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साल भर से महिला डॉक्टर विहीन चल रहा सीएचसी बारा
Tue, 11 Jun 2019 12:37 AM IST
shailendra Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Published by: shailendra Kumar
Updated Tue, 11 Jun 2019 12:37 AM IST
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आधी आबादी की सेहत को लेकर स्वास्थ्य विभाग बेपरवाह है। तभी तो एफआरयू का दर्जा प्राप्त होने के बावजूद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बारा में साल भर से महिला डॉक्टर विहीन चल रहा है। मजबूरी में इलाके की महिलाओं को इलाज के लिए 30 किमी का सफर तय कर जिला अस्पताल जाना पड़ता है।
कौशाम्बी ब्लॉक के 57 ग्रामसभाओं के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए सरकार ने बारा में सीएचसी संचालित कर रखा है। जिला अस्पताल को छोड़ दें तो ग्रामीण क्षेत्र का यह इकलौता सीएचसी है जिसे एफआरयू (प्राथमिक संदर्भन इकाई) का दर्जा प्राप्त है। यहां अधीक्षक समेत विशेषज्ञ डॉक्टरों के आठ पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष सीएचसी प्रभारी डॉ. आशीष गुप्ता और डॉ. अरुण आर्या समेत सिर्फ दो डॉक्टरों की तैनाती है। जबकि अस्पताल में प्रतिदिन 70 से 90 मरीजों की ओपीडी है।
इनमें 15 से 20 महिलाएं स्वास्थ्य जांच के लिए आती हैं। सर्वाधिक परेशानी महिलाओं के इलाज पिछले एक साल से किसी भी महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई है। क्षेत्र की महिलाओं का इलाज अस्पताल की एएनएम अथवा स्टाफ नर्स के भरोसे होता है। या फिर महिलाएं पुरुष डॉक्टरों से इलाज कराएं। हालांकि पुरुष चिकित्सकों से महिलाएं व्यक्तिगत परेशानी बताने में खुद को असहज महसूस करती हैं। सोमवार को मेड़ुआ सलेमपुर निवासी गुड़िया देवी प्रसव के बाद जांच को आई थी। भीखा गर्ग का पूरा की लालती देवी असंदापुर की पूजा देवी, मनीषा पांडेय, पिंकी देवी आदि महिलाएं इलाज कराने आई इन महिलाओं का कहना है कि विभागीय अधिकारी समस्या को लेकर गंभीर नहीं हैं। अस्पताल में हर मर्ज के लिए स्टाफ नर्स ही मिलती हैं।
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ग्राम प्रधानसंघ के ब्लॉक अध्यक्ष अशोक मिश्र, बुधराम यादव, गिरीश दिवेदी, पिन्टू द्विवेदी आदि का कहना है कि मुख्य चिकित्साधिकारी से कई मर्तबा शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद कोई महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं की जा रही है। मामले में सीएचसी अधीक्षक डॉ. आशीष गुप्ता का कहना है कि महिला डॉक्टर की तैनाती के लिए विभाग को पहले ही पत्र भेजा जा चुका है।
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कौशाम्बी ब्लॉक के 57 ग्रामसभाओं के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए सरकार ने बारा में सीएचसी संचालित कर रखा है। जिला अस्पताल को छोड़ दें तो ग्रामीण क्षेत्र का यह इकलौता सीएचसी है जिसे एफआरयू (प्राथमिक संदर्भन इकाई) का दर्जा प्राप्त है। यहां अधीक्षक समेत विशेषज्ञ डॉक्टरों के आठ पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष सीएचसी प्रभारी डॉ. आशीष गुप्ता और डॉ. अरुण आर्या समेत सिर्फ दो डॉक्टरों की तैनाती है। जबकि अस्पताल में प्रतिदिन 70 से 90 मरीजों की ओपीडी है।
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इनमें 15 से 20 महिलाएं स्वास्थ्य जांच के लिए आती हैं। सर्वाधिक परेशानी महिलाओं के इलाज पिछले एक साल से किसी भी महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई है। क्षेत्र की महिलाओं का इलाज अस्पताल की एएनएम अथवा स्टाफ नर्स के भरोसे होता है। या फिर महिलाएं पुरुष डॉक्टरों से इलाज कराएं। हालांकि पुरुष चिकित्सकों से महिलाएं व्यक्तिगत परेशानी बताने में खुद को असहज महसूस करती हैं। सोमवार को मेड़ुआ सलेमपुर निवासी गुड़िया देवी प्रसव के बाद जांच को आई थी। भीखा गर्ग का पूरा की लालती देवी असंदापुर की पूजा देवी, मनीषा पांडेय, पिंकी देवी आदि महिलाएं इलाज कराने आई इन महिलाओं का कहना है कि विभागीय अधिकारी समस्या को लेकर गंभीर नहीं हैं। अस्पताल में हर मर्ज के लिए स्टाफ नर्स ही मिलती हैं।
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ग्राम प्रधानसंघ के ब्लॉक अध्यक्ष अशोक मिश्र, बुधराम यादव, गिरीश दिवेदी, पिन्टू द्विवेदी आदि का कहना है कि मुख्य चिकित्साधिकारी से कई मर्तबा शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद कोई महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं की जा रही है। मामले में सीएचसी अधीक्षक डॉ. आशीष गुप्ता का कहना है कि महिला डॉक्टर की तैनाती के लिए विभाग को पहले ही पत्र भेजा जा चुका है।