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अब थकान दूर कर रहे हैं उम्मीदवार
कौशाम्बी ब्यूरो
Updated Sat, 25 Feb 2017 12:34 AM IST
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सिराथू में कार्यकर्ताओं से बातचीत करते बीजेपी प्रत्याशी शीतला प्रसाद।
विधानसभा चुनाव मैदान में ताल ठोंकने वाले सूरमा मतदान के बाद अपनी थकान मिटा रहे हैं। वहीं समर्थकों की नींद उड़ गई है। गांवों और कस्बों में समर्थक जीत-हार के गुणा-भाग में उलझने लगे हैं। सबकी निगाह सिराथू व मंझनपुर सीट पर है। सिराथू सीट पर केशव की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है तो मंझनपुर सीट पर इंद्रजीत सरोज की साख का सवाल है।
जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर कुल 41 उम्मीदवार थे। मंझनपुर में छह, सिराथू से 16 और चायल सीट पर 19 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। गुुरुवार को मतदान हुआ। 58.04 फीसदी मत पड़े। सबसे ज्यादा वोटिंग मंझनपुर में हुई। यहां 60 फीसदी वोट पड़े। प्रत्याशी और समर्थक चुनावी अखाड़े में एक दूसरे को पटखनी देने के लिए मतदान से पहले तक एड़ीचोटी का जोर लगाए रहे। गुरुवार सुबह शुरू हुई चुनावी जंग शाम तक एक-एक बूथ पर खत्म हो गई। मतदाताओं ने इन दिग्गजों के भाग्य को ईवीएम में कैद कर दिया। मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद सियासी पहलवान थकान मिटाते रहे। मतदान के बाद समर्थकों को नींद जरूर खराब हो गई है। मतदान के दूसरे दिन से ही वह अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र के गांवों और कस्बों से मतदाताओं के मन की बात टटोल कर हार-जीत का आंकलन करने लगे हैं। शुक्रवार को कुछ ऐसा नजारा जिले के प्रमुख चौराहों व कस्बों में स्थित चाय-पान की दुकानों में देखने को मिला। सुबह से ही समर्थक अपने-अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने लगे हैं। तीनों विधान सभा क्षेत्रों में सबसे अधिक रुझान मंझनपुर सुरक्षित सीट पर देखने को मिल रहा था। कोई प्रत्याशी का किला ढहने की बात कह रहा तो कोई दुर्ग को अभेद्य बता रहा है। तमाम तर्कों के साथ राजनीतिक दलों के समर्थक अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। जातीय वोटों की गिनती अंगुली पर की जा रही है। अब चिंता सता रही है कि यदि परिणाम पक्ष में नहीं आया, तब क्या होगा।
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जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर कुल 41 उम्मीदवार थे। मंझनपुर में छह, सिराथू से 16 और चायल सीट पर 19 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। गुुरुवार को मतदान हुआ। 58.04 फीसदी मत पड़े। सबसे ज्यादा वोटिंग मंझनपुर में हुई। यहां 60 फीसदी वोट पड़े। प्रत्याशी और समर्थक चुनावी अखाड़े में एक दूसरे को पटखनी देने के लिए मतदान से पहले तक एड़ीचोटी का जोर लगाए रहे। गुरुवार सुबह शुरू हुई चुनावी जंग शाम तक एक-एक बूथ पर खत्म हो गई। मतदाताओं ने इन दिग्गजों के भाग्य को ईवीएम में कैद कर दिया। मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद सियासी पहलवान थकान मिटाते रहे। मतदान के बाद समर्थकों को नींद जरूर खराब हो गई है। मतदान के दूसरे दिन से ही वह अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र के गांवों और कस्बों से मतदाताओं के मन की बात टटोल कर हार-जीत का आंकलन करने लगे हैं। शुक्रवार को कुछ ऐसा नजारा जिले के प्रमुख चौराहों व कस्बों में स्थित चाय-पान की दुकानों में देखने को मिला। सुबह से ही समर्थक अपने-अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने लगे हैं। तीनों विधान सभा क्षेत्रों में सबसे अधिक रुझान मंझनपुर सुरक्षित सीट पर देखने को मिल रहा था। कोई प्रत्याशी का किला ढहने की बात कह रहा तो कोई दुर्ग को अभेद्य बता रहा है। तमाम तर्कों के साथ राजनीतिक दलों के समर्थक अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। जातीय वोटों की गिनती अंगुली पर की जा रही है। अब चिंता सता रही है कि यदि परिणाम पक्ष में नहीं आया, तब क्या होगा।
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