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Kaushambi News: नगर पालिका मंझनपुर के बर्खास्त लिपिक ने किया सरेंडर, कोर्ट ने भेजा जेल
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मंझनपुर। नगर पालिका परिषद मंझनपुर के बर्खास्त लिपिक श्यामबाबू केसरवानी ने सोमवार को कोर्ट में सरेंडर कर दिया। आरोपी लिपिक अमानत में खयानत, सरकारी अभिलेखों की हेराफेरी व जालसाजी के मामले में वांटेड था। वर्ष 2018 में तत्कालीन चेयरमैन ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया था। वारंट जारी होने के बाद पिछले एक साल से बर्खास्त लिपिक फरार चल रहा था। जिला जज ने जमानत अर्जी नामंजूर करते हुए लिपिक को जेल भेज दिया।
नगर पालिका परिषद मंझनपुर में लिपिक श्यामबाबू की नियुक्ति 31 जनवरी 1989 को हुई थी। 30 नवंबर 2004 में तत्कालीन ईओ ने नियम विरुद्घ नियुक्ति मानते हुए लिपिक को बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद आरोपी ने उच्च न्यायालय के आदेश पर बहाल होकर पुन: कार्यालय में ज्वाइन कर लिया। 19 फरवरी 2018 को तत्कालीन चेयरमैन महताब आलम ने फर्जी सेवा पुस्तिका तैयार करने का आरोप लगाकर पुन: लिपिक को सेवामुक्त कर दिया।
बर्खास्तगी के बाद आरोपी लिपिक दफ्तर की चाबी लेकर फरार हो गया। ताला तोड़वाने पर पता चला कि कई महत्वपूर्ण पत्रावलियां गायब हैं। इस पर तत्कालीन चेयरमैन ने 30 मार्च 2018 को नगर कोतवाली में अमानत में खयानत, सरकारी अभिलेखों की हेराफेरी आदि का मुकदमा दर्ज करा दिया। एफआईआर दर्ज करने के बाद से पुलिस आरोपी की तलाश रही थी। इसी बीच अदालत ने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया।
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सोमवार को आरोपी ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुशील कुमारी के समक्ष ने आत्मसमर्पण करते हुए जमानत अर्जी दाखिल की। कोर्ट ने जमानत नामंजूर की तो आरोपी ने जिला जज की अदालत में जमानत अर्जी लगाई। जनपद न्यायाधीश बृजेश कुमार ने जमानत रद करते हुए नियमित सुनवाई के लिए 23 दिसंबर की तारीख मुकर्रर कर दी। इसके बाद कोर्ट मोहर्रिर ने हिरासत में लेकर आरोपी को जेल भेज दिया।
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नगर पालिका परिषद मंझनपुर में लिपिक श्यामबाबू की नियुक्ति 31 जनवरी 1989 को हुई थी। 30 नवंबर 2004 में तत्कालीन ईओ ने नियम विरुद्घ नियुक्ति मानते हुए लिपिक को बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद आरोपी ने उच्च न्यायालय के आदेश पर बहाल होकर पुन: कार्यालय में ज्वाइन कर लिया। 19 फरवरी 2018 को तत्कालीन चेयरमैन महताब आलम ने फर्जी सेवा पुस्तिका तैयार करने का आरोप लगाकर पुन: लिपिक को सेवामुक्त कर दिया।
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बर्खास्तगी के बाद आरोपी लिपिक दफ्तर की चाबी लेकर फरार हो गया। ताला तोड़वाने पर पता चला कि कई महत्वपूर्ण पत्रावलियां गायब हैं। इस पर तत्कालीन चेयरमैन ने 30 मार्च 2018 को नगर कोतवाली में अमानत में खयानत, सरकारी अभिलेखों की हेराफेरी आदि का मुकदमा दर्ज करा दिया। एफआईआर दर्ज करने के बाद से पुलिस आरोपी की तलाश रही थी। इसी बीच अदालत ने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया।
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सोमवार को आरोपी ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुशील कुमारी के समक्ष ने आत्मसमर्पण करते हुए जमानत अर्जी दाखिल की। कोर्ट ने जमानत नामंजूर की तो आरोपी ने जिला जज की अदालत में जमानत अर्जी लगाई। जनपद न्यायाधीश बृजेश कुमार ने जमानत रद करते हुए नियमित सुनवाई के लिए 23 दिसंबर की तारीख मुकर्रर कर दी। इसके बाद कोर्ट मोहर्रिर ने हिरासत में लेकर आरोपी को जेल भेज दिया।