updated Sat, 08 Jul 2017 04:27 PM IST
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कुशीनगर। अपनी प्रकृति के अनुरूप गंडक नदी इस बार फिर रास्ता बदल रही है। नदी का दबाव दक्षिण की तरफ अधिक होने का सीधा प्रभाव कुशीनगर जिले के तटबंधों पर दिखने भी लगा है। आश्चर्यजनक रूप से इस बार 1.31 लाख क्यूसेक डिस्चार्ज पर ही नदी चेतावनी बिंदु के पार पहुंच गई। इतने ही जल स्तर पर नदी एपी तटबंध पर कई जगह दबाव बनाने लगी है। बाढ़ खंड के अफसर भी नदी के इस रुख में आए परिवर्तन से हैरान हैं। जानकार इसे कुशीनगर के लिए खतरे का संकेत मान रहे हैं।
हिमालय के भीतरी हिस्सों से निकली गंडक नदी कुशीनगर जिले के उतरी सीमा से सटकर बिहार प्रांत में जाती है। सामान्य दिनों में नदी का प्रवाह क्षेत्र करीब 500 मीटर चौड़ाई में होता है, लेकिन बरसात आते ही इसका फैलाव लगभग 10 किलोमीटर तक हो जाता है। नदी अक्सर बरसात के दिनों में अपना रास्ता बदलती है। पिछले कुछ वर्षों से इसका दबाव उत्तर तरफ अधिक होने की वजह से कुशीनगर जिले के तटबंधों पर दबाव कम था, लेकिन इस वर्ष बरसात शुरू होने के साथ ही नदी का रुख भी बदलने लगा है। स्थिति यह है कि अब तक नदी में वाल्मीकिनगर बैराज से अधिकतम एक लाख 31 हजार क्यूसेक ही पानी छोड़ा गया और इतने में ही भैंसहा गेज पर जलस्तर चेतावनी बिंदु 95 मीटर को पार कर गया था। नदी के इस रुख से बाढ़ खंड डिवीजन के अभियंता भी हैरान हैं। बाढ़ खंड डिवीजन से जुड़े लोगों के अनुसार वर्ष 2002 में 27 जुलाई को गंडक नदी में का स्तर छह लाख क्यूसेक तक पहुंचा था। तब जाकर नदी डेंजर लेवल से डेढ़ मीटर ऊपर पहुंच गई थी। परंतु इस बार 1.31 लाख क्यूसेक पर ही जलस्तर चेतावनी बिंदु 95 मीटर से 31 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया।
बाढ़ खंड डिवीजन के अधिशासी अभियंता बीपी सिंह का कहना है कि नदी का दबाव इस बार दक्षिण तरफ होने से मुश्किल बढ़ी है। ऐसा पहली बार है जब इतना कम डिस्चार्ज होने के बावजूद एपी तटबंध पर कई दिन से नदी का दबाव बना हुआ है। इनका भी मानना है कि नदी का प्रवाह इस बार दक्षिण किनारे पर अधिक है।
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हिमालय के भीतरी हिस्सों से निकली गंडक नदी कुशीनगर जिले के उतरी सीमा से सटकर बिहार प्रांत में जाती है। सामान्य दिनों में नदी का प्रवाह क्षेत्र करीब 500 मीटर चौड़ाई में होता है, लेकिन बरसात आते ही इसका फैलाव लगभग 10 किलोमीटर तक हो जाता है। नदी अक्सर बरसात के दिनों में अपना रास्ता बदलती है। पिछले कुछ वर्षों से इसका दबाव उत्तर तरफ अधिक होने की वजह से कुशीनगर जिले के तटबंधों पर दबाव कम था, लेकिन इस वर्ष बरसात शुरू होने के साथ ही नदी का रुख भी बदलने लगा है। स्थिति यह है कि अब तक नदी में वाल्मीकिनगर बैराज से अधिकतम एक लाख 31 हजार क्यूसेक ही पानी छोड़ा गया और इतने में ही भैंसहा गेज पर जलस्तर चेतावनी बिंदु 95 मीटर को पार कर गया था। नदी के इस रुख से बाढ़ खंड डिवीजन के अभियंता भी हैरान हैं। बाढ़ खंड डिवीजन से जुड़े लोगों के अनुसार वर्ष 2002 में 27 जुलाई को गंडक नदी में का स्तर छह लाख क्यूसेक तक पहुंचा था। तब जाकर नदी डेंजर लेवल से डेढ़ मीटर ऊपर पहुंच गई थी। परंतु इस बार 1.31 लाख क्यूसेक पर ही जलस्तर चेतावनी बिंदु 95 मीटर से 31 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया।
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बाढ़ खंड डिवीजन के अधिशासी अभियंता बीपी सिंह का कहना है कि नदी का दबाव इस बार दक्षिण तरफ होने से मुश्किल बढ़ी है। ऐसा पहली बार है जब इतना कम डिस्चार्ज होने के बावजूद एपी तटबंध पर कई दिन से नदी का दबाव बना हुआ है। इनका भी मानना है कि नदी का प्रवाह इस बार दक्षिण किनारे पर अधिक है।
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