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गंडक नदी का डिस्चार्ज घटने के बाद कटान तेज
Updated Tue, 22 Aug 2017 05:31 PM IST
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कुशीनगर। गंडक नदी में वाल्मीकि बैराज से पानी का डिस्चार्ज घटने के बाद एपी तटबंध के किनारे कटान तेज हो गया है। पिपराघाट व जंगली पट्टी के सामने के एक-एक स्पर का पांच-पांच मीटर हिस्सा कट गया है। बांध के किनारे स्थित गांवों के लोग नदी के रुख से सहमे हुए हैं।
एक सप्ताह पहले वाल्मीकि बैराज से गंडक नदी में पानी का डिस्चार्ज पांच लाख क्यूसेक से अधिक हो गया था, इसके चलते खड्डा से लेकर तमकुहीराज तक बंधे पर दबाव बढ़ गया था। अब जलस्तर कम हो गया है। परंतु किनारों पर कटान तेज हो गया है। एपी तटबंध के पिपराघाट और जंगली पट्टी में एक-एक स्पर का नोज कट गया है। इसके चलते बीन टोली, जवहीं दयाल, घघवा जगदीश, चैन पट्टी, विरवट कोन्हवलिया, बाक खास, बाघाचौर और अहिरौलीदान आदि गांवों के सामने बंधे पर खतरा बढ़ गया है। गांव वालों का कहना है कि कटान रोकने का जल्दी उपाय नहीं किया गया तो बंधे की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।
इस संबंध में बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता बीपी सिंह का कहना है कि सभी संवेदनशील जगहों पर नजर रखी जा रही है। जरूरत के अनुसार बचाव कार्य भी किए जा रहे हैं।
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एक सप्ताह पहले वाल्मीकि बैराज से गंडक नदी में पानी का डिस्चार्ज पांच लाख क्यूसेक से अधिक हो गया था, इसके चलते खड्डा से लेकर तमकुहीराज तक बंधे पर दबाव बढ़ गया था। अब जलस्तर कम हो गया है। परंतु किनारों पर कटान तेज हो गया है। एपी तटबंध के पिपराघाट और जंगली पट्टी में एक-एक स्पर का नोज कट गया है। इसके चलते बीन टोली, जवहीं दयाल, घघवा जगदीश, चैन पट्टी, विरवट कोन्हवलिया, बाक खास, बाघाचौर और अहिरौलीदान आदि गांवों के सामने बंधे पर खतरा बढ़ गया है। गांव वालों का कहना है कि कटान रोकने का जल्दी उपाय नहीं किया गया तो बंधे की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।
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इस संबंध में बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता बीपी सिंह का कहना है कि सभी संवेदनशील जगहों पर नजर रखी जा रही है। जरूरत के अनुसार बचाव कार्य भी किए जा रहे हैं।
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