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चायल में पलटने लगी सियासी बिसात
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Thu, 22 Dec 2016 12:37 AM IST
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चुनावी तैयारियां जोरों पर हैं। इन सबके बीच सियासी दलों ने भी एकदम से तेजी पकड़ ली है। सपा ने जिले का मुखिया बदलकर चायल विस सीट पर विपक्षियों की गणित बिगाड़ने की कोशिश की है। वहीं अपना दल (अनुप्रिया गुट) ने पेंच फंसाकर भाजपाइयों के साथ ही सपाइयों की नींद उड़ा रखी है। सपा नेता अजय पटेल ने अद का दामन थाम, सपा को जोरदार झटका दिया है। इसी की भरपाई के लिए खड़ग सिंह पटेल को सपा ने बागडोर सौंपी है।
चायल विधानसभा क्षेत्र पर बसपा को छोड़कर सभी दलाें में दावेदारों के बीच जबरदस्त रार चल रही है। सपा ने शशिभूषण द्विवेदी उर्फ बालम महराज को मैदान में उतारा है। इस सीट पर भाजपा व कांग्रेस को अपने पत्ते खोलने हैं। भाजपा से दर्जनों लोगों की दावेदारी इस सीट पर है। खींचतान के बीच अपना दल (अनुप्रिया गुट) ने टांग अड़ा दी है। इस मामले में अद की पैरवी भाजपाइयों पर भारी पड़ सकती है। इसकी प्रबल संभावना को देखते हुए सपा नेता व जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुके अजय सिंह पटेल ने एन वक्त पाला बदलकर सपा को मझधार में छोड़ दिया। अजय पटेल के अद में जाने इस सीट पर सपा को जोरदार झटका लगा है।
अजय सिंह पटेल की कमी न खले इसके लिए सपा ने जिलाध्यक्ष अशोक यादव को हटाकर खड़ग सिंह पटेल को बनाया। एक दूसरे की चुनावी गणित बिगाड़ने पर राजनीतिक दल आमादा हैं। इसके लिए जातीय समीकरण पर भी नजर है। बसपा अपने वोट बैंक को लेकर फिलहाल तो बेफिक्र दिख रही है। वहीं सपा यादव व कुर्मी वोट को साधकर मुस्लिमों को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही हैं। इन सबके बीच अद की सेंधमारी खतरनाक होती दिख रही है।
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चायल विधानसभा क्षेत्र पर बसपा को छोड़कर सभी दलाें में दावेदारों के बीच जबरदस्त रार चल रही है। सपा ने शशिभूषण द्विवेदी उर्फ बालम महराज को मैदान में उतारा है। इस सीट पर भाजपा व कांग्रेस को अपने पत्ते खोलने हैं। भाजपा से दर्जनों लोगों की दावेदारी इस सीट पर है। खींचतान के बीच अपना दल (अनुप्रिया गुट) ने टांग अड़ा दी है। इस मामले में अद की पैरवी भाजपाइयों पर भारी पड़ सकती है। इसकी प्रबल संभावना को देखते हुए सपा नेता व जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुके अजय सिंह पटेल ने एन वक्त पाला बदलकर सपा को मझधार में छोड़ दिया। अजय पटेल के अद में जाने इस सीट पर सपा को जोरदार झटका लगा है।
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अजय सिंह पटेल की कमी न खले इसके लिए सपा ने जिलाध्यक्ष अशोक यादव को हटाकर खड़ग सिंह पटेल को बनाया। एक दूसरे की चुनावी गणित बिगाड़ने पर राजनीतिक दल आमादा हैं। इसके लिए जातीय समीकरण पर भी नजर है। बसपा अपने वोट बैंक को लेकर फिलहाल तो बेफिक्र दिख रही है। वहीं सपा यादव व कुर्मी वोट को साधकर मुस्लिमों को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही हैं। इन सबके बीच अद की सेंधमारी खतरनाक होती दिख रही है।
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