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जिला पंचायज सदस्य कमला देवी को मतदान से रोकने पर भड़के सपाई, धरने पर बैठे
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वार्ड संख्या 19 की जिला पंचायत सदस्य कमला देवी को मतदान से रोकने पर कलक्ट्रेट में हंगामा खड़ा हो गया। इससे नाराज सपा कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद जिला पंचायत सदस्य ने मतदान किया तो कार्यकर्ता शांत हुए।
शनिवार करीब साढ़े 11 बजे सपा प्रत्याशी के साथ कमला देवी मतदान के लिए चार पहिया वाहन से कलक्ट्रेट जा रहीं थीं। कलक्ट्रेट गेट पर ही भाजपा प्रत्याशी कल्पना सोनकर के पति जीतेंद्र सोनकर ने उनके अंदर जाने पर आपत्ति जताई।
बताया कि गाड़ी में जो महिला सवार है वह कमला देवी नहीं है। इसे लेकर सपा प्रत्याशी के पति उमेश दिवाकर से उनकी झड़प भी हुई। बाद में पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप पर कमला देवी मतदान स्थल तक पहुंची। वहां उनका हस्ताक्षर मिलान नहीं हो पा रहा था। इस कारण काफी देर तक वह वोट नहीं डाल सकीं।
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इसकी जानकारी होने पर सपा कार्यकर्ता हंगामा करने लगे। सपाई कलक्ट्रेट के प्रवेश द्वार पर ही धरना देकर बैठ गए। इस दौरान काफी गहमागहमी रही। बाद में गेट पर रहे अतिरिक्त मजिस्ट्रेट राकेश चंद्रा ने बताया कि कमला देवी का वोट पड़ गया है तो सपाई धरने से उठे। बाद में मतदान केंद्र से बाहर निकली कमला देवी ने भी वोट पड़ने की बात कही।
डर व भितरघात ने सपा को दिखाया पराजय का रास्ता
भितरघात और डर की वजह से जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में करीबी अंतर से सपा को हार झेलनी पड़ी। मतदान के पहले जिस तरह से सदस्यों पर पुलिस और प्रशासन का शिकंजा कसा, उसे सपा के हार का कारण माना जा रहा है। सपा जिलाध्यक्ष दयाशंकर यादव ने आरोप लगाया कि यहां भाजपा ने नहीं बल्कि प्रशासन ने सपा से चुनाव लड़ने का काम किया है।
चुनाव से ठीक पहले वार्ड नंबर सात से निर्वाचित सदस्य शेर मोहम्मद पर पुलिस ने शिकंजा कसा। बताया गया कि वर्ष 2000 में सैनी कोतवाली में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले में शेरू वांछित है। पुलिस ने उसके घर में कई बार दबिश भी डाली, लेकिन वह हाथ नहीं लगा।
इसी तरह वार्ड संख्या दो से निर्वाचित आरसी जाफरी और उनके भाई के खिलाफ अनुसूचित जाति की महिला ने सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा चरवा कोतवाली में दर्ज कराया। इसी तरह शायमा देवी का घर ढहाने के लिए तहसील प्रशासन ने नोटिस चस्पा कर दिया। बताया गया कि उनका घर नवीन परती जमीन पर बना है। जिला पंचायत सदस्य सुनीता निषाद के पति रणविजय निषाद अध्यापक हैं। उन पर विभागीय जांच बैठा दी गई। सदस्य मुंसब अली के स्कूल की बाउंड्रीवाल को भी अतिक्रमण बताकर उसे हटाने का नोटिस दिया गया।
इधर, सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज होने के बाद सपा के जिला पंचायत सदस्य आरसी जाफरी वोट डालने नहीं पहुंचे। सपा जिलाध्यक्ष दयाशंकर यादव का कहना है कि प्रशासन ने सदस्यों को डराकर भाजपा के पक्ष में मतदान करने के लिए मजबूर कर दिया था। यहां पर भाजपा प्रत्याशी ने नहीं बल्कि सपा के साथ चुनाव जिला प्रशासन ने लड़ा है। सदस्यों के अंदर ऐसा भय पैदा किया गया कि वह भितरघात कर दूसरे पाले में जाने को मजबूर हुए।
मुख्यालय पर रहे अघोषित कर्फ्यू, चाय-पानी को भी तरसे लोग
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए हुए मतदान को लेकर कलक्ट्रेट को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। मंझनपुर कस्बे की सीमा को सील किया गया था। इसके अलावा शुक्रवार को ही सदर कोतवाली पुलिस ने कारोबारियों को दुकानें नहीं खोलने की हिदायत जारी कर दी। इसे लेकर मंझनपुर में अघोषित कर्फ्यू सरीखे हालात रहे। लोग चार तो दूर पानी की एक बोतल पाने के लिए भी तरस गए।
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शनिवार करीब साढ़े 11 बजे सपा प्रत्याशी के साथ कमला देवी मतदान के लिए चार पहिया वाहन से कलक्ट्रेट जा रहीं थीं। कलक्ट्रेट गेट पर ही भाजपा प्रत्याशी कल्पना सोनकर के पति जीतेंद्र सोनकर ने उनके अंदर जाने पर आपत्ति जताई।
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बताया कि गाड़ी में जो महिला सवार है वह कमला देवी नहीं है। इसे लेकर सपा प्रत्याशी के पति उमेश दिवाकर से उनकी झड़प भी हुई। बाद में पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप पर कमला देवी मतदान स्थल तक पहुंची। वहां उनका हस्ताक्षर मिलान नहीं हो पा रहा था। इस कारण काफी देर तक वह वोट नहीं डाल सकीं।
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इसकी जानकारी होने पर सपा कार्यकर्ता हंगामा करने लगे। सपाई कलक्ट्रेट के प्रवेश द्वार पर ही धरना देकर बैठ गए। इस दौरान काफी गहमागहमी रही। बाद में गेट पर रहे अतिरिक्त मजिस्ट्रेट राकेश चंद्रा ने बताया कि कमला देवी का वोट पड़ गया है तो सपाई धरने से उठे। बाद में मतदान केंद्र से बाहर निकली कमला देवी ने भी वोट पड़ने की बात कही।
डर व भितरघात ने सपा को दिखाया पराजय का रास्ता
भितरघात और डर की वजह से जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में करीबी अंतर से सपा को हार झेलनी पड़ी। मतदान के पहले जिस तरह से सदस्यों पर पुलिस और प्रशासन का शिकंजा कसा, उसे सपा के हार का कारण माना जा रहा है। सपा जिलाध्यक्ष दयाशंकर यादव ने आरोप लगाया कि यहां भाजपा ने नहीं बल्कि प्रशासन ने सपा से चुनाव लड़ने का काम किया है।
चुनाव से ठीक पहले वार्ड नंबर सात से निर्वाचित सदस्य शेर मोहम्मद पर पुलिस ने शिकंजा कसा। बताया गया कि वर्ष 2000 में सैनी कोतवाली में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले में शेरू वांछित है। पुलिस ने उसके घर में कई बार दबिश भी डाली, लेकिन वह हाथ नहीं लगा।
इसी तरह वार्ड संख्या दो से निर्वाचित आरसी जाफरी और उनके भाई के खिलाफ अनुसूचित जाति की महिला ने सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा चरवा कोतवाली में दर्ज कराया। इसी तरह शायमा देवी का घर ढहाने के लिए तहसील प्रशासन ने नोटिस चस्पा कर दिया। बताया गया कि उनका घर नवीन परती जमीन पर बना है। जिला पंचायत सदस्य सुनीता निषाद के पति रणविजय निषाद अध्यापक हैं। उन पर विभागीय जांच बैठा दी गई। सदस्य मुंसब अली के स्कूल की बाउंड्रीवाल को भी अतिक्रमण बताकर उसे हटाने का नोटिस दिया गया।
इधर, सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज होने के बाद सपा के जिला पंचायत सदस्य आरसी जाफरी वोट डालने नहीं पहुंचे। सपा जिलाध्यक्ष दयाशंकर यादव का कहना है कि प्रशासन ने सदस्यों को डराकर भाजपा के पक्ष में मतदान करने के लिए मजबूर कर दिया था। यहां पर भाजपा प्रत्याशी ने नहीं बल्कि सपा के साथ चुनाव जिला प्रशासन ने लड़ा है। सदस्यों के अंदर ऐसा भय पैदा किया गया कि वह भितरघात कर दूसरे पाले में जाने को मजबूर हुए।
मुख्यालय पर रहे अघोषित कर्फ्यू, चाय-पानी को भी तरसे लोग
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए हुए मतदान को लेकर कलक्ट्रेट को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। मंझनपुर कस्बे की सीमा को सील किया गया था। इसके अलावा शुक्रवार को ही सदर कोतवाली पुलिस ने कारोबारियों को दुकानें नहीं खोलने की हिदायत जारी कर दी। इसे लेकर मंझनपुर में अघोषित कर्फ्यू सरीखे हालात रहे। लोग चार तो दूर पानी की एक बोतल पाने के लिए भी तरस गए।