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रैगिंग प्रकरण : मेडिकल कॉलेज प्रशासन सवालों के घेरे में, अंतिम जांच रिपोर्ट से पहले ही कर दी कार्रवाई
Fri, 12 Dec 2025 12:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Fri, 12 Dec 2025 12:50 AM IST
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कादीपुर स्थित मेडिकल कॉलेज। संवाद
मंझनपुर। कादीपुर स्थित मेडिकल कॉलेज में रैगिंग प्रकरण को लेकर एक बार फिर विवाद गहराने लगा है। कॉलेज प्रशासन द्वारा 97 छात्रों को एक माह के लिए निलंबित किए जाने और प्रति छात्र 5,000 रुपये का अर्थदंड लगाने के फैसले ने छात्रों व अभिभावकों में नाराजगी बढ़ा दी है। सबसे बड़ी आपत्ति इस बात पर जताई जा रही है कि प्रशासन ने जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट आने से पहले ही पूरे बैच के खिलाफ कार्रवाई कर दी, जबकि आरोप कुछ छात्रों पर ही बताए जा रहे थे।
बताया जा रहा है कि एंटी रैगिंग कमेटी अभी बयान दर्ज कर रही है और जांच पूरी भी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे बैच को दोषी मान लेना कॉलेज प्रशासन पर सवाल खड़ा कर रहा है। छात्र-छात्राओं के अभिभावकों ने इसे समूह दंड बताते हुए कहा कि जिन छात्रों का किसी भी घटनाक्रम से संबंध नहीं है, उन्हें भी दंडित किया जा रहा है। कॉलेज प्रशासन का दावा है कि उन्हें प्रारंभिक रूप से मिले तथ्यों के आधार पर यह निर्णय लेना पड़ा, जबकि अंतिम कार्रवाई जांच रिपोर्ट आने के बाद की जाएगी। वहीं, छात्र-छात्राओं का कहना है कि जल्दबाजी में लिए गए इस फैसले ने उनकी पढ़ाई और आगामी परीक्षाओं पर गंभीर असर डाला है। विवाद बढ़ने के बाद अब लोग कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्न खड़े कर रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। एक छात्र के पिता ने संवाद न्यूज एजेंसी से बातचीत करते हुए कहा कि उनके बेटे पर भी कार्रवाई हुई है। जबकि जिस दिन की घटना बताई जा रहा है, उस दिन वह मौके पर नहीं था। उसकी तबीयत खराब थी। ऐसे में यदि मेडिकल कॉलेज ने फैसले पर विचार नहीं किया तो वह न्यायालय भी जा सकते हैं।
अन्य छात्रों से भी हो रही पूछताछ
मेडिकल कॉलेज में रैगिंग प्रकरण सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है। प्रशासन की ओर से बैच के सभी विद्यार्थियों से पूछताछ की जा रही है। जांच समिति अलग-अलग छात्रों के बयान दर्ज कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है, ताकि किसी भी दोषी को बख्शा न जाए। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी निष्पक्षता से की जा रही है और यदि किसी अन्य छात्र की संलिप्तता सामने आई तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। संवाद
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- एंटी-रैगिंग पोर्टल पर शिकायत मिलने पर पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। उप-प्रधानाचार्य डॉ. सौरभ कृष्ण मिश्रा को नोडल अधिकारी बनाया गया है। समिति को एक सप्ताह में रिपोर्ट देनी है। उसी में स्पष्ट होगा कि रैगिंग हुई या नहीं और कौन-कौन छात्र शामिल थे। -डॉ. हरिओम कुमार सिंह, प्राचार्य
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बताया जा रहा है कि एंटी रैगिंग कमेटी अभी बयान दर्ज कर रही है और जांच पूरी भी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे बैच को दोषी मान लेना कॉलेज प्रशासन पर सवाल खड़ा कर रहा है। छात्र-छात्राओं के अभिभावकों ने इसे समूह दंड बताते हुए कहा कि जिन छात्रों का किसी भी घटनाक्रम से संबंध नहीं है, उन्हें भी दंडित किया जा रहा है। कॉलेज प्रशासन का दावा है कि उन्हें प्रारंभिक रूप से मिले तथ्यों के आधार पर यह निर्णय लेना पड़ा, जबकि अंतिम कार्रवाई जांच रिपोर्ट आने के बाद की जाएगी। वहीं, छात्र-छात्राओं का कहना है कि जल्दबाजी में लिए गए इस फैसले ने उनकी पढ़ाई और आगामी परीक्षाओं पर गंभीर असर डाला है। विवाद बढ़ने के बाद अब लोग कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्न खड़े कर रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। एक छात्र के पिता ने संवाद न्यूज एजेंसी से बातचीत करते हुए कहा कि उनके बेटे पर भी कार्रवाई हुई है। जबकि जिस दिन की घटना बताई जा रहा है, उस दिन वह मौके पर नहीं था। उसकी तबीयत खराब थी। ऐसे में यदि मेडिकल कॉलेज ने फैसले पर विचार नहीं किया तो वह न्यायालय भी जा सकते हैं।
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अन्य छात्रों से भी हो रही पूछताछ
मेडिकल कॉलेज में रैगिंग प्रकरण सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है। प्रशासन की ओर से बैच के सभी विद्यार्थियों से पूछताछ की जा रही है। जांच समिति अलग-अलग छात्रों के बयान दर्ज कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है, ताकि किसी भी दोषी को बख्शा न जाए। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी निष्पक्षता से की जा रही है और यदि किसी अन्य छात्र की संलिप्तता सामने आई तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। संवाद
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- एंटी-रैगिंग पोर्टल पर शिकायत मिलने पर पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। उप-प्रधानाचार्य डॉ. सौरभ कृष्ण मिश्रा को नोडल अधिकारी बनाया गया है। समिति को एक सप्ताह में रिपोर्ट देनी है। उसी में स्पष्ट होगा कि रैगिंग हुई या नहीं और कौन-कौन छात्र शामिल थे। -डॉ. हरिओम कुमार सिंह, प्राचार्य