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स्वावलंबी बन युवा अपनी भूमिका निभाएं
Mon, 03 Jun 2019 12:42 AM IST
shailendra Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Published by: shailendra Kumar
Updated Mon, 03 Jun 2019 12:42 AM IST
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कौशाम्बी
- फोटो : kaushambi
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मंझनपुर। भवंस मेहता डिग्री कॉलेज भरवारी में रविवार को आर्ट ऑफ लिविंग के प्रकल्प, ‘कर्मयोग’ के आठ दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर का समापन किया गया। भारतीय विद्या भवन के निदेशक रामनरेश त्रिपाठी ने सफल प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किया।
शिविर के संयोजक एवं प्रशिक्षक अमित कुमार सिंह ने बताया कि आठ दिवसीय शिविर में प्रतिभागियों को साधना, सेवा, सत्संग का वास्तविक निहितार्थ समझाया गया। साथ ही इसे अपने जीवन एवं आचरण में उतारने का संकल्प दिलाया गया। राष्ट्र एवं समाज के सर्वांगीण विकास के लिए युवाओं में नेतृत्व क्षमता का विकास करना आवश्यक है। युवा स्वावलंबी बनकर समाज में अपनी भूमिका निभाएं। बताया कि शिविर में विभिन्न जनपदों के 30 प्रतिभागियों का साक्षात्कार के माध्यम से चयन किया गया। शिविर में वरिष्ठ गांधीवादी राम धीरज सिंह, ग्रामीण कुटीर उद्योग विशेषज्ञ सत्येंद्र सिंह, कृषि स्टार्ट-अप के प्रेरक नीरज सिंह, बायोवेद शोध संस्थान के निदेशक डॉ बीके द्विवेदी, मुक्त विश्वविद्यालय की प्रोफेसर स्मिता अग्रवाल, योगाचार्य शशांक शेखर त्रिपाठी, आयुर्वेदिक औषधज्ञ सचिन सिंह आदि विशेषज्ञों ने अपने अनुभव से प्रतिभागियों में नेतृत्व क्षमता के गुण को परिष्कृत किया। समापन अवसर पर कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ रूबी चौधरी, ऊषा मिश्र, किरण, आकाश, रामाशीष, सचिन गोस्वामी, विक्रांत त्रिपाठी, जयशंकर, कृति पांडेय, विष्णु, चंद्रशेखर, प्रमोद, राजू आदि मौजूद रहे।
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शिविर के संयोजक एवं प्रशिक्षक अमित कुमार सिंह ने बताया कि आठ दिवसीय शिविर में प्रतिभागियों को साधना, सेवा, सत्संग का वास्तविक निहितार्थ समझाया गया। साथ ही इसे अपने जीवन एवं आचरण में उतारने का संकल्प दिलाया गया। राष्ट्र एवं समाज के सर्वांगीण विकास के लिए युवाओं में नेतृत्व क्षमता का विकास करना आवश्यक है। युवा स्वावलंबी बनकर समाज में अपनी भूमिका निभाएं। बताया कि शिविर में विभिन्न जनपदों के 30 प्रतिभागियों का साक्षात्कार के माध्यम से चयन किया गया। शिविर में वरिष्ठ गांधीवादी राम धीरज सिंह, ग्रामीण कुटीर उद्योग विशेषज्ञ सत्येंद्र सिंह, कृषि स्टार्ट-अप के प्रेरक नीरज सिंह, बायोवेद शोध संस्थान के निदेशक डॉ बीके द्विवेदी, मुक्त विश्वविद्यालय की प्रोफेसर स्मिता अग्रवाल, योगाचार्य शशांक शेखर त्रिपाठी, आयुर्वेदिक औषधज्ञ सचिन सिंह आदि विशेषज्ञों ने अपने अनुभव से प्रतिभागियों में नेतृत्व क्षमता के गुण को परिष्कृत किया। समापन अवसर पर कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ रूबी चौधरी, ऊषा मिश्र, किरण, आकाश, रामाशीष, सचिन गोस्वामी, विक्रांत त्रिपाठी, जयशंकर, कृति पांडेय, विष्णु, चंद्रशेखर, प्रमोद, राजू आदि मौजूद रहे।
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