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जनता ने दिया साथ, किस्मत ने हराया
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Sun, 13 Dec 2015 11:46 PM IST
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इसे कहते हैं किस्मत का खेल...भाग्य के साथ नहीं देने पर बना बनाया खेल बिगड़ जाता है। कुछ ऐसा ही रविवार को मतगणना के दौरान चायल में देखने को मिला। यहां की ग्रामसभा बिलासपुर प्रधान पद के दो उम्मीदवारों को बराबर मत मिले। मुकाबला टाई हो गया। परिणाम घोषित करने के लिए लॉटरी का सहारा लिया गया। किस्मत चतुर्वेदी सरोज के साथ रही। वह भाग्य के सहारे गांव का प्रधान बन बैठा।
चायल विकास खंड के ग्रामसभा बिलासपुर की कुल आबादी 2466 है। अनुसूचित और पिछड़ी जाति बाहुल्य इस ग्रामसभा में प्रधान पद के लिए दूसरे चरण में 1 दिसंबर को मतदान कराया गया था। इस ग्रामसभा में प्रधान बनने के लिए 12 प्रत्याशी मैदान में थे। यहां 1348 वोट पड़े थे। रविवार को दिन में करीब 11 बजे इस ग्रामसभा की मतगणना शुरू हुई। करीब दो घंटे तक चली वोटों की गिनती समाप्त हुई, तो प्रधान बनने के लिए किस्मत आजमा रहे ओमप्रकाश और चतुर्वेदी सरोज को बराबर-बराबर यानि 216-216 वोट प्राप्त हुए थे।
प्रधान पद के दो उम्मीदवारों को बराबर-बराबर वोट मिलने के बाद तीन बार पुर्नमतगणना कराई गई, लेकिन परिणाम टस से मस नहीं हुआ। आरओ ने इसकी जानकारी जिला निर्वाचन अधिकारी, प्रेक्षक समेत अन्य उच्चाधिकारियों को दिया। आखिर में अफसरों के निर्देश पर प्रधान पद का परिणाम घोषित करने के लिए लाटरी का सहारा लिया गया। एक बराबर वोट पाने वाले दोनों प्रत्याशियों का नाम पर्ची में लिखकर एक महिला से पर्ची उठवाई गई। इस दौरान चतुर्वेदी सरोज मुकद्दर का सिकंदर साबित हुआ। पर्ची उसके नाम की निकली और वह गांव का प्रधान बन गया।
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चायल विकास खंड के ग्रामसभा बिलासपुर की कुल आबादी 2466 है। अनुसूचित और पिछड़ी जाति बाहुल्य इस ग्रामसभा में प्रधान पद के लिए दूसरे चरण में 1 दिसंबर को मतदान कराया गया था। इस ग्रामसभा में प्रधान बनने के लिए 12 प्रत्याशी मैदान में थे। यहां 1348 वोट पड़े थे। रविवार को दिन में करीब 11 बजे इस ग्रामसभा की मतगणना शुरू हुई। करीब दो घंटे तक चली वोटों की गिनती समाप्त हुई, तो प्रधान बनने के लिए किस्मत आजमा रहे ओमप्रकाश और चतुर्वेदी सरोज को बराबर-बराबर यानि 216-216 वोट प्राप्त हुए थे।
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प्रधान पद के दो उम्मीदवारों को बराबर-बराबर वोट मिलने के बाद तीन बार पुर्नमतगणना कराई गई, लेकिन परिणाम टस से मस नहीं हुआ। आरओ ने इसकी जानकारी जिला निर्वाचन अधिकारी, प्रेक्षक समेत अन्य उच्चाधिकारियों को दिया। आखिर में अफसरों के निर्देश पर प्रधान पद का परिणाम घोषित करने के लिए लाटरी का सहारा लिया गया। एक बराबर वोट पाने वाले दोनों प्रत्याशियों का नाम पर्ची में लिखकर एक महिला से पर्ची उठवाई गई। इस दौरान चतुर्वेदी सरोज मुकद्दर का सिकंदर साबित हुआ। पर्ची उसके नाम की निकली और वह गांव का प्रधान बन गया।
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