{"_id":"5b7da44b42c7924676416b25","slug":"111534960715-kushinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुल्लक तोड़ छात्रा ने केरल बाढ़ पीड़ितों को दी आर्थिक मदद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुल्लक तोड़ छात्रा ने केरल बाढ़ पीड़ितों को दी आर्थिक मदद
Updated Wed, 22 Aug 2018 11:28 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
छात्रा ने केरल के बाढ़ पीड़ितों को दी मदद
पूर्व में छात्रा ने ठिठुर रही बुजुर्ग को दिया था कंबल
बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए स्कूल में जमा की धनराशि
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना। पीड़ितों की मदद से पुण्य और मन को सुकून मिलता है। ऐसी बातें बड़े लोग करते सुने जाते हैं, लेकिन केरल के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए शहर की पांच वर्षीय छात्रा आगे आई है। परिजनों से उपहार में मिले एक-एक रुपये जुटा कर रखी छात्रा ने पीड़ितों को देने की ठान ली। जब स्कूल की ओर से बच्चों और उनके अभिभावकों से केरल के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए सहयोग की बात कही गई, तो वह घर पहुंची और जुटाए पैसे को गुल्लक तोड़ कर बाहर निकाला। उसमें रखे गए 350 रुपये में से 200 रुपये बाढ़ पीड़ितों के लिए स्कूल प्रबंधक को दे भी दिया। छात्रा की मदद करने की इच्छा शक्ति को देख कर परिजनों का भी हौसला बढ़ गया।
नेहरू नगर मोहल्ले के निवासी सुनील मोदनवाल की पांच वर्षीय बेटी अग्रिमा मोदनवाल सेंट थ्रेसेस स्कूल में कक्षा एक की छात्रा है। अग्रिमा के स्कूल डॉयरी पर केरल बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए सहयोग राशि एकत्र किए जाने की बात लिखी गई थी। घर पहुंचने पर जब पिता ने डॉयरी पर लिखे गुहार को देखा, तो उन्होंने सहयोग करने की इच्छा जताई और बेटी को रुपये देने की बात कही। बेटी अग्रिमा ने परिजनों से सहयोग न लेकर उसने अपने गुल्लक को तोड़ दिया और उसमें से 200 रुपये पीड़ितों की मदद के लिए निकाल लिया। मां दिव्या लक्ष्मी बताती हैं कि अग्रिमा जब साढ़े तीन वर्ष की थी, तो रात के समय घर के बाहर ठंड के मौसम में ठिठुर रही बुजुर्ग को देख उसने घर का कंबल ले जाकर दे दिया दिया था। वह बताती हैं कि उनकी बेटी शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रही है और कार्यक्रमों में प्रतिभाग कर कई मेडल भी प्राप्त कर चुकी है। वह दूसरों की मदद करना चाहती है।
विज्ञापन
पूर्व में छात्रा ने ठिठुर रही बुजुर्ग को दिया था कंबल
बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए स्कूल में जमा की धनराशि
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना। पीड़ितों की मदद से पुण्य और मन को सुकून मिलता है। ऐसी बातें बड़े लोग करते सुने जाते हैं, लेकिन केरल के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए शहर की पांच वर्षीय छात्रा आगे आई है। परिजनों से उपहार में मिले एक-एक रुपये जुटा कर रखी छात्रा ने पीड़ितों को देने की ठान ली। जब स्कूल की ओर से बच्चों और उनके अभिभावकों से केरल के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए सहयोग की बात कही गई, तो वह घर पहुंची और जुटाए पैसे को गुल्लक तोड़ कर बाहर निकाला। उसमें रखे गए 350 रुपये में से 200 रुपये बाढ़ पीड़ितों के लिए स्कूल प्रबंधक को दे भी दिया। छात्रा की मदद करने की इच्छा शक्ति को देख कर परिजनों का भी हौसला बढ़ गया।
नेहरू नगर मोहल्ले के निवासी सुनील मोदनवाल की पांच वर्षीय बेटी अग्रिमा मोदनवाल सेंट थ्रेसेस स्कूल में कक्षा एक की छात्रा है। अग्रिमा के स्कूल डॉयरी पर केरल बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए सहयोग राशि एकत्र किए जाने की बात लिखी गई थी। घर पहुंचने पर जब पिता ने डॉयरी पर लिखे गुहार को देखा, तो उन्होंने सहयोग करने की इच्छा जताई और बेटी को रुपये देने की बात कही। बेटी अग्रिमा ने परिजनों से सहयोग न लेकर उसने अपने गुल्लक को तोड़ दिया और उसमें से 200 रुपये पीड़ितों की मदद के लिए निकाल लिया। मां दिव्या लक्ष्मी बताती हैं कि अग्रिमा जब साढ़े तीन वर्ष की थी, तो रात के समय घर के बाहर ठंड के मौसम में ठिठुर रही बुजुर्ग को देख उसने घर का कंबल ले जाकर दे दिया दिया था। वह बताती हैं कि उनकी बेटी शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रही है और कार्यक्रमों में प्रतिभाग कर कई मेडल भी प्राप्त कर चुकी है। वह दूसरों की मदद करना चाहती है।
विज्ञापन