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बिहार से आए तस्कर गंगा में पकड़ रहे कछुआ
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Sun, 09 Jul 2017 01:39 AM IST
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पक्षियों के अलावा गंगा नदी में कछुओं की भी तस्करी शुरू हो गई है। कछुआ पकड़ने के लिए तस्करों ने बिहार के छपरा से युवाओं के एक दल को बुलाया है। यह रात में जाल डालकर कछुओं को पकड़ते हैं। इनके डेरा जमाते ही इलाके में तमाम तरह की चर्चाएं होने लगी हैं। दो दिन पहले कोखराज थाने की पुलिस ने कछार में दबिश भी दी थी लेकिन तस्कर पुलिस के हाथ नहीं लगे थे।
गंगा नदी का जलस्तर बढ़ते ही कछुआ तस्कर सक्रिय हो गए हैं। रात करीब 11 बजे के बाद गंगा नदी में जाल डाला जाता है। यह जाल विशेष प्रकार का बना होता है। इसमें कछुआ ही फंसते हैं। तस्कर इस जाल को झाम कहते हैं। झाम बिहार में बनता है। झाम के जरिए कछुओं को पकड़ने वाले लोग इसके विशेषज्ञ होते हैं। तस्करों ने बिहार के छपरा से कछुआ पकड़ने वालों को बुलाया है।
बिहार से आए शिकारी कछुओं को पकड़ने के लिए रात में गंगा के कछार में आते हैं। भोर तक वह नदी में बोट अथवा नाव के जरिए भ्रमण करते हैं। इसके बाद भोर में ही कछुओं को पकड़कर उसे लग्जरी वाहनों से वाराणसी के रास्ते कोलकाता भेज देते हैं। 20 से 25 किलो का कछुवा तस्कर लाखों रुपये कीमत में बेचते हैं। तस्करों का प्रयास होता है कि 20 से 40 किलो तक का कछुआ उन्हें किसी भी कीमत पर मिले।
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यह कछुए बोरे में भरकर भेजे जाते हैं। तस्करों की चहलकदमी की जानकारी स्थानीय लोगों को हो चुकी है। मामले की शिकायत भी हो चुकी है। दो दिन पहले कोखराज पुलिस ने सिहोरी के समीप गंगा नदी के किनारे दबिश दी थी लेकिन तस्कर नहीं मिले। पुलिस ने सर्च लाइट मारकर जाल देखने की कोशिश की लेकिन नदी के उफान के कारण वह बरामद नहीं हो सकी।
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गंगा नदी का जलस्तर बढ़ते ही कछुआ तस्कर सक्रिय हो गए हैं। रात करीब 11 बजे के बाद गंगा नदी में जाल डाला जाता है। यह जाल विशेष प्रकार का बना होता है। इसमें कछुआ ही फंसते हैं। तस्कर इस जाल को झाम कहते हैं। झाम बिहार में बनता है। झाम के जरिए कछुओं को पकड़ने वाले लोग इसके विशेषज्ञ होते हैं। तस्करों ने बिहार के छपरा से कछुआ पकड़ने वालों को बुलाया है।
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बिहार से आए शिकारी कछुओं को पकड़ने के लिए रात में गंगा के कछार में आते हैं। भोर तक वह नदी में बोट अथवा नाव के जरिए भ्रमण करते हैं। इसके बाद भोर में ही कछुओं को पकड़कर उसे लग्जरी वाहनों से वाराणसी के रास्ते कोलकाता भेज देते हैं। 20 से 25 किलो का कछुवा तस्कर लाखों रुपये कीमत में बेचते हैं। तस्करों का प्रयास होता है कि 20 से 40 किलो तक का कछुआ उन्हें किसी भी कीमत पर मिले।
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यह कछुए बोरे में भरकर भेजे जाते हैं। तस्करों की चहलकदमी की जानकारी स्थानीय लोगों को हो चुकी है। मामले की शिकायत भी हो चुकी है। दो दिन पहले कोखराज पुलिस ने सिहोरी के समीप गंगा नदी के किनारे दबिश दी थी लेकिन तस्कर नहीं मिले। पुलिस ने सर्च लाइट मारकर जाल देखने की कोशिश की लेकिन नदी के उफान के कारण वह बरामद नहीं हो सकी।