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Kaushambi News: गोबर से बनीं धूपबत्ती से खुशबू बिखेर रहीं निधि
Tue, 14 Apr 2026 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Tue, 14 Apr 2026 01:06 AM IST
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महिलाओं को धूपबत्ती बनाना सिखाती निधी त्रिपाठी। स्रोत: स्वयं
नेवादा ब्लॉक के कौड़िया गांव की निधि त्रिपाठी इन दिनों गोबर से प्राकृतिक धूपबत्ती बनाकर कौशाम्बी से बनारस तक खुशबू बिखेर रही हैं। साथ ही अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही हैं। उनके नेतृत्व में समूह की महिलाएं मिलकर पर्यावरण अनुकूल उत्पाद तैयार कर रही हैं।
नेवादा ब्लॉक की कौड़िया निवासी निधि त्रिपाठी वर्ष 2020 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ने के करीब तीन महीने बाद उन्हें बनारस स्थित गोधूनी संस्था के माध्यम से गोबर से धूपबत्ती बनाने का 15 दिन का प्रशिक्षण मिला। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अपने घर से ही इस कार्य की शुरुआत की और धीरे-धीरे समूह की 10 महिलाओं को इससे जोड़ लिया।
निधि बताती हैं कि धूपबत्ती बनाने के लिए आवश्यक कच्चा माल उन्हें बनारस से ही उपलब्ध कराया जाता है। समूह की महिलाएं मिलकर हर 15 दिन में लगभग 16 पेटी धूपबत्ती तैयार करती हैं, जिसे बाद में बनारस भेज दिया जाता है। वहां से मिलने वाली राशि में से लागत निकालकर शेष पैसा सभी महिलाओं में बराबर-बराबर बांट दिया जाता है।
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निधि बताती हैं कि यह धूपबत्ती पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से बनाई जाती है, जो न सिर्फ सुगंध फैलाती है बल्कि पर्यावरण को भी स्वच्छ बनाए रखने में सहायक है। समूह की अध्यक्ष के रूप में वह अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
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नेवादा ब्लॉक की कौड़िया निवासी निधि त्रिपाठी वर्ष 2020 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ने के करीब तीन महीने बाद उन्हें बनारस स्थित गोधूनी संस्था के माध्यम से गोबर से धूपबत्ती बनाने का 15 दिन का प्रशिक्षण मिला। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अपने घर से ही इस कार्य की शुरुआत की और धीरे-धीरे समूह की 10 महिलाओं को इससे जोड़ लिया।
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निधि बताती हैं कि धूपबत्ती बनाने के लिए आवश्यक कच्चा माल उन्हें बनारस से ही उपलब्ध कराया जाता है। समूह की महिलाएं मिलकर हर 15 दिन में लगभग 16 पेटी धूपबत्ती तैयार करती हैं, जिसे बाद में बनारस भेज दिया जाता है। वहां से मिलने वाली राशि में से लागत निकालकर शेष पैसा सभी महिलाओं में बराबर-बराबर बांट दिया जाता है।
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निधि बताती हैं कि यह धूपबत्ती पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से बनाई जाती है, जो न सिर्फ सुगंध फैलाती है बल्कि पर्यावरण को भी स्वच्छ बनाए रखने में सहायक है। समूह की अध्यक्ष के रूप में वह अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

महिलाओं को धूपबत्ती बनाना सिखाती निधी त्रिपाठी। स्रोत: स्वयं