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Kaushambi News: अब दूसरी संतान बेटी हुई तो भी मिलेगा योजना का लाभ
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अब दूसरी संतान बेटी हुई तो भी मिलेगा योजना का लाभ
लिंगानुपात में बढ़ोतरी और बालिका भ्रूण हत्या रोकने को लेकर शासन ने लिया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में अब दूसरी संतान बेटी होने पर भी योजना का लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद प्रदेश के लिए बजट में भी इसका प्रावधान कर गाइड लाइन जारी कर दी गई है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) एक जनवरी 2017 से लागू है। इसका उद्देश्य मां और बच्चे के लिए पोषण के साथ ही मजदूरी के नुकसान के आंशिक मुआवजे के तौर पर प्रोत्साहन राशि मुहैया कराना है। डिप्टी सीएमओ डॉ. एचपी मणि ने बताया कि इस योजना में अभी तक पहला बच्चा होने पर तीन किस्तों में पांच हजार रुपये दिए जाते थे। अब यह लाभ दूसरा बच्चा होने पर भी मिलेगा, लेकिन दूसरा बच्चा बालिका होने पर ही राशि देने का प्रावधान किया गया है। योजना में बदलाव का उद्देश्य जन्म के समय लिंगानुपात में बढ़ोतरी और बालिका भ्रूण हत्या पर रोक लगाना है।
दूसरे बच्चे के मामले में गर्भधारण करने के साथ ही रजिस्ट्रेशन किया जाना अनिवार्य है। कम से कम छह माह के भीतर एक प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) होना जरूरी है। दूसरी किस्त की शर्त के तहत बच्चे का जन्म पंजीकरण होना आवश्यक है। साथ ही बच्चे के प्रथम चक्र का टीकाकरण भी पूरा होना चाहिए।
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इसका लाभ लाभार्थी के आधार कार्ड नंबर के आधार पर ही मिलेगा। उन्होंने बताया कि लाभार्थी महिलाएं आशा, एएनएम के जरिए अथवा स्वयं भी ऑनलाइन फार्म भर सकती हैं।
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लिंगानुपात में बढ़ोतरी और बालिका भ्रूण हत्या रोकने को लेकर शासन ने लिया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में अब दूसरी संतान बेटी होने पर भी योजना का लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद प्रदेश के लिए बजट में भी इसका प्रावधान कर गाइड लाइन जारी कर दी गई है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) एक जनवरी 2017 से लागू है। इसका उद्देश्य मां और बच्चे के लिए पोषण के साथ ही मजदूरी के नुकसान के आंशिक मुआवजे के तौर पर प्रोत्साहन राशि मुहैया कराना है। डिप्टी सीएमओ डॉ. एचपी मणि ने बताया कि इस योजना में अभी तक पहला बच्चा होने पर तीन किस्तों में पांच हजार रुपये दिए जाते थे। अब यह लाभ दूसरा बच्चा होने पर भी मिलेगा, लेकिन दूसरा बच्चा बालिका होने पर ही राशि देने का प्रावधान किया गया है। योजना में बदलाव का उद्देश्य जन्म के समय लिंगानुपात में बढ़ोतरी और बालिका भ्रूण हत्या पर रोक लगाना है।
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दूसरे बच्चे के मामले में गर्भधारण करने के साथ ही रजिस्ट्रेशन किया जाना अनिवार्य है। कम से कम छह माह के भीतर एक प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) होना जरूरी है। दूसरी किस्त की शर्त के तहत बच्चे का जन्म पंजीकरण होना आवश्यक है। साथ ही बच्चे के प्रथम चक्र का टीकाकरण भी पूरा होना चाहिए।
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इसका लाभ लाभार्थी के आधार कार्ड नंबर के आधार पर ही मिलेगा। उन्होंने बताया कि लाभार्थी महिलाएं आशा, एएनएम के जरिए अथवा स्वयं भी ऑनलाइन फार्म भर सकती हैं।