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परिषदीय स्कूलों में ड्रेस वितरण का मामला
Updated Fri, 14 Jul 2017 05:06 PM IST
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कुशीनगर। जिले के परिषदीय स्कूलों में जुलाई के पहले पखवारे में ड्रेस वितरण का कार्य रफ्तार नहीं पकड़ पाया। शासन ने पहले पखवारे में इस कार्य को पूर्ण करने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक 10 फीसदी स्कूलों में भी ड्रेस नहीं पहुंच पाया है। ड्रेस वितरण करने वाली फर्में व इससे जुड़े अन्य लोग जीएसटी का हवाला दे रहे हैं।
जनपद में 2179 प्राथमिक तथा 824 जूनियर विद्यालय संचालित हैं। इनमें करीब तीन लाख बच्चे पढ़ते हैं। नई सरकार ने ड्रेस का रंग बदलने के साथ ही इसे 15 जुलाई तक वितरित कराने का निर्देश दिया था। इसके लिए विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में प्रति विद्यार्थी 200 रुपये की दर से दो सेट यूनिफार्म का धन भी भेज दिया गया है। परंतु ड्रेस वितरण का यह कार्य सुस्त है। वजह यह बताई जा रही है कि एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद केंद्र सरकार ने कपड़ों के मैन्युफैक्चरिंग पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगाते हुये कागजी प्रक्रिया कठिन कर दी है। सूरत शहर के कपड़ा व्यापारियों की हड़ताल के चलते यहां के कारोबारियों को मांग के अनुरूप कपड़ा नहीं मिल रहा है। कागजी प्रक्रिया जटिल होने के चलते ड्रेस वितरण में लगी फर्में भी असमंजस की स्थिति में हैं। कहीं-कहीं पुराने स्टॉक से व्यवस्था करके ड्रेस बंटा है लेकिन अधिकांश जगह अभी भी इंतजार ही हो रहा है। जीएसटी के बाद बढ़ी दर के चलते होल सेलर कपड़ों की आपूर्ति से कन्नी काटने लगे हैं। कुछ ऐसे भी हैं जिनको अभी तक जीएसटी के लिए नंबर ही नहीं मिला है। थोक कपड़ों के विक्रेता ईश्वर चंद्र ने बताया कि जीएसटी के बाद कपड़ों के रेट में वृद्धि हुई है। कपड़ों की सिलाई करने वाले मुंद्रिका प्रसाद ने बताया कि पिछले सप्ताह उन्हें 300 सेट ड्रेस तैयार करने का आर्डर मिला था, लेकिन कपड़ों की किल्लत के चलते कार्य नहीं हो पा रहा है। शिक्षक सफाउद्दीन अंसारी, देवेंद्र ओझा, दयाशंकर, प्रमोद सिंह आदि का कहना है कि टेंडर के बाद भी सप्लायर कपड़े नहीं दे सके हैं। ऐसे में बच्चों को तत्काल ड्रेस उपलब्ध कराना बड़ी समस्या बन गई है। आपूर्तिकर्ता शीघ्र स्थिति सामान्य होने का आश्वासन दे रहे हैं।
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जनपद में 2179 प्राथमिक तथा 824 जूनियर विद्यालय संचालित हैं। इनमें करीब तीन लाख बच्चे पढ़ते हैं। नई सरकार ने ड्रेस का रंग बदलने के साथ ही इसे 15 जुलाई तक वितरित कराने का निर्देश दिया था। इसके लिए विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में प्रति विद्यार्थी 200 रुपये की दर से दो सेट यूनिफार्म का धन भी भेज दिया गया है। परंतु ड्रेस वितरण का यह कार्य सुस्त है। वजह यह बताई जा रही है कि एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद केंद्र सरकार ने कपड़ों के मैन्युफैक्चरिंग पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगाते हुये कागजी प्रक्रिया कठिन कर दी है। सूरत शहर के कपड़ा व्यापारियों की हड़ताल के चलते यहां के कारोबारियों को मांग के अनुरूप कपड़ा नहीं मिल रहा है। कागजी प्रक्रिया जटिल होने के चलते ड्रेस वितरण में लगी फर्में भी असमंजस की स्थिति में हैं। कहीं-कहीं पुराने स्टॉक से व्यवस्था करके ड्रेस बंटा है लेकिन अधिकांश जगह अभी भी इंतजार ही हो रहा है। जीएसटी के बाद बढ़ी दर के चलते होल सेलर कपड़ों की आपूर्ति से कन्नी काटने लगे हैं। कुछ ऐसे भी हैं जिनको अभी तक जीएसटी के लिए नंबर ही नहीं मिला है। थोक कपड़ों के विक्रेता ईश्वर चंद्र ने बताया कि जीएसटी के बाद कपड़ों के रेट में वृद्धि हुई है। कपड़ों की सिलाई करने वाले मुंद्रिका प्रसाद ने बताया कि पिछले सप्ताह उन्हें 300 सेट ड्रेस तैयार करने का आर्डर मिला था, लेकिन कपड़ों की किल्लत के चलते कार्य नहीं हो पा रहा है। शिक्षक सफाउद्दीन अंसारी, देवेंद्र ओझा, दयाशंकर, प्रमोद सिंह आदि का कहना है कि टेंडर के बाद भी सप्लायर कपड़े नहीं दे सके हैं। ऐसे में बच्चों को तत्काल ड्रेस उपलब्ध कराना बड़ी समस्या बन गई है। आपूर्तिकर्ता शीघ्र स्थिति सामान्य होने का आश्वासन दे रहे हैं।
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