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नवरात्र: या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता...
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वासंतिक नवरात्र के आखिरी दिन गुरुवार को भक्तों ने मां के सिद्धिदात्री स्वरूप का विधि-विधान से पूजन अर्चन किया। सुबह स्नान करने के बाद भक्तों ने घरों में स्थापित कलश के सामने बैठकर दुर्गा चालीसा, दुर्गा मंत्र व दुर्गासप्तशती पाठ किया। इसके बाद कलश के समक्ष रोट, बतासा, नारियल का प्रसाद चढ़ाकर हवन किया। इस दौरान घर-घर या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: का मंत्र व मां अम्बे की आरती गूंजती रही। हवन करने के बाद भक्तों ने मां अम्बे को शारदीय नवरात्र के लिए क्षमायाचना के साथ विदा किया। हवन के बाद प्रतिपदा व अष्टमी का ब्रत रखने वाले भक्तों ने दोपहर बाद पारायण किया। दूसरी ओर नौ दिन का ब्रत रखने वाले भक्तों ने शाम साढ़े आठ बजे के बाद पारायण किया। आखिरी दिन भी देवी मंदिरों के पट भक्तों के लिए नहीं खोले गए। इसके चलते मंदिरों में भक्तों की भीड़ नहीं जुट सकी।
नवरात्र पर्व पर कड़ा स्थित मां शीतला की दरबार समेत जिले भर के मंदिरों के पट पुजारियों ने बंद रखे। आखिरी दिन भी मंदिर के दरवाजे भक्तों के लिए नहीं खोले गए। शीतलाधाम कड़ा, झारखंडी देवी पश्चिम शरीरा, दुर्गा देवी मंदिर मंझनपुर, अलोपशंकरी देवी मंदिर अम्बारी व संचवारा के पुजारियों ने भोर में ही देवी का स्नान कराते हुए प्रसाद चढ़ाकर पूजन किया और फिर ताला लगा दिया। पट बंद होने की जानकारी होने के चलते भक्तों ने भी नवरात्र के आखिरी दिन भी मंदिर की ओर रुख नहीं किया।
नवरात्र पर्व के आखिरी दिन मां को चढ़ाने के लिए फूल-माला व नारियल की बिक्री जोरों पर रहीं। माली फूल-माला और नारियल को अपने घरों के आसपास संकरे रास्ते में बेंचते नजर आए। इसके अलावा नारियल व बतासा खरीदने वालों की भीड़ किराने की दुकानों में भी सुबह से लगी रही। इस दौरान तमाम दुकानों में सामाजिक दूरी तार-तार हाती दिखी।
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नवरात्र पर्व पर कड़ा स्थित मां शीतला की दरबार समेत जिले भर के मंदिरों के पट पुजारियों ने बंद रखे। आखिरी दिन भी मंदिर के दरवाजे भक्तों के लिए नहीं खोले गए। शीतलाधाम कड़ा, झारखंडी देवी पश्चिम शरीरा, दुर्गा देवी मंदिर मंझनपुर, अलोपशंकरी देवी मंदिर अम्बारी व संचवारा के पुजारियों ने भोर में ही देवी का स्नान कराते हुए प्रसाद चढ़ाकर पूजन किया और फिर ताला लगा दिया। पट बंद होने की जानकारी होने के चलते भक्तों ने भी नवरात्र के आखिरी दिन भी मंदिर की ओर रुख नहीं किया।
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नवरात्र पर्व के आखिरी दिन मां को चढ़ाने के लिए फूल-माला व नारियल की बिक्री जोरों पर रहीं। माली फूल-माला और नारियल को अपने घरों के आसपास संकरे रास्ते में बेंचते नजर आए। इसके अलावा नारियल व बतासा खरीदने वालों की भीड़ किराने की दुकानों में भी सुबह से लगी रही। इस दौरान तमाम दुकानों में सामाजिक दूरी तार-तार हाती दिखी।
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