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‘तमाशा’ बनकर रह गए प्यास बुझाने वाले वाटर कूलर
Mon, 29 Apr 2019 12:37 AM IST
shailendra Kumar
kaushambi
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Published by: shailendra Kumar
Updated Mon, 29 Apr 2019 12:37 AM IST
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मुख्यालय के विभिन्न स्थानों पर लगाए गए वाटर कूलर तमाशा बनकर रह गए हैं। राहगीर वाटर कूलर देख बोतल लेकर पानी भरने तो पहुंचता है लेकिन उसे वहां से मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। नगर पंचायत की तरफ से सपा सरकार के दौरान लगाया गया वाटर कूलर कबाड़ में तब्दील हो रहा है।
पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष हाशिमी बेगम के कार्यकाल में करीब तीन साल पहले मंझनपुर कस्बे के सार्वजनिक स्थानों पर 25 वाटर कूलर लगाए गए थे। मंझनपुर के मुख्य चौराहे पर भी दो स्थानों पर वाटर कूलर लगाए गए हैँ। एक कूलर पर करीब एक लाख का खर्च आया था। देखरेख और मरम्मत के अभाव में सरकारी खजाने से लोगों को शीतल पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लगाए गए वाटर कूलर तमाशा बन गए हैं। प्रयागराज, करारी और सिराथू जाने वाली बसें चौराहे पर जैसे ही खड़ी होती हैं मुसाफिर बोतल में पानी भरने के लिए वाटर कूलर के पास दौड़ पड़ते हैं। लेकिन लोगों को यहां ठंडा पानी के नाम पर सिर्फ टंकी का खौलता पानी मिल रहा है।
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पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष हाशिमी बेगम के कार्यकाल में करीब तीन साल पहले मंझनपुर कस्बे के सार्वजनिक स्थानों पर 25 वाटर कूलर लगाए गए थे। मंझनपुर के मुख्य चौराहे पर भी दो स्थानों पर वाटर कूलर लगाए गए हैँ। एक कूलर पर करीब एक लाख का खर्च आया था। देखरेख और मरम्मत के अभाव में सरकारी खजाने से लोगों को शीतल पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लगाए गए वाटर कूलर तमाशा बन गए हैं। प्रयागराज, करारी और सिराथू जाने वाली बसें चौराहे पर जैसे ही खड़ी होती हैं मुसाफिर बोतल में पानी भरने के लिए वाटर कूलर के पास दौड़ पड़ते हैं। लेकिन लोगों को यहां ठंडा पानी के नाम पर सिर्फ टंकी का खौलता पानी मिल रहा है।
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