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जिले में एक दर्जन विद्यालय केवल शिक्षा मित्रों के सहारे थे
Updated Thu, 27 Jul 2017 07:50 PM IST
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कुशीनगर। जिले के प्राथमिक स्कूलों को खोलने-बंद करने की जिम्मेदारी उठा रहे शिक्षा मित्रों के बाद अचानक बाहर हो जाने से व्यवस्था बिगड़नी तय है। दर्जन भर स्कूल तो केवल शिक्षा मित्रों के सहारे ही चल रहे थे। विभागीय अफसर वैकल्पिक इंतजाम का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन वस्तुस्थिति को वे भी बेहतर जानते हैं।
जिले में 2179 प्राथमिक स्कूल हैं, जिनमें करीब नौ हजार अध्यापक हैं। इनमें से 2484 अध्यापक शिक्षा मित्र पद से समायोजित हैं। इसके अलावा 342 शिक्षा मित्र समायोजन के इंतजार में थे। बाकी बचे चार हजार सहायक अध्यापकों में से करीब ढाई हजार ऐसे हैं जो 72 हजार वाली भर्ती में से हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्कूल संचालन का पूरा दारोमदार इन चार हजार सहायक अध्यापकों पर ही है। विद्यालयों की संख्या और इनका अनुपात देखा जाए तो बमुश्किल ही हर स्कूल में दो अध्यापक तैनात हो पाएंगे। जब शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक पद पर समायोजित किया गया तो अधिकांश महिला शिक्षकों को उनके मूल विद्यालय पर ही तैनाती दी गई। इसके बाद जब सीधी भर्ती से अध्यापकों को तैनाती दी गई तो उन्हें बंद व एकल स्कूलों में भेजा गया। सीधी भर्ती वाले अध्यापकों में से भी दो तिहाई अध्यापक दूसरे जिलों के निवासी हैं जो या तो स्कूल दूर होने की वजह से लेट होते हैं या फिर हफ्ता-दस दिन बाद अपने घर जाने के लिए अवकाश लेते हैं। ऐसे विद्यालयों में शिक्षा मित्रों के जिम्मे ही स्कूल खोलने व बंद करने से लगायत घर-घर जाकर बच्चों को बुलाने तक का जिम्मा रहता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब शिक्षा मित्रों ने स्कूल जाना बंद किया तो एक दर्जन स्कूलों के संचालन में दिक्कत आ गई। इसके अलावा बाकी अन्य स्कूलों में भी शिक्षकों की कमी नजर आने लगी। वृहस्पतिवार को जिले के प्राइमरी स्कूल खुले तो जरूर लेकिन शिक्षा मित्रों की कमी का असर दिखा।
बीएसए हेमंत राव भी मानते हैं कि अचानक इतनी बड़ी संख्या में अध्यापकों के कम होने से स्कूल चलो अभियान, ड्रेस, पुस्तक, दूध व फल वितरण समेत तमाम कार्य प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि इसके लिए वे वैकल्पिक इंतजाम का भी दावा कर रहे हैं। बीएसए के अनुसार सभी बीईओ को निर्देशित किया गया है कि अगर कहीं शिक्षा मित्रों के नहीं आने की वजह से स्कूल बंद होने की स्थिति दिखे तो बगल के दूसरे स्कूलों से अध्यापकों की ड्यूटी लगाई जाए। बीएसए के इस आदेश से स्कूलों का ताला तो खुला रह सकता है, लेकिन इससे अन्य स्कूलों की व्यवस्था भी बिगड़ने का खतरा है।
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जिले में 2179 प्राथमिक स्कूल हैं, जिनमें करीब नौ हजार अध्यापक हैं। इनमें से 2484 अध्यापक शिक्षा मित्र पद से समायोजित हैं। इसके अलावा 342 शिक्षा मित्र समायोजन के इंतजार में थे। बाकी बचे चार हजार सहायक अध्यापकों में से करीब ढाई हजार ऐसे हैं जो 72 हजार वाली भर्ती में से हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्कूल संचालन का पूरा दारोमदार इन चार हजार सहायक अध्यापकों पर ही है। विद्यालयों की संख्या और इनका अनुपात देखा जाए तो बमुश्किल ही हर स्कूल में दो अध्यापक तैनात हो पाएंगे। जब शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक पद पर समायोजित किया गया तो अधिकांश महिला शिक्षकों को उनके मूल विद्यालय पर ही तैनाती दी गई। इसके बाद जब सीधी भर्ती से अध्यापकों को तैनाती दी गई तो उन्हें बंद व एकल स्कूलों में भेजा गया। सीधी भर्ती वाले अध्यापकों में से भी दो तिहाई अध्यापक दूसरे जिलों के निवासी हैं जो या तो स्कूल दूर होने की वजह से लेट होते हैं या फिर हफ्ता-दस दिन बाद अपने घर जाने के लिए अवकाश लेते हैं। ऐसे विद्यालयों में शिक्षा मित्रों के जिम्मे ही स्कूल खोलने व बंद करने से लगायत घर-घर जाकर बच्चों को बुलाने तक का जिम्मा रहता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब शिक्षा मित्रों ने स्कूल जाना बंद किया तो एक दर्जन स्कूलों के संचालन में दिक्कत आ गई। इसके अलावा बाकी अन्य स्कूलों में भी शिक्षकों की कमी नजर आने लगी। वृहस्पतिवार को जिले के प्राइमरी स्कूल खुले तो जरूर लेकिन शिक्षा मित्रों की कमी का असर दिखा।
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बीएसए हेमंत राव भी मानते हैं कि अचानक इतनी बड़ी संख्या में अध्यापकों के कम होने से स्कूल चलो अभियान, ड्रेस, पुस्तक, दूध व फल वितरण समेत तमाम कार्य प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि इसके लिए वे वैकल्पिक इंतजाम का भी दावा कर रहे हैं। बीएसए के अनुसार सभी बीईओ को निर्देशित किया गया है कि अगर कहीं शिक्षा मित्रों के नहीं आने की वजह से स्कूल बंद होने की स्थिति दिखे तो बगल के दूसरे स्कूलों से अध्यापकों की ड्यूटी लगाई जाए। बीएसए के इस आदेश से स्कूलों का ताला तो खुला रह सकता है, लेकिन इससे अन्य स्कूलों की व्यवस्था भी बिगड़ने का खतरा है।
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