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मां सिद्धदात्री की उपासना के साथ भक्तों ने किया हवन-पूजन

Tue, 27 Oct 2020 12:51 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 27 Oct 2020 12:51 AM IST
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murti visharjan in kaushambi after end of shardiya navratra
murti visharjan in kaushambi after end of shardiya navratra - फोटो : KAUSHAMBI
मंझनपुर। जिलेभर में सजाई गई देवी प्रतिमाओं का विसर्जन रविवार और सोमवार को हुआ। भक्तों ने मां को एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर गाजे-बाजे की धुन पर नाचते-गाते नगर भ्रमण कराया। इसके बाद नजदीकी तालाबों, पोखरों नहरों व नदी पहुंचकर मंत्रोच्चार के बीच प्रतिमाओं का विसर्जन किया।
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शारदीय नवरात्र में पूरे नौ दिन तक गांव व कस्बों में स्थापित पूजा-पंडाल भक्तिगीतों से गुलजार रहे। हवन-पूजन के साथ-साथ गीत-संगीत का कार्यक्रम अनवरत रूप से पूजा पंडालों में होता रहा। पर्व खत्म होने के बाद कुछपंडालों की मूर्तियों का विसर्जन रविवार को भक्तों ने ससुर खदेरी नदी पर बने चेकडैम या फिर साफ-सुथरे नजदीकी तालाबों, पोखरों और नहरों में किया। भक्तों ने ज्यादातर मूर्तियों का विसर्जन सोमवार को किया। पूजा-पंडालों से मूर्तियों को जोरदार जयकारों के बीच उठाया गया। इसके बाद डीजे की धुन पर भक्त नाचते-गाते उन्हें नदी व तालाबों तक ले गए। मूर्तियों के विसर्जन के साथ ही शारदीय नवरात्र का समापन हुआ। इस दौरान पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी जगह-जगह मुस्तैद रहे।
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चायल क्षेत्र के गांवों में स्थापित मूर्तियों का ससुर खदेरी नदी व तालाबों में विसर्जन किया गया। ससुर खदेरी नदी कसेंदा और तिल्हापुरमोड़ में क्षेत्र के फतेहपुर सहावपुर, लोकीपुर, दरियापुर, मुरादपुर, मेंडवारा, अकबरपुर, कादिलपुर, बिलासपुर, बलहेपुर, रेही, बूंदा, पेरवा, पेरई, आलमपुर, तिलगोड़ी, काठगांव और भगवतपुर आदि गांवों की सैकड़ों मूर्तियों का विसर्जन किया गया। विसर्जन स्थल पर लगे मेले में लोगों ने खरीदारी भी की। मूर्ति विसर्जन का सिलसिला सुबह आठ बजे से लेकर शाम छह बजे तक चलता रहा। इसी तरह से कल्यानपुर क्षेत्र के ग्रामीणों ने बम्हरौली स्थित तालाब में मां भवानी की प्रतिमाओं का विसर्जन किया। इस मौके पर रामकिशन तिवारी उर्फ अर्जुन फहलवान, दीपक द्विवेदी, बवाली यादव, दिलीप द्विवेदी, पवन तिवारी, रिंकू तिवारी, विनोद डॉक्टर ,रवि गुप्ता, रामसुमन सरोज व राहुल यादव ,संजय यादव, रामचंद्र सरोज समेत तमाम भक्त मौजूद रहे।
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कड़ा क्षेत्र में भक्तों ने किया मां की प्रतिमाओं का विसर्जन
कड़ा। इस बार अष्टमी व नवमी एक ही दिन होने से ्भक्तों में मां के विसर्जन को लेकर संशय रहा। कुछ भक्तों ने रविवार को तो कुछ ने सोमवार की सुबह मां का विसर्जन किया है। क्षेत्र के विभिन्न गांवों में देवी प्रतिमाओं का भक्तों ने नाचते-गाते, अबीर-गुलाल उड़ाते हुए विसर्जन किया। देवीगंज, सौरई बुजुर्ग, बक्शीकापूरा, कमालपुर टिकरी आदि गांवों की देवी प्रतिमाओं का भक्तों ने कड़ा के कालेश्वर घाट में बनाए गए वैकल्पिक गड्ढे में विसर्जन किया। वहीं, फरीदागंज गांव के जखवा तालाब में भी दर्जनों गांवों की देवी प्रतिमाओं को भक्तों ने विसर्जित किया। तालाबों पर क्रमवार विसर्जन कराने के लिए पुलिस बल तैनात रहा।
नहर व तालाब में विसर्जित हुईं मूर्तियां
पश्चिमशरीरा। पश्चिम शरीरा क्षेत्र में शारदीय नवरात्र के मौके पर लगभग चार दर्जन पंडालों में मूर्तियां स्थापित की गई थीं। पर्व समापन के दूसरे दिन दशमी को अपने-अपने क्षेत्र के तालाबों और नहरों में प्रतिमा विसर्जन की व्यवस्था में भक्त लग गए थे। इस के बाद भक्त नाचते-गाते और एक दूसरे पर गुलाल डालते हुए विसर्जन स्थल पहुंचे। पश्चिम शरीरा, पूरब शरीरा, गढ़ी बाजार, अंधावा, रामअधीन का पूरा की प्रतिमाओं का विसर्जन नहर में किया गया। धवाड़ा, अमीना, गोराजू, चम्पहा, बाकरगंज की प्रतिमाएं तालाब में विसर्जित की गईं। पुनवार, महावाँ, डेढ़ावल, कटरी, महेवाघाट, डूड़ी, कुम्हियावां, अजरौली, हिनौता, महेवाघाट, बैरागीपुर, डकशरीरा की प्रतिमाओं का विसर्जन तालाब में किया गया।
गाजे-बाजे के साथ विसर्जित हुईं मां अंबे
भरवारी। नगर पालिका भरवारी में हनुमंत निकेतन, मेहता नगर, एन डी कॉलोनी समेत आधा दर्जन स्थानों पर मूर्तियों की स्थापना भक्तों ने पूजा पंडाल में की थी। इन मूर्तियों का विसर्जन सोमवार को बड़े ही धूमधाम से नगरपालिका के गौरा स्थित बड़ी कुटी के तालाब में भक्तों ने किया। मूर्तियों को विसर्जित करने के लिए भक्त कस्बे से नाचते-गाते तालाब तक पहुंचे और जोरदार जयकारे के साथ विसर्जन किया। इस मौके पर एडवाकेट राम प्रकाश मिश्रा, अमित गुप्ता, अनमोल केसरवानी, अशोक शर्मा, प्रमोद पांडेय, कृष्ण स्वरूप झा, नीरज कौशल, अनमोल केसरवानी, अजय केसरवानी सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
ऐतिहासिक पक्का तालाब में हुआ मूर्तियों का विसर्जन
मूरतगंज। कोखराज थानाक्षेत्र के मूरतगंज कशिया, मुजाहिदपुर, धन्नी, पल्हाना, बल्हियावॉ, जीवनगंज, बजहा आदि गांवों में दर्जनभर से अधिक मूर्तियों की स्थापना नवरात्र पर्व के मौके पर की गई थी। इन मूर्तियों का विसर्जन सोमवार को मूरतगंज स्थित ऐतिहासिक पक्का तालाब में किया गया। मूर्ति विसर्जन के लिए भक्त रास्ते में नाचते-गाते अबीर उड़ाते चल रहे थे। विसर्जन के दौरान उमेश कुमार मोदनवाल, ओपी केसरवानी, संजय कुमार, राहुल, शुभम, संजीव, सुधार वर्मा, अरविंद कुमार केसरवानी, अनूप केसरवानी, वृजकिशोर रस्तोगी, रविकांत केसरवानी, विजय प्रकाश केसरवानी, मनोज, अंजनी चौरसिया समेत सैकड़ों की संखया में भक्तगण़ मौजूद रहे।
सरायअकिल में ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ मां अंबे का विसर्जन
सरायअकिल। कोविड को देखते हुए इस बार सरायअकिल कस्बे में सिर्फ छह स्थानों पर नवदुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। सोमवार सुबह सभी पंडालों के भक्त एक साथ मूर्तियों को वाहनों पर रखकर विसर्जित करने के लिए एकत्रित हुए। डीजे, ढोल-नगाड़ों की धुन पर नाचते-गाते भक्तों ने प्रतिमाओं के साथ पूरे कस्बे का भ्रमण किया। इसके बाद बेरुई गांव स्थित तालाब में ले जाकर मूर्तियों का विसर्जन किया। यातायात व सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से थानाध्यक्ष विजय विक्रम सिंह, पुलिस फोरस् के साथ पूरी तरह से मुस्तैद रहे।
मां सिद्धदात्री की उपासना के साथ भक्तों ने किया हवन-पूजन
मंझनपुर/कड़ा। नवरात्र के आखिरी दिन रविवार को भक्तों ने मंदिरों, पंडालों में देवी के सिद्धदात्री स्वरूप की पूजा की। इसके बाद व्रत रखने वालों ने पारायण किया। इस दौरान जिलेभर के देवी मंदिर और पंडाल मां के जयकारे से गुंजायमान रहे। शक्तिपीठ कड़ा धाम में मां की एक झलक पाने के लिए भक्तों को लाइनों में घंटों इंतजार करना पड़ा।
नव दुर्गा का अंतिम स्वरूप मां सिद्धदात्री का माना जाता है। अन्य आठ दुर्गा प्रतिमाओं की शास्त्रीय विधि-विधान से पूजा करने के बाद नवें दिन भक्त इनकी उपासना करते हैं। बड़ी संख्या में भक्त अष्टमी को व्रत भी रखते हैं। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गणिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वाशित्व समेत आठ सिद्धियां होती हैं। मां सिद्धिदात्री भक्तों और साधकों को ये सभी सिद्धियां प्रदान करने में समर्थ हैं। इन्हीं फलों की प्राप्ति के लिए आखिरी दिन रविवार को भक्तों ने देवी मंदिरों, पूजा पंडालों में मां सिद्धिदात्री की अराधना की।

रविवार को शक्तिपीठ शीतलाधाम कड़ा के अलावा जिला मुख्यालय मंझनपुर स्थित दुर्गा मंदिर, करारी रामलीला मैदान स्थित देवी मंदिर, पश्चिमशरीरा स्थित झारखंडी देवी व अढ़ौली मंदिर में आस्था का रेला उमड़ा। मां को शीष नवाने के बाद भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मन्नतें मांगीं। कड़ा में मां शीतला की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं को घंटों लाइन में लगना पड़ा। इसके बाद भी पल भर से ज्यादा मां के दर्शन नहीं हो सके। इस बीच भक्तों को धक्का-मुक्की का भी सामना करना पड़ा। इसके बाद भक्तों ने देवी मंदिर व पूजा पंडालों में बनाए गए हवन कुंडों में देवी-देवताओं की आहूतियां दीं।

murti visharjan in kaushambi after end of shardiya navratra

murti visharjan in kaushambi after end of shardiya navratra- फोटो : KAUSHAMBI

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