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पानी छोड़ रहे हैंडपंप, गहराया पेयजल संकट

Fri, 14 Apr 2017 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी Updated Fri, 14 Apr 2017 12:45 AM IST
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water crisis in kausambhi
सूख्‍ाे हैंडपंप - फोटो : अमर उजाला

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 गर्मी शुरू होते ही जिले में पेयजल संकट लगातार बढ़ने लगा है। गांवों में लगे इंडिया मार्का हैंडपंप तेजी से पानी छोड़ रहे हैं। इससे ग्रामीणों को पेयजल के लिए भटकना पड़ रहा है। अप्रैल माह के पहले पखवारे में जिले भर में सौ से अधिक हैंडपंप पानी उगलना बंद कर चुके हैं। यह आंकड़े डीडीओ व जल निगम कार्यालय में रीबोर के आए आवेदन बता रहे हैं। उधर विभाग है कि रीबोर के लिए बजट की ओर टकटकी लगाए बैठा है। इससे आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

पांच साल से डार्क जोन की श्रेणी में जाने के बाद दोआबा के छह ब्लॉकों में पेयजल संकट बरकरार है। भूगर्भ जल स्तर तेजी से नीचे खिसकने के कारण गांवों में लगे 25 हजार इंडिया मार्का हैंडपंपों में 25 प्रतिशत बंद पड़े हैं। इसमें लगभग एक हजार हैंडपंप तकनीकी खराबी के चलते तो चार हजार हैंडपंपों के बोर में पानी न होने से बंद हैं। डार्क जोन घोषित होने के बाद बंद पड़े हैंडपंपों के रिबोर के लिए ठोस कदम शासन द्वारा नहीं उठाया गया। सपा शासन काल में पांच साल के भीतर मुश्किल से एक हजार हैंडपंपों का रीबोर हो सका है। इसमें विधान सभा चुनाव के दौरान स्कूलों के रीबोर हुए ढाई सौ हैंडपंप भी शामिल हैं। विभागीय आंकड़ों पर जाएं तो जलनिगम ने 35 सौ हैंडपंपों के रीबोर के लिए दस करोड़ रुपये शासन से मांगा है। विभाग में फूटी कौड़ी नहीं होने की वजह से एक भी हैंडपंप का रीबोर नहीं हो पा रहा।
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उधर तेजी से बढ़ रही गर्मी के चलते अप्रैल के पहले पखवारे में ही सौ से अधिक हैंडपंपों ने पानी उगलना बंद कर दिया है। इससे दोआबा के डार्क जोन वाले गांवों में पेयजल स्थिति भयावह होती जा रही है। सबसे बुरा हाल तो गंगा की तराई में बसे गांवों का है। तराई के गांवों में लगे पचास फीसदी हैंडपंप पानी नहीं दे रहे हैं। ऐसे में लोगों को गांव के बाहर सिंचाई के लिए लगे नलकूपों से पानी जुटाना पड़ता है। बानगी के तौर पर विकास खंड कड़ा के रुकुनपुर मजरा लेहदरी गांव को लिया जा सकता है। यहां के ग्रामीणों की पेयजल व्यवस्था सिंचाई के नलकूप पर निर्भर है। गांव के रामबली, बब्लू आदि का कहना है कि सिंचाई बंद है। ऐसे में नलकूप भी समय पर नहीं चलता। इससे पेयजल की विकराल समस्या है। शासन-प्रशासन है कि दिनोंदिन गंभीर हो रही पेयजल समस्या को लेकर तनिक भी संजीदा नहीं है।
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गर्मी के चलते भूगर्भ जल स्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। इससे गांवों में चल रहे हैंडपंपों का पानी सूख रहा है। शासन से जल निगम के जरिए दस करोड़ का बजट मांगा गया है। अप्रैल के अंत तक मिलने की संभावना है। बजट आते ही बंद पड़े हैंडपंपों का रीबोर कराकर समस्या का निदान कराया जाएगा।
दिनेश कुमार सिंह, सीडीओ
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