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Kaushambi News: डिजिटल लाइफ स्टाइल खतरे से खाली नहीं, रहें सतर्क
Sat, 04 Feb 2023 01:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sat, 04 Feb 2023 01:18 AM IST
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डिजिटल लाइफ स्टाइल खतरे से खाली नहीं, रहे सतर्क
साइबर क्राइम की रोकथाम के लिए विशेषज्ञ ने युवा वर्ग को दिए टिप्स
कलक्ट्रेट के उदयन सभागार में साइबर अपराध और इसकी रोकथाम पर हुई कार्यशाला
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। जिस तरह से अधिक खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, वैसे ही डिजिटल लाइफ स्टाइल जीना भी खतरे से खाली नहीं है। खासकर युवा वर्ग या फिर टीनएज की दहलीज में खड़े बच्चों को सतर्क रहने की जरूरत है। यह कहना था देश के जाने-माने साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट डॉ. रक्षित टंडन का।
शुक्रवार को कलक्ट्रेट के उदयन सभागार में साइबर अपराध और उसकी रोकथाम पर आयोजित कार्यशाला में उन्होंने स्कूली बच्चों को कई टिप्स दिए। बताया कि मोबाइल पर किसी तरह का गेम खेलने से पहले यह तस्दीक कर लें कि वह गेम किस एज ग्रुप (आयु वर्ग) का है। इसके अलावा किसी भी गेम को खेलते वक्त यह तस्दीक किया जाना चाहिए कि जिस मोबाइल से वह गेम खेल रहे हैं, वह किसका है? उसमें कहींं घरवालों का अकाउंट नंबर तो लिंक नहीं है। गेम प्ले स्टोर से डाउन लोड करते वक्त भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
मोबाइल फोन आज बटुवा (पर्स) है। जिसमें बैंकिंग के एप डाउन लोड होते हैं। इससे खासतौर पर सावधान रहने की जरूरत है। इस दौरान जिले के तमाम नामचीन स्कूलों के छात्र-छात्रा मौजूद रहे। बच्चों ने कई सवाल भी दागे। जिसका साइबर एक्सपर्ट ने उदाहरण देकर जवाब दिया।
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कहा कि साइबर अपराधी वेबसाइट पर मिलती-जुलती फेक बेवसाइट बनाते हैं। लोग स्पेलिंग चेक नहीं करते। जबकि स्पेलिंग व उसमें लगे लोगों में मामूली अंतर होता है। इसलिए जागरूकता जरूरी है।
साइबर अपराध की रोकथाम के लिए शुक्रवार को आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ आईजी चंद्र प्रकाश ने किया। इसके बाद जिले भर के थानेदारों और साइबर सेल से जुड़े लोगों को एक्सपर्ट रक्षित टंडन ने साइबर क्राइम की रोकथाम की बारीकियों की जानकारी दी। इस दौरान एसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव, सीओ सिटी योगेंद्र कृष्ण नारायण, सीओ सिराथू डॉ.केजी सिंह, साइबर सेल के सीसीओ अखिलेश उपाध्याय, संदीप कुमार, इंस्पेक्टर मंझनपुर संतोष शर्मा, टीआई राकेश चौरसिया सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
इंसेट
पासवर्ड बनाने में बरतें सावधानी
मंझनपुर। साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि अक्सर लोग एड्रायड मोबाइल फोन में अपना पासवर्ड भगवान, मम्मी-पापा, जन्मतिथि आदि से बनाते हैं। साइबर अपराधी इसकी वजह से मोबाइल हैक कर डाटा चुरा लेते हैं। इसलिए पासवर्ड बनाते वक्त न्यूमेरिक व अल्फाबेट का इस्तेमाल करें। इसे मोबाइल पर बिल्कुल न सेव करें। दरअसल जब भी आप कोई एंड्रायड मोबाइल खरीदते हैं तो वह बिना ईमेल आईडी के नहीं खुलता। एक डाटा मोबाइल में सेव होता है और दूसरा गूगल पर चला जाता है। इसमें मोबाइल पर दर्ज नंबर, फोटो, वीडियो सभी होते हैं। हैकर पासवर्ड चोरी करके मोबाइल से डाटा चुराकर फ्राड करते हैं। संवाद
इंसेट
स्टॉप, थिंक और पोस्ट है मूलमंत्र
मंझनपुर। अगर आपके मोबाइल पर अनजान लिंक आता है तो उसे रिसीव करने से पहले स्टॉप, थिंक और पोस्ट को मूलमंत्र बनाना चाहिए। पहले देखना चाहिए कि लिंक किसका है, फिर लिंक को कॉपी करके वायरल टोटल डाटा कॉम में जाकर तस्दीक करें। फोन पर गूगल क्लाउड का एक ऑप्शन आता है। वहां से भी मदद मिल सकती है।
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वायरल नहीं हो सकता है वीडियो, बरतें सावधानी
मंझनपुर। यदि अनजान नंबर से वीडियो कॉल आ रही है तो उसे रिसीव न करें। अगर रिसीव करना है तो फ्रंट कैमरे को हाथ के अंगूठे से ढक दें। कॉल परिचित का है तो बैक ग्राउंड देखने के बाद रिसीव करें। अन्यथा फोन डिस्कनेक्ट करने के बाद व्हाट्सएप पर ऑडियो कॉल करके बात करना हितकर होगा। बताया कि अक्सर शिकायतें मिलती हैं कि अश्लील क्लिप बनाकर वायरल करने की धमकी दी जाती है। लेकिन इसमें थोड़ी सावधानी बरतने से साइबर अपराधी कुछ नहीं कर सकता है। किसी कंपनी की साइट सर्च करने के लिए कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट का इस्तेमाल करें। गूगल में दिखने वाली साइटों से बचना चाहिए।
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एंड्रायड फोन में ये बरतें सावधानी
मंझनपुर। जब भी एंड्रायड मोबाइल खरीदें तो पहले सेटिंग में जाएं। यहां गूगल दिखेगा। गूगल में जाने के बाद जीमेल का ऑप्शन आएगा। यहां क्लिक करने के बाद मैसेज फिर सुरक्षा का विकल्प आएगा। सुरक्षा में जाने के बाद दो विकल्प आएंगे। यहां ज्यादा दिमाग नहीं लगाना है, वहां ऑन और ऑफ के बटन होते हैं। ऑफ के बटन को बंद करना है। इस तरह से सुरक्षा के दो चक्र बनेंगे। साइबर अपराधी चाहकर भी मोबाइल हैक कर फ्राड नहीं कर सकेंगे।
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इंसेट
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
मंझनपुर। साइबर विशेषज्ञ ने स्कूली बच्चों से सवाल किया कि वह ऑनलाइन कौन सा गेम खेलते हैं। ज्यादातर बच्चों ने फ्री फायर, पबजी खेलने की बात कही। इस पर एक्सपर्ट ने पिछले दिनों देश में हुई कुछ चर्चित घटनाओं का उदाहरण देते हुए बताया कि अक्सर फ्री फायर में गन व जैकेट के लिए ऑनलाइन लिंक को टच करने के लिए कहा जाता है। यह खतरनाक है। ऐसे में साइबर अपराधी आपके फोन का डाटा चुराकर उसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। बताया कि पिछले दिनों मुंबई के एक छात्र ने अपनी मां का फोन लेकर ऐसी ही खरीदारी की। जिसकी वजह से उसके पिता को 10 लाख रुपये की चपत लगी। बच्चे ने ऑनलाइन एक फ्रेंड (ऑनलाइन जुड़े) से मदद ली। इसके बाद बच्चा गायब कर दिया गया। बाद में वह बच्चा नेपाल के काठमांडू में बरामद हुआ। संवाद
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साइबर क्राइम की रोकथाम के लिए विशेषज्ञ ने युवा वर्ग को दिए टिप्स
कलक्ट्रेट के उदयन सभागार में साइबर अपराध और इसकी रोकथाम पर हुई कार्यशाला
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। जिस तरह से अधिक खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, वैसे ही डिजिटल लाइफ स्टाइल जीना भी खतरे से खाली नहीं है। खासकर युवा वर्ग या फिर टीनएज की दहलीज में खड़े बच्चों को सतर्क रहने की जरूरत है। यह कहना था देश के जाने-माने साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट डॉ. रक्षित टंडन का।
शुक्रवार को कलक्ट्रेट के उदयन सभागार में साइबर अपराध और उसकी रोकथाम पर आयोजित कार्यशाला में उन्होंने स्कूली बच्चों को कई टिप्स दिए। बताया कि मोबाइल पर किसी तरह का गेम खेलने से पहले यह तस्दीक कर लें कि वह गेम किस एज ग्रुप (आयु वर्ग) का है। इसके अलावा किसी भी गेम को खेलते वक्त यह तस्दीक किया जाना चाहिए कि जिस मोबाइल से वह गेम खेल रहे हैं, वह किसका है? उसमें कहींं घरवालों का अकाउंट नंबर तो लिंक नहीं है। गेम प्ले स्टोर से डाउन लोड करते वक्त भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
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मोबाइल फोन आज बटुवा (पर्स) है। जिसमें बैंकिंग के एप डाउन लोड होते हैं। इससे खासतौर पर सावधान रहने की जरूरत है। इस दौरान जिले के तमाम नामचीन स्कूलों के छात्र-छात्रा मौजूद रहे। बच्चों ने कई सवाल भी दागे। जिसका साइबर एक्सपर्ट ने उदाहरण देकर जवाब दिया।
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कहा कि साइबर अपराधी वेबसाइट पर मिलती-जुलती फेक बेवसाइट बनाते हैं। लोग स्पेलिंग चेक नहीं करते। जबकि स्पेलिंग व उसमें लगे लोगों में मामूली अंतर होता है। इसलिए जागरूकता जरूरी है।
साइबर अपराध की रोकथाम के लिए शुक्रवार को आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ आईजी चंद्र प्रकाश ने किया। इसके बाद जिले भर के थानेदारों और साइबर सेल से जुड़े लोगों को एक्सपर्ट रक्षित टंडन ने साइबर क्राइम की रोकथाम की बारीकियों की जानकारी दी। इस दौरान एसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव, सीओ सिटी योगेंद्र कृष्ण नारायण, सीओ सिराथू डॉ.केजी सिंह, साइबर सेल के सीसीओ अखिलेश उपाध्याय, संदीप कुमार, इंस्पेक्टर मंझनपुर संतोष शर्मा, टीआई राकेश चौरसिया सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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पासवर्ड बनाने में बरतें सावधानी
मंझनपुर। साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि अक्सर लोग एड्रायड मोबाइल फोन में अपना पासवर्ड भगवान, मम्मी-पापा, जन्मतिथि आदि से बनाते हैं। साइबर अपराधी इसकी वजह से मोबाइल हैक कर डाटा चुरा लेते हैं। इसलिए पासवर्ड बनाते वक्त न्यूमेरिक व अल्फाबेट का इस्तेमाल करें। इसे मोबाइल पर बिल्कुल न सेव करें। दरअसल जब भी आप कोई एंड्रायड मोबाइल खरीदते हैं तो वह बिना ईमेल आईडी के नहीं खुलता। एक डाटा मोबाइल में सेव होता है और दूसरा गूगल पर चला जाता है। इसमें मोबाइल पर दर्ज नंबर, फोटो, वीडियो सभी होते हैं। हैकर पासवर्ड चोरी करके मोबाइल से डाटा चुराकर फ्राड करते हैं। संवाद
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स्टॉप, थिंक और पोस्ट है मूलमंत्र
मंझनपुर। अगर आपके मोबाइल पर अनजान लिंक आता है तो उसे रिसीव करने से पहले स्टॉप, थिंक और पोस्ट को मूलमंत्र बनाना चाहिए। पहले देखना चाहिए कि लिंक किसका है, फिर लिंक को कॉपी करके वायरल टोटल डाटा कॉम में जाकर तस्दीक करें। फोन पर गूगल क्लाउड का एक ऑप्शन आता है। वहां से भी मदद मिल सकती है।
वायरल नहीं हो सकता है वीडियो, बरतें सावधानी
मंझनपुर। यदि अनजान नंबर से वीडियो कॉल आ रही है तो उसे रिसीव न करें। अगर रिसीव करना है तो फ्रंट कैमरे को हाथ के अंगूठे से ढक दें। कॉल परिचित का है तो बैक ग्राउंड देखने के बाद रिसीव करें। अन्यथा फोन डिस्कनेक्ट करने के बाद व्हाट्सएप पर ऑडियो कॉल करके बात करना हितकर होगा। बताया कि अक्सर शिकायतें मिलती हैं कि अश्लील क्लिप बनाकर वायरल करने की धमकी दी जाती है। लेकिन इसमें थोड़ी सावधानी बरतने से साइबर अपराधी कुछ नहीं कर सकता है। किसी कंपनी की साइट सर्च करने के लिए कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट का इस्तेमाल करें। गूगल में दिखने वाली साइटों से बचना चाहिए।
एंड्रायड फोन में ये बरतें सावधानी
मंझनपुर। जब भी एंड्रायड मोबाइल खरीदें तो पहले सेटिंग में जाएं। यहां गूगल दिखेगा। गूगल में जाने के बाद जीमेल का ऑप्शन आएगा। यहां क्लिक करने के बाद मैसेज फिर सुरक्षा का विकल्प आएगा। सुरक्षा में जाने के बाद दो विकल्प आएंगे। यहां ज्यादा दिमाग नहीं लगाना है, वहां ऑन और ऑफ के बटन होते हैं। ऑफ के बटन को बंद करना है। इस तरह से सुरक्षा के दो चक्र बनेंगे। साइबर अपराधी चाहकर भी मोबाइल हैक कर फ्राड नहीं कर सकेंगे।
इंसेट
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
मंझनपुर। साइबर विशेषज्ञ ने स्कूली बच्चों से सवाल किया कि वह ऑनलाइन कौन सा गेम खेलते हैं। ज्यादातर बच्चों ने फ्री फायर, पबजी खेलने की बात कही। इस पर एक्सपर्ट ने पिछले दिनों देश में हुई कुछ चर्चित घटनाओं का उदाहरण देते हुए बताया कि अक्सर फ्री फायर में गन व जैकेट के लिए ऑनलाइन लिंक को टच करने के लिए कहा जाता है। यह खतरनाक है। ऐसे में साइबर अपराधी आपके फोन का डाटा चुराकर उसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। बताया कि पिछले दिनों मुंबई के एक छात्र ने अपनी मां का फोन लेकर ऐसी ही खरीदारी की। जिसकी वजह से उसके पिता को 10 लाख रुपये की चपत लगी। बच्चे ने ऑनलाइन एक फ्रेंड (ऑनलाइन जुड़े) से मदद ली। इसके बाद बच्चा गायब कर दिया गया। बाद में वह बच्चा नेपाल के काठमांडू में बरामद हुआ। संवाद