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पढ़ाई छोड़ छात्र कर रहे प्रचार
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Thu, 16 Feb 2017 11:56 PM IST
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नई सरकार के गठन में युवाओं की भूमिका इस बार अहम होगी। पहली बार मतदाता बने युवाओं में युवा शक्ति का एहसास कराने का जज्बा दिख रहा है। परीक्षा सिर पर होने के बावजूद बस्ता खूंटी पर टांगकर उन्होंने चुनावी कमान संभाल ली है। सुबह से देर शाम तक प्रत्याशियों के प्रचार-प्रसार में मशगूल रहते हैं। इसका सबसे बुरा असर बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र-छात्राओं पर पड़ेगा।
विधान सभा चुनाव को लेकर इस बार युवाओं को मतदाता बनाने के लिए जिले में छह माह से अभियान चल रहा था। इंटर कालेजों व महाविद्यालयों में कैंप लगाकर 18 साल की आयु पूरी करने वाले छात्र-छात्राओं को मतदाता बनाया गया है। वोटर आईडी कार्ड मिलने के बाद युवा मतदाताओं में इस बात को लेकर उत्साह पहले से था कि वह मनचाही सरकार बनाएंगे, लेकिन विधान सभा चुनाव बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले पड़ जाएगा, इसका अंदाजा युवा मतदाता बने छात्र-छात्राओं को नहीं था।
परीक्षा से ठीक पहले चुनाव पड़ जाने पर युवा मतदाता अपनी सरकार बनाने के नशे में डूब चुका है। उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न मिलने के बाद छात्र-छात्राएं प्रचार के नशे में डूब गए हैं। इस दौरान वह विषयों की तैयारी भूलकर बस्ते को खूंटी पर टांग सुबह से प्रचार में जुट जाते हैं। उम्मीदवारों को भी अपने स्वार्थ के आगे इन छात्र-छात्राओं के भविष्य की चिंता नहीं है। नगदी देने के साथ-साथ लग्जरी गाड़ी मुहैया कराकर उन्हें विधान सभा क्षेत्र में प्रचार-प्रसार के लिए उतार दिया गया है। भविष्य की परवाह किए बगैर युवा मतदाता नई सरकार बनाने का जज्बा लेकर प्रचार की कमान पूरी तरह संभाल चुके हैं।
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स्टार प्रचारकों की जनसभा में जुटाते हैं भीड़
पढ़ाई-लिखाई छोड़ प्रचार अभियान में जुटे युवा मतदाता जनसभा वाले दिन भीड़ जुटाने में महती भूमिका निभाते हैं। अपनी सरकार बनाने के चक्कर में गांव के लोगों को तरह-तरह का प्रलोभन देकर जनसभा में ले जाने की भरपूर कोशिश करते हैं। काफी हद तक युवाओं को इसमें सफलता भी मिल रही है। मतदान और प्रत्याशी को जिताने का जोश जितना युवाओं में दिख रहा है उतना उम्मीदवारों में भी नजर नहीं आ रहा।
चुनावी ड्यूटी प्रशिक्षण में व्यस्त हुए शिक्षक
विधान सभा चुनाव के दौरान शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी गई है। इसके चलते शिक्षक चुनावी प्रशिक्षण में व्यस्त हो गए हैं। शिक्षकों के प्रशिक्षण और चुनावी कार्य में व्यस्त होने से शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई-लिखाई पूरी तरह से ठप हो गई है। कक्षा नौ और 11 की परीक्षाएं भी सिर पर हैं। स्कूलों में फरवरी और मार्च का महीना वार्षिक पाठ्यक्रम पूरा करने का समय होता है, लेकिन चुनावी व्यस्तता के चलते बच्चों की पढ़ाई का काम ठप हो गया है। इससे नौ और 11 के छात्र-छात्राओं को अधूरे पढ़ाई कर ही परीक्षा देनी होगी।
स्कूलों का वार्षिक पाठ्यक्रम लगभग पूरा हो चुका है। जिन स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है वहां वैसे भी पढ़ाई मार्च में बंद हो जाएगी। रही बात छात्र-छात्राओं के प्रचार में उतरने की तो यह उनकी मर्जी पर निर्भर करता है।
अशोक कुमार सिंह, डीआईओएस
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विधान सभा चुनाव को लेकर इस बार युवाओं को मतदाता बनाने के लिए जिले में छह माह से अभियान चल रहा था। इंटर कालेजों व महाविद्यालयों में कैंप लगाकर 18 साल की आयु पूरी करने वाले छात्र-छात्राओं को मतदाता बनाया गया है। वोटर आईडी कार्ड मिलने के बाद युवा मतदाताओं में इस बात को लेकर उत्साह पहले से था कि वह मनचाही सरकार बनाएंगे, लेकिन विधान सभा चुनाव बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले पड़ जाएगा, इसका अंदाजा युवा मतदाता बने छात्र-छात्राओं को नहीं था।
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परीक्षा से ठीक पहले चुनाव पड़ जाने पर युवा मतदाता अपनी सरकार बनाने के नशे में डूब चुका है। उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न मिलने के बाद छात्र-छात्राएं प्रचार के नशे में डूब गए हैं। इस दौरान वह विषयों की तैयारी भूलकर बस्ते को खूंटी पर टांग सुबह से प्रचार में जुट जाते हैं। उम्मीदवारों को भी अपने स्वार्थ के आगे इन छात्र-छात्राओं के भविष्य की चिंता नहीं है। नगदी देने के साथ-साथ लग्जरी गाड़ी मुहैया कराकर उन्हें विधान सभा क्षेत्र में प्रचार-प्रसार के लिए उतार दिया गया है। भविष्य की परवाह किए बगैर युवा मतदाता नई सरकार बनाने का जज्बा लेकर प्रचार की कमान पूरी तरह संभाल चुके हैं।
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स्टार प्रचारकों की जनसभा में जुटाते हैं भीड़
पढ़ाई-लिखाई छोड़ प्रचार अभियान में जुटे युवा मतदाता जनसभा वाले दिन भीड़ जुटाने में महती भूमिका निभाते हैं। अपनी सरकार बनाने के चक्कर में गांव के लोगों को तरह-तरह का प्रलोभन देकर जनसभा में ले जाने की भरपूर कोशिश करते हैं। काफी हद तक युवाओं को इसमें सफलता भी मिल रही है। मतदान और प्रत्याशी को जिताने का जोश जितना युवाओं में दिख रहा है उतना उम्मीदवारों में भी नजर नहीं आ रहा।
चुनावी ड्यूटी प्रशिक्षण में व्यस्त हुए शिक्षक
विधान सभा चुनाव के दौरान शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी गई है। इसके चलते शिक्षक चुनावी प्रशिक्षण में व्यस्त हो गए हैं। शिक्षकों के प्रशिक्षण और चुनावी कार्य में व्यस्त होने से शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई-लिखाई पूरी तरह से ठप हो गई है। कक्षा नौ और 11 की परीक्षाएं भी सिर पर हैं। स्कूलों में फरवरी और मार्च का महीना वार्षिक पाठ्यक्रम पूरा करने का समय होता है, लेकिन चुनावी व्यस्तता के चलते बच्चों की पढ़ाई का काम ठप हो गया है। इससे नौ और 11 के छात्र-छात्राओं को अधूरे पढ़ाई कर ही परीक्षा देनी होगी।
स्कूलों का वार्षिक पाठ्यक्रम लगभग पूरा हो चुका है। जिन स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है वहां वैसे भी पढ़ाई मार्च में बंद हो जाएगी। रही बात छात्र-छात्राओं के प्रचार में उतरने की तो यह उनकी मर्जी पर निर्भर करता है।
अशोक कुमार सिंह, डीआईओएस