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Kaushambi News: वाह भाई वाह... खूब किया विकास, कहां जाए आम इन्सान
Wed, 12 Nov 2025 12:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Wed, 12 Nov 2025 12:54 AM IST
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विकास भवन के शौचालय को बना दिया गया पीकदान। संवाद
विकास भवन में जिले भर से लोग आते हैं लेकिन यहां के शौचालय में पानी जैसी आम सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है। कुल 10 शौचालय में अधिकतर की स्थिति बदतर है। महिलाओं के शौचालय में तो ताले लगे हैं जिससे आधी आबादी और बालिकाओं को असुविधा होती है। ऐसे में आम आदमी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विकास भवन में करीब 42 विभागों के कार्यालय हैं। यहां प्रतिदिन 400 से 500 लोगों का आना होता है। यहां शौचालय समेत अन्य व्यवस्था है लेकिन अधिकतर ताले में बंद है। जहां के शौचालय खुले हैं वह प्रयोग के लायक नहीं है। मंगलवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने विकास भवन के शौचालयों की पड़ताल की।
इस दौरान एक शौचालय में ताला बंद मिला। यहां खडे गार्ड से जब पूछा गया कि ताला क्यों लगा है, तो जवाब मिला कि यहां हर तरह के लोग आते हैं और वे शौचालय को गंदा कर देते हैं। इसके कारण हमें ताला लगाना पड़ता है।
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टीम की पड़ताल में यह भी सामने आया कि महिलाओं के हर शौचालय में ताला लगा है। पुरुषों के जिन शौचालय में ताला नहीं लगा था वहीं की स्थिति बदतर थी। किसी शौचालय में सीट टूटा तो किसी में पानी भरा था। गंदगी और बदबू इतनी कि सांस लेना मुश्किल था। वॉश बेसिन में नल की टोटियां भी गायब मिले। संवाद
मजबूरन पुरुष शौचालय का इस्तेमाल करना पड़ा
यहां आईं मंजू देवी ने बताया कि महिला शौचालय में ताले लटके थे। इसके कारण मजबूरन पुरुष शौचालय में जाना पड़ा। वहां जाकर देखा तो पानी भरा हुआ था। पूछने पर दूसरे शौचालय का पता चला। जब वहां गई तो उस शौचालय की सीट टूटी थी। साथ ही वॉश बेसिन में टोंटी नहीं थी। ऐसे में परेशानी तो बहुत हुई लेकिन मजबूरी थी।
वहीं सरिता देवी का कहना है कि महिलाओं के शौचालय जाने के लिए विकास भवन में कोई व्यवस्था नहीं हैं। मजबूरी में पुरुषों के शौचालय का प्रयोग करना पड़ता है। वहां की स्थिति देखने के लायक नहीं है। विकास भवन का जब ये हाल है तो हम विकास की उम्मीद किससे रखें।
विकास भवन के हर तल में शौचालय बने हैं। यहां तमाम कार्यालय है। कार्यालय के कमरे के साथ ही शौचालय की देखरेख की जिम्मेदारी संबंधित विभाग को दी गई है। यदि गड़बड़ी है तो संबंधित से जवाब मांगा जाएगा। - शैलेन ब्यास, जिला विकास अधिकारी
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विकास भवन में करीब 42 विभागों के कार्यालय हैं। यहां प्रतिदिन 400 से 500 लोगों का आना होता है। यहां शौचालय समेत अन्य व्यवस्था है लेकिन अधिकतर ताले में बंद है। जहां के शौचालय खुले हैं वह प्रयोग के लायक नहीं है। मंगलवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने विकास भवन के शौचालयों की पड़ताल की।
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इस दौरान एक शौचालय में ताला बंद मिला। यहां खडे गार्ड से जब पूछा गया कि ताला क्यों लगा है, तो जवाब मिला कि यहां हर तरह के लोग आते हैं और वे शौचालय को गंदा कर देते हैं। इसके कारण हमें ताला लगाना पड़ता है।
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टीम की पड़ताल में यह भी सामने आया कि महिलाओं के हर शौचालय में ताला लगा है। पुरुषों के जिन शौचालय में ताला नहीं लगा था वहीं की स्थिति बदतर थी। किसी शौचालय में सीट टूटा तो किसी में पानी भरा था। गंदगी और बदबू इतनी कि सांस लेना मुश्किल था। वॉश बेसिन में नल की टोटियां भी गायब मिले। संवाद
मजबूरन पुरुष शौचालय का इस्तेमाल करना पड़ा
यहां आईं मंजू देवी ने बताया कि महिला शौचालय में ताले लटके थे। इसके कारण मजबूरन पुरुष शौचालय में जाना पड़ा। वहां जाकर देखा तो पानी भरा हुआ था। पूछने पर दूसरे शौचालय का पता चला। जब वहां गई तो उस शौचालय की सीट टूटी थी। साथ ही वॉश बेसिन में टोंटी नहीं थी। ऐसे में परेशानी तो बहुत हुई लेकिन मजबूरी थी।
वहीं सरिता देवी का कहना है कि महिलाओं के शौचालय जाने के लिए विकास भवन में कोई व्यवस्था नहीं हैं। मजबूरी में पुरुषों के शौचालय का प्रयोग करना पड़ता है। वहां की स्थिति देखने के लायक नहीं है। विकास भवन का जब ये हाल है तो हम विकास की उम्मीद किससे रखें।
विकास भवन के हर तल में शौचालय बने हैं। यहां तमाम कार्यालय है। कार्यालय के कमरे के साथ ही शौचालय की देखरेख की जिम्मेदारी संबंधित विभाग को दी गई है। यदि गड़बड़ी है तो संबंधित से जवाब मांगा जाएगा। - शैलेन ब्यास, जिला विकास अधिकारी

विकास भवन के शौचालय को बना दिया गया पीकदान। संवाद

विकास भवन के शौचालय को बना दिया गया पीकदान। संवाद