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बदहाल पाठशाला: कीचड़ से होकर जाते हैं स्कूल
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Sat, 30 Jul 2016 12:16 AM IST
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बुनियादी शिक्षा पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। फिर भी तमाम प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल के बच्चे रास्ता, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं। स्कूलों में जलभराव, खराब पड़े हैंडपंप, सीलनभरा फर्श, क्षतिग्रस्त चहारदीवारी, दरकी दीवारें बदहाली को बयां कर रही हैं। वहीं जिम्मेदारों की सक्रियता की भी पोल खोलती हैं।
सिराथू ब्लॉक के प्राथमिक स्कूल गड़रियन का पुरवा में आने-जाने का रास्ता ही नहीं है। स्कूल के चारों तरफ बारिश का पानी भर जाता है। इसके कारण बारिश के मौसम में एक तरह से यह स्कूल बंद ही रहता है। प्रधानाध्यापक ने बताया कि रास्ते की समस्या के कारण बारिश में चार महीने स्कूल पहुंचना शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए मुश्किल रहता है। ऐसे में छोटे-छोटे बच्चे कैसे आएं। हेडमास्टर ने बताया कि रास्ते के लिए कई बार उच्चाधिकारियों को लिखापढ़ी की गई।
ग्रामप्रधान से भी समस्या के समाधान को कहा गया, लेकिन अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि इस ओर तनिक भी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। वहीं, स्कूल के बरामदे की फर्श भी क्षतिग्रस्त पड़ी है। उखड़ी फर्श पर ही छात्र-छात्राएं बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। ऐसी ही समस्या प्राथमिक विद्यालय पाता में भी देखने को मिली। यहां स्कूल परिसर में पानी भरा है। स्कूल परिसर में लगे हैंडपंप के चारों ओर पानी भरा होने से बच्चों को पेयजल के लिए भी परेशान होना पड़ता है।
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महीनों से खराब पड़ा है हैंडपंप
प्राथमिक स्कूल गड़रियन का पुरवा में पढ़ने आने वाले छात्र-छात्राएं लगभग दो महीने से पीनेे के पानी को भी तरस रहे हैं। हेडमास्टर ने बताया कि हैंडपंप लगभग दो माह से खराब पड़ा है। इससे स्कूल में पानी की समस्या बनी हुई है। रसोइयां को एमडीएम बनाने के लिए गांव से पानी भरकर लाना पड़ता है। वहीं बच्चे दोपहर का भोजन करने के बाद पानी के लिए घरों को भागते हैं।
स्कूलों में सफाई नहीं होना है बड़ी समस्या
प्राथमिक स्कूलों में सफाई की भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इसके कारण बारिश के मौसम में लगभग सभी स्कूलों में बड़ी-बड़ी घासें और झाड़ियां उग आई हैं। स्कूलों में जलजमाव और सड़ते कचरे की सड़ांध बनी हुई है। शिक्षकों का आरोप है कि स्कूल में सफाई की जिम्मेदारी ग्रामपंचायत के सफाईकर्मी की है, लेकिन सफाई कर्मचारी कभी ड्यूटी पर नहीं आते हैं। इसी से यह समस्या बनी हुई है।
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सिराथू ब्लॉक के प्राथमिक स्कूल गड़रियन का पुरवा में आने-जाने का रास्ता ही नहीं है। स्कूल के चारों तरफ बारिश का पानी भर जाता है। इसके कारण बारिश के मौसम में एक तरह से यह स्कूल बंद ही रहता है। प्रधानाध्यापक ने बताया कि रास्ते की समस्या के कारण बारिश में चार महीने स्कूल पहुंचना शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए मुश्किल रहता है। ऐसे में छोटे-छोटे बच्चे कैसे आएं। हेडमास्टर ने बताया कि रास्ते के लिए कई बार उच्चाधिकारियों को लिखापढ़ी की गई।
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ग्रामप्रधान से भी समस्या के समाधान को कहा गया, लेकिन अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि इस ओर तनिक भी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। वहीं, स्कूल के बरामदे की फर्श भी क्षतिग्रस्त पड़ी है। उखड़ी फर्श पर ही छात्र-छात्राएं बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। ऐसी ही समस्या प्राथमिक विद्यालय पाता में भी देखने को मिली। यहां स्कूल परिसर में पानी भरा है। स्कूल परिसर में लगे हैंडपंप के चारों ओर पानी भरा होने से बच्चों को पेयजल के लिए भी परेशान होना पड़ता है।
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महीनों से खराब पड़ा है हैंडपंप
प्राथमिक स्कूल गड़रियन का पुरवा में पढ़ने आने वाले छात्र-छात्राएं लगभग दो महीने से पीनेे के पानी को भी तरस रहे हैं। हेडमास्टर ने बताया कि हैंडपंप लगभग दो माह से खराब पड़ा है। इससे स्कूल में पानी की समस्या बनी हुई है। रसोइयां को एमडीएम बनाने के लिए गांव से पानी भरकर लाना पड़ता है। वहीं बच्चे दोपहर का भोजन करने के बाद पानी के लिए घरों को भागते हैं।
स्कूलों में सफाई नहीं होना है बड़ी समस्या
प्राथमिक स्कूलों में सफाई की भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इसके कारण बारिश के मौसम में लगभग सभी स्कूलों में बड़ी-बड़ी घासें और झाड़ियां उग आई हैं। स्कूलों में जलजमाव और सड़ते कचरे की सड़ांध बनी हुई है। शिक्षकों का आरोप है कि स्कूल में सफाई की जिम्मेदारी ग्रामपंचायत के सफाईकर्मी की है, लेकिन सफाई कर्मचारी कभी ड्यूटी पर नहीं आते हैं। इसी से यह समस्या बनी हुई है।