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पांच महीने बाद जूनियर स्कूलों में लौटी रौनक
Wed, 25 Aug 2021 05:11 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी
अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 25 Aug 2021 05:11 PM IST
सार
16 अगस्त से नौंवी से बारहवीं तक की कक्षाएं संचालित कराने के बाद अच्छे परिणाम आने पर शिक्षा विभाग ने छठवीं से आठवीं की कक्षाएं 23 अगस्त से चलाने का फैसला लिया।
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Raunak returned to junior schools after five months
- फोटो : KAUSHAMBI
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विस्तार
करीब पांच माह बाद छठवीं से आठवीं के विद्यालयों में रौनक लौटी। स्कूल खुलने पर मंगलवार को बच्चे उत्साह के साथ स्कूल पहुंचे। जहां विद्यार्थियों की थर्मल स्क्रीनिंग व सैनिटाइजेशन के बाद स्कूल में एंट्री दी गई। छह से आठवीं में नौवीं व बारहवीं कक्षा के मुकाबले ज्यादा बच्चे पहुंचे।
बड़ों के साथ छोटे बच्चे भी बैग लेकर स्कूल पहुंच गए। जिन्हें शिक्षकों ने वापस लौटा दिया। वहीं बच्चों को स्कूल भेजकर अभिभावक भी खुश दिखे। कोविड-19 के चलते पहली से आठवीं तक के बच्चे ऑनलाइन एवं मोहल्ला पाठशाला के जरिए पढ़ाई कर रहे थे।
16 अगस्त से नौंवी से बारहवीं तक की कक्षाएं संचालित कराने के बाद अच्छे परिणाम आने पर शिक्षा विभाग ने छठवीं से आठवीं की कक्षाएं 23 अगस्त से चलाने का फैसला लिया। करीब पांच माह बाद स्कूल में कक्षाएं चलनी शुरू हुईं तो छठवीं से आठवीं के बच्चे उत्साह के साथ स्कूल पहुंचे। शिक्षकों ने कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए सभी बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिया।
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शिक्षकों ने कहा कि स्कूल खुलने से कोविड-19 के चलते प्रभावित पढ़ाई की पूर्ति होगी। एक सितंबर से पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं भी संचालित की जाएंगी।
16 अगस्त से संचालित हैं नौ से 12वीं तक की कक्षाएं
माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा नौ से 12 तक की पढ़ाई 16 अगस्त से संचालित हैं। शुरुआत में इन कक्षाओं में भी काफी कम छात्र संख्या रही है। उसके बाद धीरे-धीरे छात्र संख्या बढ़ी और विद्यार्थियों ने पहले की तरह स्कूल आना शुरू कर दिया। निजी स्कूल संचालक तो काफी पहले से कक्षाएं शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
पहले दिन बहुत कम रही छात्र संख्या
जिले भर के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मंगलवार को पहले दिन बहुत कम विद्यार्थी पहुुंचे। हालांकि नगरीय क्षेत्रों में विद्यार्थियों के स्कूलों में पहुंचने की संख्या अधिक रही है। इसके साथ ही निजी स्कूलों में भी विद्यार्थियों की संख्या अधिक रही है।
नहीं कराया गया सैनिटाइजेशन और न ही हुई थर्मल स्क्रीनिंग
पहले दिन उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अव्यवस्थाएं साफ नजर आईं। कुछ एक विद्यालयों को छोड़ दिया जाए तो लगभग किसी भी विद्यालय में थर्मल स्कैनर की व्यवस्था नहीं थी। यही नहीं विद्यालयों को सैनिटाइज भी नहीं कराया गया था। वहीं स्कूलों में बच्चे भी बिना मास्क लगाए पहुंच गए थे।
बोले अभिभावक, अब बच्चों की पढ़ाई की पूर्ति होगी
देवखरपुर निवासी जय प्रकाश अग्रहरि, जयचंद्र मौर्या, राम नरेश, भइया लाल सहित रामबाबू साहू का कहा कि ऑनलाइन बच्चे ठीक से पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे। स्कूल चलने पर बच्चे शिक्षक से सीधे रूबरू होंगे तो अच्छे से पढ़ाई होगी। उनकी जो पढ़ाई प्रभावित हुई है, उसकी भी पूर्ति होगी। बच्चें स्कूल की दिनचर्या में लौटेंगे। आने वाले दिनों में परीक्षा भी होनी हैं।
स्कूल पहुंचकर उत्साहित रहे बच्चे
मंगलवार को वर्ष 2021- 22 सत्र के लिए परिषदीय विद्यालय खुल गए। बच्चों के पहुंचने से पहले दिन विद्यालयों में रौनक रही। बच्चों के साथ अध्यापक भी उत्साहित दिखे। उत्साहित माहौल में स्कूलों में पठन-पाठन शुरू किया गया। मंगलवार को कक्षा छह सात और आठ तक के 50 प्रतिशत बच्चों को स्कूल बुलाया गया था। जिसमें 25 प्रतिशत से भी बच्चों की उपस्थिति कम रही ।लेकिन उपस्थित बच्चे स्कूल पहुंचने से लेकर पठन-पाठन में उत्साहित रहे। मंगलवार को 25 प्रतिशत से कम बच्चे ही स्कूल पहुंचे। बीआरसी चायल के कंपोजिट प्राथमिक विद्यालय चौराडीह में कक्षा छह में चार सात में एक समेत मात्र पांच बच्चे ही उपस्थित हुए।
विद्यालय में मौजूद प्रधानाध्यपक नागमणि पांडेय, शिक्षक क्षमता चौधरी, रेखा शर्मा, मौसमी दास, सुजाता खेरा, अनीता शुक्ला, नीतू सिंह, अभिलाषा, ऐन प्रसाद ,दीपिका कुमारी समेत दस शिक्षकों ने शिक्षण कार्य किया। बीआरसी नेवादा के नूरपुर हाजीपुर जूनियर में कक्षा छह में पंजीकृत 37 बच्चों में पांच कक्षा सात में पंजीकृत 34 में 10 व कक्षा आठ में 27 पंजीकृत बच्चों से सात उपस्थित रहे। शिक्षक राजकुमार ने पठन-पाठन कराया। बीआरसी चायल के कंपोजिट विद्यालय कसेंदा में करीब डेढ़ सौ पंजीकृत बच्चों में 15 ही स्कूल पहुंचे थे।
जिनका पठन-पाठन शिक्षिकों ने कराया। इसी प्रकार बीआरसी चायल व नेवादा के कंपोजिट और जूनियर स्कूलों में पहुंचे बच्चों का अध्ययन कार्य कराया गया है। शिक्षक महेंद्र सिंह ने बताया कि दिन सारणी के हिसाब से पचास प्रतिशत बच्चों को विद्यालय बुलाया गया था, लेकिन पहले दिन उपस्थिति कम रही। बच्चों की उपस्थिति को लेकर उन्हें और अभिभावकों को प्रेरित किया जाएगा।
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बड़ों के साथ छोटे बच्चे भी बैग लेकर स्कूल पहुंच गए। जिन्हें शिक्षकों ने वापस लौटा दिया। वहीं बच्चों को स्कूल भेजकर अभिभावक भी खुश दिखे। कोविड-19 के चलते पहली से आठवीं तक के बच्चे ऑनलाइन एवं मोहल्ला पाठशाला के जरिए पढ़ाई कर रहे थे।
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16 अगस्त से नौंवी से बारहवीं तक की कक्षाएं संचालित कराने के बाद अच्छे परिणाम आने पर शिक्षा विभाग ने छठवीं से आठवीं की कक्षाएं 23 अगस्त से चलाने का फैसला लिया। करीब पांच माह बाद स्कूल में कक्षाएं चलनी शुरू हुईं तो छठवीं से आठवीं के बच्चे उत्साह के साथ स्कूल पहुंचे। शिक्षकों ने कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए सभी बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिया।
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शिक्षकों ने कहा कि स्कूल खुलने से कोविड-19 के चलते प्रभावित पढ़ाई की पूर्ति होगी। एक सितंबर से पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं भी संचालित की जाएंगी।
16 अगस्त से संचालित हैं नौ से 12वीं तक की कक्षाएं
माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा नौ से 12 तक की पढ़ाई 16 अगस्त से संचालित हैं। शुरुआत में इन कक्षाओं में भी काफी कम छात्र संख्या रही है। उसके बाद धीरे-धीरे छात्र संख्या बढ़ी और विद्यार्थियों ने पहले की तरह स्कूल आना शुरू कर दिया। निजी स्कूल संचालक तो काफी पहले से कक्षाएं शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
पहले दिन बहुत कम रही छात्र संख्या
जिले भर के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मंगलवार को पहले दिन बहुत कम विद्यार्थी पहुुंचे। हालांकि नगरीय क्षेत्रों में विद्यार्थियों के स्कूलों में पहुंचने की संख्या अधिक रही है। इसके साथ ही निजी स्कूलों में भी विद्यार्थियों की संख्या अधिक रही है।
नहीं कराया गया सैनिटाइजेशन और न ही हुई थर्मल स्क्रीनिंग
पहले दिन उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अव्यवस्थाएं साफ नजर आईं। कुछ एक विद्यालयों को छोड़ दिया जाए तो लगभग किसी भी विद्यालय में थर्मल स्कैनर की व्यवस्था नहीं थी। यही नहीं विद्यालयों को सैनिटाइज भी नहीं कराया गया था। वहीं स्कूलों में बच्चे भी बिना मास्क लगाए पहुंच गए थे।
बोले अभिभावक, अब बच्चों की पढ़ाई की पूर्ति होगी
देवखरपुर निवासी जय प्रकाश अग्रहरि, जयचंद्र मौर्या, राम नरेश, भइया लाल सहित रामबाबू साहू का कहा कि ऑनलाइन बच्चे ठीक से पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे। स्कूल चलने पर बच्चे शिक्षक से सीधे रूबरू होंगे तो अच्छे से पढ़ाई होगी। उनकी जो पढ़ाई प्रभावित हुई है, उसकी भी पूर्ति होगी। बच्चें स्कूल की दिनचर्या में लौटेंगे। आने वाले दिनों में परीक्षा भी होनी हैं।
स्कूल पहुंचकर उत्साहित रहे बच्चे
मंगलवार को वर्ष 2021- 22 सत्र के लिए परिषदीय विद्यालय खुल गए। बच्चों के पहुंचने से पहले दिन विद्यालयों में रौनक रही। बच्चों के साथ अध्यापक भी उत्साहित दिखे। उत्साहित माहौल में स्कूलों में पठन-पाठन शुरू किया गया। मंगलवार को कक्षा छह सात और आठ तक के 50 प्रतिशत बच्चों को स्कूल बुलाया गया था। जिसमें 25 प्रतिशत से भी बच्चों की उपस्थिति कम रही ।लेकिन उपस्थित बच्चे स्कूल पहुंचने से लेकर पठन-पाठन में उत्साहित रहे। मंगलवार को 25 प्रतिशत से कम बच्चे ही स्कूल पहुंचे। बीआरसी चायल के कंपोजिट प्राथमिक विद्यालय चौराडीह में कक्षा छह में चार सात में एक समेत मात्र पांच बच्चे ही उपस्थित हुए।
विद्यालय में मौजूद प्रधानाध्यपक नागमणि पांडेय, शिक्षक क्षमता चौधरी, रेखा शर्मा, मौसमी दास, सुजाता खेरा, अनीता शुक्ला, नीतू सिंह, अभिलाषा, ऐन प्रसाद ,दीपिका कुमारी समेत दस शिक्षकों ने शिक्षण कार्य किया। बीआरसी नेवादा के नूरपुर हाजीपुर जूनियर में कक्षा छह में पंजीकृत 37 बच्चों में पांच कक्षा सात में पंजीकृत 34 में 10 व कक्षा आठ में 27 पंजीकृत बच्चों से सात उपस्थित रहे। शिक्षक राजकुमार ने पठन-पाठन कराया। बीआरसी चायल के कंपोजिट विद्यालय कसेंदा में करीब डेढ़ सौ पंजीकृत बच्चों में 15 ही स्कूल पहुंचे थे।
जिनका पठन-पाठन शिक्षिकों ने कराया। इसी प्रकार बीआरसी चायल व नेवादा के कंपोजिट और जूनियर स्कूलों में पहुंचे बच्चों का अध्ययन कार्य कराया गया है। शिक्षक महेंद्र सिंह ने बताया कि दिन सारणी के हिसाब से पचास प्रतिशत बच्चों को विद्यालय बुलाया गया था, लेकिन पहले दिन उपस्थिति कम रही। बच्चों की उपस्थिति को लेकर उन्हें और अभिभावकों को प्रेरित किया जाएगा।

Raunak returned to junior schools after five months- फोटो : KAUSHAMBI