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Kaushambi News: 100 के पार निजी अस्पताल...निगरानी पर सवाल
Tue, 27 May 2025 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Tue, 27 May 2025 01:22 AM IST
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स्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में 134 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं। इनमें क्लीनिक और पांच अल्ट्रासाउंड सेंटर भी शामिल हैं। लेकिन 100 से ज्यादा ऐसे अस्पताल हैं, जिनका पंजीकरण नहीं है और धड़ल्ले से चल रहे हैं। ये कैसे चल रहे हैं, यह व्यवस्था पर भी सवाल है। इसका उत्तर विभाग के पास भी नहीं है।
अनमोल हॉस्पिटल में ऑपरेशन के दौरान बच्चे की मौत। फिर झोलाछाप के जेल जाने की घटना ने सिस्टम की कलई खोल दी। मंझनपुर, सरायअकिल, तिल्हापुरमोड़, चरवा, पुरखास बेनीराम कटरा, सिराथू, देवीगंज, मूरतगंज, करारी समेत जिले के सभी प्रमुख कस्बों, बाजारों में कुकुरमुत्तों की तरह चल रहे गैर पंजीकृत अस्पतालों से महकमा निगाह फेरे है।
जबकि, स्वास्थ्य विभाग ने इनकी मॉनीटरिंग के लिए डिप्टी सीएमओ डॉ. राहुल को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। लेकिन नामचीन डॉक्टरों का बोर्ड लगाकर नीम-हकीम बेखौफ होकर इलाज कर रहे हैं। इलाज में लापरवाही के कारण अक्सर लोग मौत का शिकार होते हैं। शिकायत होने पर अस्पताल सील होते हैं। कुछ दिनों बाद फिर शुरू हो जाते हैं।
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केस-एक
पुरखास स्थित आयशा मेडिकेयर अस्पताल में 17 अगस्त 2024 को तत्कालीन पीएचसी प्रभारी डॉ. मुक्तेश द्विवेदी को जांच में अस्पताल का पंजीकरण नहीं मिला था। कोई डिग्रीधारक चिकित्सक भी नहीं मिलने पर अस्पताल सील कर सरायअकिल कोतवाली में संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई थी। अब आयशा मेडिकेयर उसी बिल्डिंग में जनता मेडिकेयर के नाम से संचालित हो रहा है।
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केस-दो
चरवा बाजार स्थित उन्नति अस्पताल में नौ दिसंबर 2024 को काजू निवासी राजेंद्र कुमार ने अपनी गर्भवती पत्नी सोनी देवी को डिलीवरी के लिए भर्ती कराया था। ऑपरेशन के बाद जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। परिजनों के हंगामा करने पर तत्कालीन एसडीएम की मौजूदगी में चायल सीएचसी प्रभारी डॉ. ललित सिंह ने अस्पताल सील कर दिया था। कुछ दिन बाद अस्पताल फिर से संचालित होने लगा।
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केस-तीन
बेनीराम कटरा स्थित ममता पाली क्लीनिक में 20 फरवरी 2024 को उमरवल निवासी पंचू यादव ने अपनी गर्भवती पत्नी ज्योति यादव को भर्ती किया था। ऑपरेशन के दौरान नवजात की मौत हो गई थी। परिजनों के हंगामा के बाद अस्पताल स्टाफ भाग गया था। नेवादा पीएचसी प्रभारी डॉ. मुक्तेश द्विवेदी ने अस्पताल को सील कर प्रसूता को सरकारी अस्पताल में भर्ती करा दिया था।
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अनमोल हॉस्पिटल के पंजीकृत चिकित्सक को भूल गया महकमा
चरवा के अनमोल हॉस्पिटल में पैर की रॉड निकालने के दौरान किशोर की मौत मामले में आरोपी सगे भाई विकास और विशेष के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर भले ही जेल भेज दिया गया हो। अस्पताल संचालक संजय कुमार और पंजीकरण के दौरान चिकित्सक की डिग्री लगाने वाले डॉ.देवेंद्र सिंह, पैरामेडिकल स्टॉफ जीएनएम रेनू देवी और बीफार्मा डिग्री होल्डर आशीष केसरवानी को स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार भूल गए। विभागीय अफसर सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कर रहे हैं।
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अवैध रूप से संचालित अस्पतालों, क्लीनिकों के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। अब तक 10 निजी अस्पतालों व एक अल्ट्रासाउंड सेंटर को सीज किया जा चुका है। अनमोल हॉस्पिटल के पंजीकृत चिकित्सक की भी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. संजय कुमार, सीएमओ
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अनमोल हॉस्पिटल में ऑपरेशन के दौरान बच्चे की मौत। फिर झोलाछाप के जेल जाने की घटना ने सिस्टम की कलई खोल दी। मंझनपुर, सरायअकिल, तिल्हापुरमोड़, चरवा, पुरखास बेनीराम कटरा, सिराथू, देवीगंज, मूरतगंज, करारी समेत जिले के सभी प्रमुख कस्बों, बाजारों में कुकुरमुत्तों की तरह चल रहे गैर पंजीकृत अस्पतालों से महकमा निगाह फेरे है।
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जबकि, स्वास्थ्य विभाग ने इनकी मॉनीटरिंग के लिए डिप्टी सीएमओ डॉ. राहुल को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। लेकिन नामचीन डॉक्टरों का बोर्ड लगाकर नीम-हकीम बेखौफ होकर इलाज कर रहे हैं। इलाज में लापरवाही के कारण अक्सर लोग मौत का शिकार होते हैं। शिकायत होने पर अस्पताल सील होते हैं। कुछ दिनों बाद फिर शुरू हो जाते हैं।
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केस-एक
पुरखास स्थित आयशा मेडिकेयर अस्पताल में 17 अगस्त 2024 को तत्कालीन पीएचसी प्रभारी डॉ. मुक्तेश द्विवेदी को जांच में अस्पताल का पंजीकरण नहीं मिला था। कोई डिग्रीधारक चिकित्सक भी नहीं मिलने पर अस्पताल सील कर सरायअकिल कोतवाली में संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई थी। अब आयशा मेडिकेयर उसी बिल्डिंग में जनता मेडिकेयर के नाम से संचालित हो रहा है।
केस-दो
चरवा बाजार स्थित उन्नति अस्पताल में नौ दिसंबर 2024 को काजू निवासी राजेंद्र कुमार ने अपनी गर्भवती पत्नी सोनी देवी को डिलीवरी के लिए भर्ती कराया था। ऑपरेशन के बाद जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। परिजनों के हंगामा करने पर तत्कालीन एसडीएम की मौजूदगी में चायल सीएचसी प्रभारी डॉ. ललित सिंह ने अस्पताल सील कर दिया था। कुछ दिन बाद अस्पताल फिर से संचालित होने लगा।
केस-तीन
बेनीराम कटरा स्थित ममता पाली क्लीनिक में 20 फरवरी 2024 को उमरवल निवासी पंचू यादव ने अपनी गर्भवती पत्नी ज्योति यादव को भर्ती किया था। ऑपरेशन के दौरान नवजात की मौत हो गई थी। परिजनों के हंगामा के बाद अस्पताल स्टाफ भाग गया था। नेवादा पीएचसी प्रभारी डॉ. मुक्तेश द्विवेदी ने अस्पताल को सील कर प्रसूता को सरकारी अस्पताल में भर्ती करा दिया था।
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अनमोल हॉस्पिटल के पंजीकृत चिकित्सक को भूल गया महकमा
चरवा के अनमोल हॉस्पिटल में पैर की रॉड निकालने के दौरान किशोर की मौत मामले में आरोपी सगे भाई विकास और विशेष के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर भले ही जेल भेज दिया गया हो। अस्पताल संचालक संजय कुमार और पंजीकरण के दौरान चिकित्सक की डिग्री लगाने वाले डॉ.देवेंद्र सिंह, पैरामेडिकल स्टॉफ जीएनएम रेनू देवी और बीफार्मा डिग्री होल्डर आशीष केसरवानी को स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार भूल गए। विभागीय अफसर सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कर रहे हैं।
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अवैध रूप से संचालित अस्पतालों, क्लीनिकों के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। अब तक 10 निजी अस्पतालों व एक अल्ट्रासाउंड सेंटर को सीज किया जा चुका है। अनमोल हॉस्पिटल के पंजीकृत चिकित्सक की भी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. संजय कुमार, सीएमओ