UP : फ्री फायर गेम में फंसकर घर से भागा छात्र बरामद, बंगलुरू की आईटी सिटी में छिप कर रहता था छात्र
छात्र ने बताया कि उसे फ्री फायर गेम खेलने की लत लग गई थी। उसकी स्थित अच्छे-बुरे में फर्क करने की नहीं रह गई थी। गेम के आगे के फीचर्स अन्लॉक्ड करने के लिए पैसे की जरूरत होती है। इस वजह से वह घर से पैसे व मम्मी के गहने लेकर भागा था।
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फ्री फायर गेम में फंसकर घर से लाखों के जेवरात व नकदी लेकर भागे छात्र को पुलिस ने बरामद कर लिया है। छात्र बंगलुरू की आईटी सिटी में था। वह रेलवे स्टेशन व बस स्टॉफ में रहकर ऑनलाइन गेम में उलझा था।
एसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि 13 मई को पिपरी कोतवाली के तिल्हापुर मोड़ निवासी 14 वर्षीय किशोर घर से लापता हो गया था। किशोर एक स्थानीय कॉलेज में पढ़ता था। छात्र की मां ने बताया कि उनका बेटा घर में रखा 40 हजार रुपये नकद, 10 लाख के जेवर, लैपटॉप व मोबाइल भी ले गया था। शिकायत पर पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू की। इस दौरान सर्विलांस व साइबर सेल की मदद से छात्र को मलूर व्हाइट फील्ड रोड बंगलुरू (कर्नाटक) से बरामद किया।
छात्र ने बताया कि उसे फ्री फायर गेम खेलने की लत लग गई थी। उसकी स्थित अच्छे-बुरे में फर्क करने की नहीं रह गई थी। गेम के आगे के फीचर्स अन्लॉक्ड करने के लिए पैसे की जरूरत होती है। इस वजह से वह घर से पैसे व मम्मी के गहने लेकर भागा था। इंटरनेट के जरिए उसे पता चला कि बंगलुरू की आईटी सिटी गेम खेलने के लिए अच्छा शहर है। वहां बिना रोकटोक के वह गेम खेल सकता है।
इसके बाद उसने घर से भागने का फैसला कर लिया था। एसपी ने बताया कि जब छात्र से पूछा गया कि उसे घर की याद नहीं आई तो उसका कहना था गेम की दुनिया में वह पूरी तरह से खो चुका था। इस वजह से घर-परिवार की याद नहीं आई।
एसपी ने अभिभावकों के लिए जारी की एडवाइजरी
एसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि फ्री फायर जैसे ऑनलाइन गेम को खेलने से बच्चों में इसकी लत लग जाती है। इसका प्रभाव बच्चों के दिमाग पर पड़ता है। आगे चलकर बच्चे चिड़चिड़ा हो जाते हैं। बच्चे अपने जीवन में लड़ाकू व गुस्सैल किस्म के हो जाते हैं। गेम्स के आगे की स्टेज को अन्लॉक्ड करने के लिए अपने घरवालों का बैंक अकाउंट तक खाली कर देते हैं। घर से पैसा नहीं मिलता तो वह बाहर से पैसे की व्यवस्था करते हैं। इसकी पूर्ति के लिए वह घर की ज्वैलरी व महंगा समान तक उठा ले जाते हैं।
अभिभावकों को चाहिए की जिनके बच्चे मोबाइल पर गेम खेल रहें है तो विशेष निगाह रखी जाए। बच्चे द्वारा ऐसे गेम खेले जाने की जानकारी होने पर उसे मनोचिकित्सक से काउंसिलिंग कराया जाए। कम उम्र के बच्चों को टैबलेट व महंगे गैजेट्स का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नहीं करने दिया जाए।