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पढ़ रहे हैं राम-लक्ष्मण, गरजने लगे परशुराम
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Fri, 23 Sep 2016 12:14 AM IST
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दारानगर की प्रसिद्ध रामलीला की तैयारी तेज हो चुकी है। राम-लक्ष्मण के पात्र के लिए अंकुर व आकाश का चयन हुआ है। ये दोनों पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन रात में अभ्यास जरूर करते हैं। वहीं परशुराम ने गरजना शुरू कर दिया है। इनके अलावा अन्य पात्र भी अपने-अपने तरीके से रियाज कर रहे हैं।
दारानगर की रामलीला कई कारणों से विश्व प्रसिद्ध है। कुप्पी युद्ध के लिए देश व दुनिया के लोग जानते हैं तो वही रामलीला का कोई मंच न होने के बाद भी इसको प्रसिद्धि हासिल है। दारानगर की रामलीला गांव के कई मोहल्लों के अलावा आसपास के गांवों में होती है। रामलीला के लिए पात्रों का चयन हो चुका है। तीन साल से लगातार अंकुर पाठक (14) राम का पात्र करते हैं। अंकुर कक्षा नौ में कौशांबी पब्लिक स्कूल में पढ़ते हैं। इनके पिता आनंद पाठक शिक्षक हैं और मौजूदा समय कड़ा ब्लाक में समन्वयक के पद पर तैनात हैं।
लक्ष्मण के लिए अकाश तिवारी का चयन हुआ है। आकाश भी कक्षा नौ के छात्र हैं और गांधी मेमोरियल इंटर कालेज दारानगर में पढ़ते हैं। इनके पिता उमेश तिवारी किसान हैं। चयन होने के बाद भी दोनों पढ़ाई में मशगूल रहते हैं। दोनों ने बताया कि वह रात में आठ बजे से दस बजे तक अभ्यास करते हैं। रामायण के पाठ के मुताबिक उनको मंचन करना होता है, इसलिए पूरे मनोयोग से वह अभ्यास कर रहे हैं। पहली बार लक्ष्मण के लिए आकाश का चयन हुआ है, लेकिन वह आत्मविश्वास से भरे हुए हैं।
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वहीं दारानगर में परशुराम की गर्जना अभी से गूंजने लगी हैं। परशुराम का पात्र स्वर्ण कुमार मिश्र कई सालों से कर रहे हैं। उनकी चाय-पान की दुकान है। दिन भर वह अपने धंधे में मशगूल रहते हैं, लेकिन सुबह व शाम रिहर्सल करना नहीं भूलते हैं। स्वर्ण कुमार मिश्र ने बताया कि उनके यहां की रामलीला को प्रसिद्धि कई कारणों से मिली है। बताया कि सभी लोग एक साथ अभ्यास करते हैं ताकि एक दूसरे की कमियां लोगों को पता रहे। बताया कि तैयारी शुरू होते ही सभी पात्रों की दिनचर्या बदल गई है।
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दारानगर की रामलीला कई कारणों से विश्व प्रसिद्ध है। कुप्पी युद्ध के लिए देश व दुनिया के लोग जानते हैं तो वही रामलीला का कोई मंच न होने के बाद भी इसको प्रसिद्धि हासिल है। दारानगर की रामलीला गांव के कई मोहल्लों के अलावा आसपास के गांवों में होती है। रामलीला के लिए पात्रों का चयन हो चुका है। तीन साल से लगातार अंकुर पाठक (14) राम का पात्र करते हैं। अंकुर कक्षा नौ में कौशांबी पब्लिक स्कूल में पढ़ते हैं। इनके पिता आनंद पाठक शिक्षक हैं और मौजूदा समय कड़ा ब्लाक में समन्वयक के पद पर तैनात हैं।
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लक्ष्मण के लिए अकाश तिवारी का चयन हुआ है। आकाश भी कक्षा नौ के छात्र हैं और गांधी मेमोरियल इंटर कालेज दारानगर में पढ़ते हैं। इनके पिता उमेश तिवारी किसान हैं। चयन होने के बाद भी दोनों पढ़ाई में मशगूल रहते हैं। दोनों ने बताया कि वह रात में आठ बजे से दस बजे तक अभ्यास करते हैं। रामायण के पाठ के मुताबिक उनको मंचन करना होता है, इसलिए पूरे मनोयोग से वह अभ्यास कर रहे हैं। पहली बार लक्ष्मण के लिए आकाश का चयन हुआ है, लेकिन वह आत्मविश्वास से भरे हुए हैं।
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वहीं दारानगर में परशुराम की गर्जना अभी से गूंजने लगी हैं। परशुराम का पात्र स्वर्ण कुमार मिश्र कई सालों से कर रहे हैं। उनकी चाय-पान की दुकान है। दिन भर वह अपने धंधे में मशगूल रहते हैं, लेकिन सुबह व शाम रिहर्सल करना नहीं भूलते हैं। स्वर्ण कुमार मिश्र ने बताया कि उनके यहां की रामलीला को प्रसिद्धि कई कारणों से मिली है। बताया कि सभी लोग एक साथ अभ्यास करते हैं ताकि एक दूसरे की कमियां लोगों को पता रहे। बताया कि तैयारी शुरू होते ही सभी पात्रों की दिनचर्या बदल गई है।