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खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर बह रही यमुना-गंगा
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Yamuna-Ganga flowing one meter above the danger mark
- फोटो : KAUSHAMBI
मंझनपुर। यमुना-गंगा के जलस्तर में वृद्घि लगातार जारी है। मंगलवार को दोनों नदियां खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर पहुंच गई। इसी के साथ ही वर्ष 2021 का रिकार्ड टूट गया। बाढ़ के कारण प्रभावित गांव के ग्रामीणों का पलायन जारी है। आधा दर्जन से ज्यादा गांवों में अभी भी नाव के जरिए आवागमन हो रहा है। कई गांवों की विद्युत आपूर्ति ठप होने से दुश्वारियां और बढ़ गई हैं। एसडीएम सदर ने प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर राशन किट का वितरण किया।
राजस्थान के धौलपुर बांध से चार अगस्त को यमुना में छोड़ा गया 18 लाख क्यूसेक पानी दोआबा में कहर बरपा रहा है। पिछले एक हफ्ते से यमुना के साथ ही गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्घि हो रही है। बाढ़ का पानी गढ़वा, पभोसा, बड़हरी, डेढ़ावल, शाहपुर, भवंसुरी समेत आधा दर्जन से ज्यादा गांवों में घुस गया है। कई गांवों के मुख्य मार्ग डूब गए हैं। इसके चलते यहां के ग्रामीण अब नाव से आवागमन कर रहे हैं। मंगलवार को एसडीएम सदर राजेश श्रीवास्तव ने बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर ग्रामीणों के बीच राशन किट का वितरण कराया।
सिंचाई विभाग के एक्सईएन ने बताया कि मंगलवार की रात 12 बजे नैनी में यमुना का जलस्तर 85.71 मीटर एवं फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 85.85 मीटर रिकार्ड किया गया। जबकि खतरे का निशान 84.73 मीटर है। बताया कि 21 सितंबर 2019 को यमुना का जलस्तर 85.70 रिकार्ड किया गया था। जबकि उस वक्त यमुना में एकमुश्त 21 लाख क्यूसके पानी छोड़ा गया था।
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36 घंटे में आठ मीटर घटा चंबल का जलस्तर
मंझनपुर। राजस्थान के धौलपुर से छोड़ा गया पानी चंबल नदी के रास्ते यमुना में आ रहा है। सिंचाई विभाग के एक्सईएन ने बताया कि नौ अगस्त को आगरा जनपद (बिनहट) के पास चंबल का जलस्तर 132.4 मीटर रिकार्ड किया गया था, जो 36 घंटे बाद मंगलवार की रात आठ बजे घटकर 124.5 मीटर पर आ गया। बताया कि कौशाम्बी में भी बाढ़ की रफ्तार कमजोर हुई है। चार घंटे में सिर्फ तीन सेमी. पानी बढ़ा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि सोमवार तक यमुना-गंगा में बाढ़ थम जाएगी।
गांवों में घुस रहा गंगा-यमुना का पानी, दहशत में लोग
चायल। दोआबा में गंगा और यमुना नदी में आया बाढ़ का पानी गांवो में घुस रहा है। बाढ़ के कारण तराई के बासिंदों की नींद उड़ी हुई है। लोग रतजगा कर रहे हैं। प्रशासन की तरफ से बचाव के लिए कोई खास इंतजाम नाकाफी होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
खतरे का निशान पार कर चुकी गंगा-यमुना के जलस्तर में लगातार वृद्घि हो हरी है। यह पानी गांवो में घुस गया है। जल स्तर में वृद्घि से नदी किनारे बसे लोग चिंतित हैं। मंगलवार को बाढ़ का पानी चायल तहसील के यमुना नदी के किनारे बसे गांव पिपरहटा, उमरवल, नंदा का पुरवा, पठनपुरवा आदि भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इसी प्रकार गंगा नदी के किनारे बसे उमरछा, महिउद्दीनपुर कछार, उजिहिनी खालसा, पथरहा आदि गांव में बाढ़ का पानी घुस गया है। बाढ़ से अब तक मल्हीपुर, बेनपुर, डिहवा, डेरा, भखंदा, केवट का पुरवा, केवटरा, कटैया गांवो में करीब तीन सौ एकड़ फसल डूब गईं है।
मेड़बंदी कर पानी को रोक रहे ग्रामीण
चायल। पिपरहटा निवासी रामदीन, सुरेश, ननकू लाल और उमरवल निवासी नीरज और सुनील ने बताया कि बाढ़ का पानी उनके घरों में न घुसने पाए इसके लिए उन्हें रात में जाग कर मेड़बन्दी करना पड़ रहा है। प्रशासन की तरफ से इसके लिए कोई खास व्यवस्था नहीं की गई है। यदि गांव के लोग मेड़बंदी न करे तो बाढ़ के पानी की चपेट में आने से उनका घर ढह जाएगा।
गंगा का जलस्तर बढ़ने से दहशत में ग्रामीण
सिराथू।सिराथू तहसील क्षेत्र के गंगा के तराई इलाके में लगातार जल वृद्धि से गंगा किनारे बसे गांव के लोगों में दहशत है। कन्थुवा , अफजलपुर सातो , घोसियाना , हब्बू नगर सहित कई गांव के ग्रामीण दहशत में है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से जहांगीराबाद निवासी सुनील , रमेश , छेददू , बबलू आदि लोगो ने बताया कि पानी भरने से फसलें बर्बाद हो रही हैं। एसडीएम सिराथू प्रखर उत्तम ने बताया कि गंगा के किनारे वाले गांव में लेखपालों को लगाया गया है। लोगो को सचेत कर दिया गया है।
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राजस्थान के धौलपुर बांध से चार अगस्त को यमुना में छोड़ा गया 18 लाख क्यूसेक पानी दोआबा में कहर बरपा रहा है। पिछले एक हफ्ते से यमुना के साथ ही गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्घि हो रही है। बाढ़ का पानी गढ़वा, पभोसा, बड़हरी, डेढ़ावल, शाहपुर, भवंसुरी समेत आधा दर्जन से ज्यादा गांवों में घुस गया है। कई गांवों के मुख्य मार्ग डूब गए हैं। इसके चलते यहां के ग्रामीण अब नाव से आवागमन कर रहे हैं। मंगलवार को एसडीएम सदर राजेश श्रीवास्तव ने बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर ग्रामीणों के बीच राशन किट का वितरण कराया।
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सिंचाई विभाग के एक्सईएन ने बताया कि मंगलवार की रात 12 बजे नैनी में यमुना का जलस्तर 85.71 मीटर एवं फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 85.85 मीटर रिकार्ड किया गया। जबकि खतरे का निशान 84.73 मीटर है। बताया कि 21 सितंबर 2019 को यमुना का जलस्तर 85.70 रिकार्ड किया गया था। जबकि उस वक्त यमुना में एकमुश्त 21 लाख क्यूसके पानी छोड़ा गया था।
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36 घंटे में आठ मीटर घटा चंबल का जलस्तर
मंझनपुर। राजस्थान के धौलपुर से छोड़ा गया पानी चंबल नदी के रास्ते यमुना में आ रहा है। सिंचाई विभाग के एक्सईएन ने बताया कि नौ अगस्त को आगरा जनपद (बिनहट) के पास चंबल का जलस्तर 132.4 मीटर रिकार्ड किया गया था, जो 36 घंटे बाद मंगलवार की रात आठ बजे घटकर 124.5 मीटर पर आ गया। बताया कि कौशाम्बी में भी बाढ़ की रफ्तार कमजोर हुई है। चार घंटे में सिर्फ तीन सेमी. पानी बढ़ा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि सोमवार तक यमुना-गंगा में बाढ़ थम जाएगी।
गांवों में घुस रहा गंगा-यमुना का पानी, दहशत में लोग
चायल। दोआबा में गंगा और यमुना नदी में आया बाढ़ का पानी गांवो में घुस रहा है। बाढ़ के कारण तराई के बासिंदों की नींद उड़ी हुई है। लोग रतजगा कर रहे हैं। प्रशासन की तरफ से बचाव के लिए कोई खास इंतजाम नाकाफी होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
खतरे का निशान पार कर चुकी गंगा-यमुना के जलस्तर में लगातार वृद्घि हो हरी है। यह पानी गांवो में घुस गया है। जल स्तर में वृद्घि से नदी किनारे बसे लोग चिंतित हैं। मंगलवार को बाढ़ का पानी चायल तहसील के यमुना नदी के किनारे बसे गांव पिपरहटा, उमरवल, नंदा का पुरवा, पठनपुरवा आदि भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इसी प्रकार गंगा नदी के किनारे बसे उमरछा, महिउद्दीनपुर कछार, उजिहिनी खालसा, पथरहा आदि गांव में बाढ़ का पानी घुस गया है। बाढ़ से अब तक मल्हीपुर, बेनपुर, डिहवा, डेरा, भखंदा, केवट का पुरवा, केवटरा, कटैया गांवो में करीब तीन सौ एकड़ फसल डूब गईं है।
मेड़बंदी कर पानी को रोक रहे ग्रामीण
चायल। पिपरहटा निवासी रामदीन, सुरेश, ननकू लाल और उमरवल निवासी नीरज और सुनील ने बताया कि बाढ़ का पानी उनके घरों में न घुसने पाए इसके लिए उन्हें रात में जाग कर मेड़बन्दी करना पड़ रहा है। प्रशासन की तरफ से इसके लिए कोई खास व्यवस्था नहीं की गई है। यदि गांव के लोग मेड़बंदी न करे तो बाढ़ के पानी की चपेट में आने से उनका घर ढह जाएगा।
गंगा का जलस्तर बढ़ने से दहशत में ग्रामीण
सिराथू।सिराथू तहसील क्षेत्र के गंगा के तराई इलाके में लगातार जल वृद्धि से गंगा किनारे बसे गांव के लोगों में दहशत है। कन्थुवा , अफजलपुर सातो , घोसियाना , हब्बू नगर सहित कई गांव के ग्रामीण दहशत में है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से जहांगीराबाद निवासी सुनील , रमेश , छेददू , बबलू आदि लोगो ने बताया कि पानी भरने से फसलें बर्बाद हो रही हैं। एसडीएम सिराथू प्रखर उत्तम ने बताया कि गंगा के किनारे वाले गांव में लेखपालों को लगाया गया है। लोगो को सचेत कर दिया गया है।

Yamuna-Ganga flowing one meter above the danger mark- फोटो : KAUSHAMBI