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Kaushambi News: मसुरियादीन के प्रचार में रॉल्स रॉयस कार से आए थे नेहरू

Tue, 19 Mar 2024 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी Updated Tue, 19 Mar 2024 01:41 AM IST
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Nehru came in Rolls Royce car to campaign for Masuriyuddin
प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू 1957 के लोकसभा चुनाव में कौशाम्बी (तत्कालीन इलाहाबाद ईस्ट कम जौनपुर वेस्ट सीट) में चुनाव प्रचार करने रॉल्स रॉयस कार से आए थे। यहां उन्होंने सरायअकिल के फकीराबाद में आयोजित चुनावी सभा को संबोधित कर अपने सहयोगी मसुरियादीन पासी के लिए चुनाव चिह्न दो बैलों की जोड़ी पर मुहर की जानता से अपील की थी। तब नेहरू की सभा में गांव-गांव से लोग पैदल चलकर आए थे।
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चायल विधानसभा के पदुमनाथपुर सुरसेनी निवासी सेवानिवृत प्रधानाचार्य व पूर्व ब्लाॅक प्रमुख राधेश्याम मिश्रा एवं जवाहरगंज निवासी इलाहाबाद मिल्क कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (पराग) के पूर्व चेयरमैन नन्हुक लाल सिंह देश के दूसरे सबसे बड़े चुनाव को याद करते हुए बताते हैं कि तब इलाहाबाद ईस्ट कम जौनपुर वेस्ट सीट से दो सांसद चुने जाते थे। सामान्य सीट से देश के प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू और सुरक्षित सीट से मसुरियादीन पासी चुनाव लड़ते थे।
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1957 के चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार मसुरियादीन के लिए पं. नेहरू अपनी रॉल्स रॉयस कार से सरायअकिल चुनाव प्रचार करने आए थे। उस जमाने में कार बड़ी चीज हुआ थी। ऐसे में नेहरू की विदेशी गाड़ी की कई दिनों तक चर्चा हुई थी। पंडित नेहरू कस्बे के जमींदार रामकृपाल सिंह ताल्लुकेदार के घर 10 मिनट रुकने के बाद चावल मंडी स्थित विद्या अलंकार विद्यालय भी गए थे।
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पं. नेहरू के भाषण का ही असर था कि जनता ने मसुरियादीन को भारतीय मजदूर प्रजा पार्टी के खिलाफ भारी मतों से विजयी बनाया था। उस दौरान गांव में बहुत कम लोगों के पास रेडियो हुआ करता था। चुनाव परिणाम की जानकारी रेडियो से मिला ही करती थी। इसलिए जिसके पास रेडियो होता था, उसके घर भीड़ जुटती थी।


एक दर्जन से अधिक गांव का मतदान केंद्र था तिल्हापुर
देश की आजादी के कई वर्षो तक गांव-गांव स्कूल की व्यवस्था नहीं थी। जवाहरगंज के सेवानिवृत शिक्षक संगम लाल विश्वकर्मा बताते हैं कि इलाके में एक मतदान केंद्र तिल्हापुर में हुआ करता था, जहां पदुमनाथपुर सुरसेनी, जवाहरगंज, दरहा, गोविंदपुर, हासिमपुर किनार, जैतपुर पूरे हजारी समेत एक दर्जन से अधिक गांव के लोग मतदान करने पैदल ही पांच किलोमीटर का सफर तय करते थे। इसके बाद भी मतदान प्रतिशत 80 के आसपास रहता था।
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