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Kaushambi News: अपने से ज्यादा बेजुबानों की चिंता... बहू-बेटियों ने हाथों में थाम ली पतवार

Tue, 05 Aug 2025 01:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी Updated Tue, 05 Aug 2025 01:55 AM IST
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Worried more about the mute than themselves...daughters and daughters-in-law took the rudder in their hands
पुरखास उपकेंद्र के पैनल पर ढका तिरपाल। संवाद
किलनहाई नदी के उफान ने तराई के गांवों में तबाही मचा दी है। पिपरहटा, कटैया, मल्हीपुर मोहम्मदाबाद, बैनपुर, डिहवा, गडरियन का पूरा आदि गांवों की फसलों के साथ ही मवेशियों के चरागाह पानी में डूब गए हैं। भूमिहीन पशुपलकों को डोंगी के सहारे पूरा दिन चारे की तलाश में भटकना पड़ रहा है। अब बहू-बेटियों ने भी हाथ में पतवार थाम ली है। वह डोंगी से मवेशियों के लिए चारे की तलाश कर रही हैं।
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कटैया गांव की बहू संगीता, बेटी ननबुइया और संजना ने बताया कि वह सभी भूमिहीन हैं। उनके परिजन मजदूरी करते हैं। वह लोग गांव के किसानों के खेतों में निराई-गुड़ाई कर जिंदगी गुजारती हैं। घर खर्च के लिए गाय-भैंस भी पाल रखी है। खेत की निराई-गुड़ाई से निकलने वाला चारा और किसानों के खेत की घास काट मवेशियों को खिलाती थीं।
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यमुना और किलनहाई नदी की बाढ़ से किसानों की फसल के साथ ही चरागाह जलमग्न हो गए हैं। तीन-चार दिन तो किसी तरह काम चल गया। अब हरे चारे का संकट खड़ा हो गया है। सोमवार 11 बजे के करीब पतवार से डोंगी चला रही ननबुइया ने बताया कि वह पड़ोस की भाभी संगीता और सहेली संजना समेत छह महिलाएं मवेशियों के चारा खोजने के लिए निकली हैं। जहां भी चारा मिलेगा काटने के बाद गठ्ठर बना कर डोंगी पर लाद शाम तक घर लौटेंगी।
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यमुना मैया से प्रार्थना
मोहमदाबाद के किसान छत्रपाल सिंह, कुलदीप कुमार ने बताया कि खेत में पानी भरने पर उन्होंने मिर्च के पौधों को उखाड़ कर सुरक्षित रख लिया था। उम्मीद थी कि दो तीन दिन में पानी कम होने पर वह पौधों को फिर से खेत में रोप देंगे। फिलहाल बाढ़ का प्रकोप कम नहीं हो रहा है। पौधे भी सड़ने लगे हैं। बताया कि सबसे अधिक परेशानी मवेशियों को रही है। अब वह प्रार्थना कर रहे हैं कि यमुना मैया अपने स्थान पर लौट जाएं ताकि उनका जीवन बाढ़ के संकट से उबर सके।

पुरखास उपकेंद्र के पैनल पर ढका तिरपाल। संवाद

पुरखास उपकेंद्र के पैनल पर ढका तिरपाल। संवाद

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