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कौशांबी : न मरने वाले का पता चला न मारने वाले, पुलिस ढूंढ रही पहचान कराने वाले

Tue, 08 Nov 2022 06:32 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी
अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 08 Nov 2022 06:32 AM IST
सार

अज्ञात शवों को लेकर जिले की पुलिस का संवेदनहीन रवैया सामने आया। जिन शवों की पहचान हो जाती है, उनके घरवालों से तहरीर लेकर पुलिस घटना का खुलासा कर देती है। लेकिन जिन लोगों की पहचान तक नहीं हो पाती उनकी शिनाख्त कराने व कातिल की गिरफ्तारी के लिए सिर्फ कागजी औपचारिकता निभाई जाती है। 

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Neither the dead nor the killers are found, the police are looking for identities
मौत - फोटो : file

विस्तार

गुमनाम लाशों को लेकर पुलिस संवेदनहीन बनी हुई है। साल भर के भीतर महिला समेत तीन लोगों के शव मिलने के बाद हत्या की पुष्टि हुई। पुलिस कातिलों को पकड़ना तो दूर शव की पहचान तक नहीं करा सकी। अलबत्ता, जीडी में हर महीने कम से कम एक पर्चा काटकर विवेचक शव की शिनाख्त कराने में खुद के गंभीर होने का कागजी परिचय देता है।

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अज्ञात शवों को लेकर जिले की पुलिस का संवेदनहीन रवैया सामने आया। जिन शवों की पहचान हो जाती है, उनके घरवालों से तहरीर लेकर पुलिस घटना का खुलासा कर देती है। लेकिन जिन लोगों की पहचान तक नहीं हो पाती उनकी शिनाख्त कराने व कातिल की गिरफ्तारी के लिए सिर्फ कागजी औपचारिकता निभाई जाती है। 
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जिले में पिछले एक साल के दौरान महिला समेत तीन लोगों के शव मिलने के मामले में कुछ ऐसा ही खेल हो रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की बात सामने आने के बाद पुलिस ने धारा 302 के तहत चौकीदार या प्रधान से तहरीर लेकर केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन खुलासा करना भूल गई। यह हाल तब है जब हत्या जैसे मामले को एसआर (संगीन) केस मानते हुए पूरे मामले का पर्यवेक्षण थानेदार से आईजी तक करते हैं। 

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एसआर केस में हर महीने देनी होती है रिपोर्ट
पुलिस विभाग के सूत्रों के मुताबिक, लाश की शिनाख्त हो या नहीं, लेकिन अगर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की बात सामने आती है तो उसे एसआर केस में दर्ज करना होता है। विवेचक को महीने में कम से कम एक या दो पर्चे काटकर यह बताना होता है कि उसने शिनाख्त कराने या कातिल को पकड़ने की दिशा में क्या कदम उठाया। इसके बाद भी जिले में सारी कार्रवाई कागजी औपचारिकता के बीच सिमटी नजर आ रही है।

यह है शव की पहचान कराने का नियम
मंझनपुर। अज्ञात शव मिलने के बाद कम से कम दो सौ किलोमीटर के दायरे वाले थाने में पुलिस भेजकर मैनुअल तरीके से पहचान करानी होती है। खासकर दूसरे थानों में अगर मृतक की उम्र व हुलिए वाले व्यक्ति की गुमशुदगी लिखी होती है तो उसके वादी से पहचान कराई जानी चाहिए। डीसीआरबी व एनसीआरबी में भी सूचना अपलोड करनी होती है। सोशल, प्रिंट, इलेक्ट्रानिक मीडिया के जरिए प्रचार-प्रसार कराना होता है। सूत्रों की मानें तो इसके लिए शासन से बजट भी मिलता लेकिन वह विवेचक को नहीं मिल पाता। जिससे कोई विवेचक ऐसे मामलों के खुलासे में दिलचस्पी नहीं दिखाता।

अज्ञात लाश के मामले में पैरोकार का फंसता है पेंच
जिन शवों की पहचान हो जाती है, उस मामले में पैरवी करने वाला खुलासे को लेकर थाने से वरिष्ठ अफसरों तक के चक्कर लगाता रहता है। ऐसे में पुलिस अपना सारा काम छोड़ते हुए खुलासा करने में ज्यादा ध्यान देती है। अज्ञात लोगों की हत्या मामले में पैरोकार नहीं होता। इस वजह से विवेचक भी खास दिलचस्पी नहीं लेता।


शिनाख्त कराने के लिए सोशल, प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया का सहारा लिया जाता है। इसके अलावा डीसीआरबी व अन्य माध्यमों से पहचान कराने का प्रयास किया जाता है। जल्द शिनाख्त कराने के निर्देश दिए गए हैं। - समर बहादुर, अपर पुलिस अधीक्षक

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