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देवी के कात्यायनी स्वरूप की भक्तों ने की पूजा
Fri, 12 Apr 2019 12:22 AM IST
shailendra Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Published by: shailendra Kumar
Updated Fri, 12 Apr 2019 12:22 AM IST
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मंझनपुर। नवरात्र के छठवें दोआबा में देवी भगवती के कात्यायनी स्वरूप का पूजन किया गया। शक्ति की आराधना को कड़ा धाम समेत जिले भर के पूजा पंडालों और देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सभी भक्तों ने आस्था के साथ मां के चरणों में शीष नवाया। इस दौरान लगाए गए जयकारों से जनपद का माहौल भक्तिमय बना रहा।
आदि शक्ति मां दुर्गा का छठवां स्वरूप कात्यायनी हैं। नवरात्र के छठवें दिन मां के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। पुराणों के अनुसार एक बार कात्यायन ऋषि ने तप करके देवी से वरदान मांगा कि आप मेरे कुल में पुत्री के रूप में जन्म लें। देवी को अजन्मा माना गया है। कात्यायन ऋषि की प्रसन्नता के लिए देवी ने अजन्मा स्वरूप त्यागकर ऋषि कुल में जन्म लिया। इसी कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। देवी का ये स्वरूप भी भक्तों को अनन्त फल देने वाला माना जाता है। इस रात्रि जागरण जप करने से भक्तों को सहज ही माता की कृपा का लाभ मिलता है। इन्हीं फलों की प्राप्ति के लिए भक्तों ने गुरुवार को पूरी आस्था और विश्वास के साथ मंदिरों में पहुंचकर मां कात्यायनी स्वरूप की पूजा की।
मुख्यालय मंझनपुर, करारी, भरवारी, पश्चिमशरीरा, सरायअकिल, अजुहा, सिराथू चायल समेत जिले भर के भक्तों ने अपने-अपने बाजारों, कस्बों में स्थापित मंदिरों पंडालों में विधिवत पूजा की। 51 शक्तिपीठों में एक शीतलाधाम कड़ा में सुबह से ही भक्तों का तांता लग गया था। श्रद्धालुओं को घंटों लाइन में लगे रहने के बाद मां का दर्शन प्राप्त हुआ। इसके बाद भी किसी को पल भर से ज्यादा देर तक मां के करीब रहने का मौका नहीं मिल सका। भीड़ अधिक होने के कारण धक्का-मुक्की के बीच दर्शन हुआ। सभी ने श्रद्धा के साथ मां का पूजन किया।
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आदि शक्ति मां दुर्गा का छठवां स्वरूप कात्यायनी हैं। नवरात्र के छठवें दिन मां के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। पुराणों के अनुसार एक बार कात्यायन ऋषि ने तप करके देवी से वरदान मांगा कि आप मेरे कुल में पुत्री के रूप में जन्म लें। देवी को अजन्मा माना गया है। कात्यायन ऋषि की प्रसन्नता के लिए देवी ने अजन्मा स्वरूप त्यागकर ऋषि कुल में जन्म लिया। इसी कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। देवी का ये स्वरूप भी भक्तों को अनन्त फल देने वाला माना जाता है। इस रात्रि जागरण जप करने से भक्तों को सहज ही माता की कृपा का लाभ मिलता है। इन्हीं फलों की प्राप्ति के लिए भक्तों ने गुरुवार को पूरी आस्था और विश्वास के साथ मंदिरों में पहुंचकर मां कात्यायनी स्वरूप की पूजा की।
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मुख्यालय मंझनपुर, करारी, भरवारी, पश्चिमशरीरा, सरायअकिल, अजुहा, सिराथू चायल समेत जिले भर के भक्तों ने अपने-अपने बाजारों, कस्बों में स्थापित मंदिरों पंडालों में विधिवत पूजा की। 51 शक्तिपीठों में एक शीतलाधाम कड़ा में सुबह से ही भक्तों का तांता लग गया था। श्रद्धालुओं को घंटों लाइन में लगे रहने के बाद मां का दर्शन प्राप्त हुआ। इसके बाद भी किसी को पल भर से ज्यादा देर तक मां के करीब रहने का मौका नहीं मिल सका। भीड़ अधिक होने के कारण धक्का-मुक्की के बीच दर्शन हुआ। सभी ने श्रद्धा के साथ मां का पूजन किया।
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