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कसाडा पर्यटकों के लिए लगा रहा फाइबर शेड
kushinagar
Updated Sun, 01 Jul 2018 10:37 PM IST
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अमर उजाला
- फोटो : अमर उजाला
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कसया। बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए गंगा के समान पवित्र हिरण्यवती नदी के किनारे बुद्धा घाट पर फाइबर शेड लगाया जा रहा है। इसके लिए कुशीनगर विशेष विकास प्राधिकरण (कसाडा) ने काम शुरू करा दिया है। कसाडा की ओर से नदी के किनारे फाइबर शेड लगाए जाने का कार्य 15 दिन के अंदर पूरा कराने का दावा किया जा रहा है। यह काम तेजी के साथ चल रहा है। इसके निर्माण में 750 किलोग्राम स्टील के राड का उपयोग किया जाना है। निर्माण में लोहे का उपयोग नहीं होगा। इस निर्माण में लगभग आठ लाख रुपये की रकम खर्च होनी है।
इतिहासकारों के अनुसार हिरण्यवती नदी के किनारे कुशीनारा (आज का कुशीनगर) राज्य था। पावानगर से अपने घर कपिलवस्तु जाने के लिए भगवान बुद्ध ने हिरण्यवती नदी के किनारे विश्राम किया था। नदी के किनारे स्थित शाल्व वन में उन्होंने अपने शिष्य आनंद को उपदेश देने के बाद महापरिनिर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया था। 19वीं शताब्दी में कुशीनगर की खोज के साथ ही हिरण्यवती नदी के इतिहास की जानकारी हुई। उसके बाद बौद्ध अनुयायियों और प्रशासन स्तर से प्रयास कर नदी के जीर्णोद्धार के लिए काम होते रहे। इस कड़ी में जिले में रहे डीएम लोकेश एम., शंभू कुमार के अलावा प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक सुब्बाराव समेत कई लोगों ने सफाई के लिए काफी प्रयास किया है। वहीं जिले में डीएम रहे आंद्रा वामसी की तरफ से कुशीनगर में आयोजित टेंपल एरिया मैनेजमेंट कमेटी की बैठक में बौद्ध भिक्षुओं की तरफ से नदी के किनारे तेज धूप, गर्मी और बरसात के मौसम में साधना और पूजा अर्चन करने के लिए शेड की मांग की गई थी। बौद्ध भिक्षुओं की मांग पर ही उन्होंने कसाडा को फाइबर शेड लगवाए जाने का निर्देश दिया था। इसी परिप्रेक्ष्य में कसाडा बुद्धा घाट पर यह फाइबर शेड लगवा रहा है।
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इतिहासकारों के अनुसार हिरण्यवती नदी के किनारे कुशीनारा (आज का कुशीनगर) राज्य था। पावानगर से अपने घर कपिलवस्तु जाने के लिए भगवान बुद्ध ने हिरण्यवती नदी के किनारे विश्राम किया था। नदी के किनारे स्थित शाल्व वन में उन्होंने अपने शिष्य आनंद को उपदेश देने के बाद महापरिनिर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया था। 19वीं शताब्दी में कुशीनगर की खोज के साथ ही हिरण्यवती नदी के इतिहास की जानकारी हुई। उसके बाद बौद्ध अनुयायियों और प्रशासन स्तर से प्रयास कर नदी के जीर्णोद्धार के लिए काम होते रहे। इस कड़ी में जिले में रहे डीएम लोकेश एम., शंभू कुमार के अलावा प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक सुब्बाराव समेत कई लोगों ने सफाई के लिए काफी प्रयास किया है। वहीं जिले में डीएम रहे आंद्रा वामसी की तरफ से कुशीनगर में आयोजित टेंपल एरिया मैनेजमेंट कमेटी की बैठक में बौद्ध भिक्षुओं की तरफ से नदी के किनारे तेज धूप, गर्मी और बरसात के मौसम में साधना और पूजा अर्चन करने के लिए शेड की मांग की गई थी। बौद्ध भिक्षुओं की मांग पर ही उन्होंने कसाडा को फाइबर शेड लगवाए जाने का निर्देश दिया था। इसी परिप्रेक्ष्य में कसाडा बुद्धा घाट पर यह फाइबर शेड लगवा रहा है।
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