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Kaushambi News: बस-ट्रेनों में बढ़े मुसाफिर, सीट का रहा संकट
Sun, 24 Mar 2024 04:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sun, 24 Mar 2024 04:27 AM IST
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होली का त्योहार मनाने के लिए बड़ी संख्या में परदेश में रहने वाले जिले के लोग घर वापसी कर रहे हैं। इसकी वजह से बस से लेकर ट्रेनों तक में मुसाफिरों की संख्या बढ़ गई है। हालात यह है कि शनिवार को रोडवेज की तमाम बसों में मुसाफिरों ने खड़े होकर यात्रा की।
जिले के लोग दिल्ली, मुंबई, सूरत, पुणे आदि शहरों में रोजगार करते हैं। इन लोगों को पर्व पर ही घर आना होता है। ट्रेनों में सीटें फुल हैं और बसों में बैठने की जगह नहीं मिल रही है। इसके बाद भी रोडवेज ने बसें नहीं बढ़ाईं। बांदा, चित्रकूट, प्रयागराज मार्ग को छो़ड़ दिया जाए तो सरायअकिल से प्रयागराज को जाने वाली बसों में यात्रियों की भीड़ रही।
धाता मार्ग पर सिर्फ एक बस का संचालन होता है। इसकी वजह से लोगों को डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ा। मंझनपुर से पश्चिमशरीरा, धाता आदि मार्गों का भी यही हाल रहा। जिस जो भी वाहन मिला वह उससे अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गया। यही हाल ट्रेनों का भी है। दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग पर रोजाना 25 हजार रुपये के टिकट बिक्री के सापेक्ष 16 मार्च से कभी 42 तो कभी 48 हजार रुपये के टिकट बिक रहे हैं। सबसे ज्यादा भीड़ संगम व चौरीचौरा एक्सप्रेस में होती है।
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स्टेशन अधीक्षक भरवारी डीएन यादव का कहना है कि त्योहार पर टिकट की बिक्री ज्यादा होना आम बात है। सबसे ज्यादा यहां मुंबई से आने वाली ट्रेनों के आरक्षित टिकट बुक हुए हैं। वहीं एआरएम आरएस वर्मा का कहना है कि लीडर डिपो की 84 बसों का संचालन किया जा रहा है। पर्व को देखते हुए चालक व परिचालकों के अवकाश रद्द कर दिए गए हैं। मुसाफिरों को किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी। यह बात सही है कि यात्रियों की संख्या में इजाफा हुआ है।
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जिले के लोग दिल्ली, मुंबई, सूरत, पुणे आदि शहरों में रोजगार करते हैं। इन लोगों को पर्व पर ही घर आना होता है। ट्रेनों में सीटें फुल हैं और बसों में बैठने की जगह नहीं मिल रही है। इसके बाद भी रोडवेज ने बसें नहीं बढ़ाईं। बांदा, चित्रकूट, प्रयागराज मार्ग को छो़ड़ दिया जाए तो सरायअकिल से प्रयागराज को जाने वाली बसों में यात्रियों की भीड़ रही।
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धाता मार्ग पर सिर्फ एक बस का संचालन होता है। इसकी वजह से लोगों को डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ा। मंझनपुर से पश्चिमशरीरा, धाता आदि मार्गों का भी यही हाल रहा। जिस जो भी वाहन मिला वह उससे अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गया। यही हाल ट्रेनों का भी है। दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग पर रोजाना 25 हजार रुपये के टिकट बिक्री के सापेक्ष 16 मार्च से कभी 42 तो कभी 48 हजार रुपये के टिकट बिक रहे हैं। सबसे ज्यादा भीड़ संगम व चौरीचौरा एक्सप्रेस में होती है।
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स्टेशन अधीक्षक भरवारी डीएन यादव का कहना है कि त्योहार पर टिकट की बिक्री ज्यादा होना आम बात है। सबसे ज्यादा यहां मुंबई से आने वाली ट्रेनों के आरक्षित टिकट बुक हुए हैं। वहीं एआरएम आरएस वर्मा का कहना है कि लीडर डिपो की 84 बसों का संचालन किया जा रहा है। पर्व को देखते हुए चालक व परिचालकों के अवकाश रद्द कर दिए गए हैं। मुसाफिरों को किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी। यह बात सही है कि यात्रियों की संख्या में इजाफा हुआ है।