फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   khalid mujahid death and politics

खालिद की मौत पर यूपी में क्यों हैं खलबली?

Mon, 20 May 2013 08:47 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/लखनऊ Updated Mon, 20 May 2013 08:47 AM IST
विज्ञापन
khalid mujahid death and politics

मार्च में कुंडा के सर्किल ऑफिसर जियाउल हक की मौत और अब मई में कचहरी सीरियल ब्लास्ट के आरोपी खालिद मुजाहिद की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत।

विज्ञापन


पर, सरकार दो अलग तरह की मौतों पर एक जैसी चिंता से परेशान। दोनों ही घटनाओं में सीबीआई जांच की घोषणाएं। यह सब यूं ही नहीं है।

सरकार को संशय है कि पहले जिया और अब खालिद की मौत पर मुसलमानों का गुस्सा उसके लिए कई समस्याएं खड़ी कर सकता है।

मुसलमानों में यह संदेश जा सकता है कि सपा भले ही मुसलमानों के हितों के लिए कोई बड़े से बड़ा फैसला लेने में हिचक न दिखाने का दावा करती हो, लेकिन वास्तव में वह मुसलमानों की सुरक्षा, स्वाभिमान और तरक्की से समझौते की नीति पर चल रही है।
विज्ञापन


इससे सपा के लक्ष्य-2014 अर्थात लोकसभा चुनाव में सूबे से कम से कम 60 सीटें जीतने के उसके सपने के साकार होने में भी रोड़ा बन सकता है।

दोनों घटनाओं को राजनीतिक समीक्षकों के इस निष्कर्ष की कसौटी पर कसें तो सरकार की मंशा और चिंता की वजहें काफी हद तक साफ हो जाती हैं। पहले कुंडा में जियाउल हक और अब खालिद मुजाहिद दोनों की मौत पर सरकार सहमी सी दिखी। बावजूद इसके कि जियाउल हक और खालिद की मौत में बहुत अंतर है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जियाउल हक पुलिस अफसर थे जबकि खालिद आतंकी अपराध वाली धाराओं में जेल में बंद था। जियाउल की कर्तव्य पालन के दौरान गोली मारकर हत्या की गई थी जबकि खालिद की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है, जिसका कारण अभी स्पष्ट नहीं है।

बावजूद इसके सपा की सरकार दोनों ही मौतों पर एक ही तरह परेशान दिखी। प्रमाण है कि खालिद की मौत के 24 घंटे के भीतर सीबीआई जांच की घोषणा।

कहीं इसलिए भी तो नहीं है तेजी

सत्ता में आने के बाद से ही सपा अपने अल्पसंख्यक एजेंडे को धार देते दिखी है। अखिलेश सरकार ने पहला फैसला मुस्लिम बालिकाओं को आर्थिक मदद देने का करके यह संदेश देने की कोशिश की कि मुस्लिम हित संरक्षण की नीति उसकी प्राथमिकता है।

यह ऐलान भी हुए कि सपा की सरकार मुसलमानों ने बनवाई। मुस्लिम मतों को रिझाने के लिए तमाम कार्यक्रम व सम्मेलन शुरू किए गए। अन्य तमाम फैसलों के जरिये भी सरकार ने मुसलमानों के बीच सपा की साख व भरोसा जमाने व बढ़ाने की कोशिश की।

यह ऐलान भी हुआ कि आतंकी घटनाओं के आरोप में जेल में बंद बेकसूर मुसलमानों को रिहा किया जाएगा। इस पर सदन से लेकर सड़क तक विवाद और बवाल हुआ। पर, सरकार अड़ी रही।

संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का शिकार खालिद मुजाहिद उस तारिक कासिमी के साथ ही जेल में आतंकी धाराओं में बंद था, जिस पर से मुकदमा उठाने के लिए सरकार ने प्रयास शुरू किया था। बाद में कोर्ट ने इस प्रयास को खारिज कर दिया।

मुजाहिद की मौत पर सरकार इसलिए भी ज्यादा सक्रिय दिख रही है, जिससे उस पर कोई अंगुली न उठ सके।

संभवत: सरकार की चिंता इन घटनाओं के गुनाहगारों को सजा देने से ज्यादा यह संदेश देने की है कि सपा सरकार मुसलमानों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर काफी संवेदनशील ही नहीं सजग भी है।

इसके लिए अगर उसे अपने रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया जैसे सहयोगी की बलि देनी होगी तो भी नहीं हिचकेगी और अधिकारियों पर शिकंजा कसना होगा तो भी रहम नहीं करेगी।

लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. एसके द्विवेदी कहते हैं कि बात तल्ख है, लेकिन पूरी तरह सच। सरकार की सारी चिंता सियासत से जुड़ी है।


इन मौतों का सच सामने लाने और दोषियों को सजा देने से ज्यादा चिंता यह है कि इन मौतों से नाराज मुसलमान लोकसभा चुनाव में सपा की स्थिति को गड़बड़ा न दें। इसलिए सरकार तेजी में है।

वह मुसलमानों को यह दिखाना चाहती है कि हम आपको लेकर न सिर्फ चिंतित हैं बल्कि आपको (मुसलमानों) तिरछी नजर से देखने वालों को सबक सिखाने को भी तैयार हैं।

अगर ऐसा नहीं है, यह संवेदनशीलता खालिद की तरह हिरासत में अन्य मौतों और जियाउल की तरह होने वाली अन्य हत्याओं पर क्यों नहीं सामने आती। मामला कुल मिलाकर अल्पसंख्यकों के वोटों का गणित बिगड़ने न देने का है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed