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‘मोन्ट मोरेलोनाइट’ से चमक रहे फल, दे रहे भरपूर जायका

Sun, 30 Oct 2016 05:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी Updated Sun, 30 Oct 2016 05:50 PM IST
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जमीन की जान ‘मोन्ट मोरेलोनाइट’ कौशांबी में भरपूर है। मोन्ट मोरेलोनाइट में वह भी खास तत्व पर्याप्त मात्रा में हैं, जिसकी जरूरत फल व अन्न उत्पादन के लिए होती है। इसे मिश्र यौगिक भी कहते हैं। यह फतेहपुर के धाता से लेकर चायल तक पाया जाता है। यही कारण है कि यहां पैदा होने वाले अन्न और फलों की चमक अलग तो होती है, इसके अलावा वह सुगंधित होने के साथ ही जायकेदार होते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि जितनी मात्रा में यहां की भूमि में मोन्ट मोरेलोनाइट पाया जाता है, उतना देश के अन्य हिस्सों में नहीं मिलता।
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     गंगा और यमुना के बीच में बसा दोआबा अमरूद, तरबूज, बेर और गन्ना उत्पादन के लिए सदियों से जाना जाता रहा है। धाता से चायल तक की धरती में पैदा होने वाले फलों की कीमत उनके जायके पर होती थी। इसके अलावा तराई के अन्न की कीमत आज भी सामान्य अनाज से अधिक है। देश के कोने-कोने में विख्यात उत्पादों के पीछे का कारण मिट्टी का अनमोल होना है। जानकारों का कहना है कि दोआबा के कुछ हिस्सों की माटी में मोन्ट मोरेलोनाइट (मिश्र यौगिक) भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके चलते यहां पर पैदा होने वाला अन्न देश के अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक पौष्टिक और स्वादिष्ट होता है।
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फलों में अमरूद, बेर, तरबूज का उत्पादन देश के कोने-कोने में अर्से से भेजा जाता था। ऐसा नहीं है कि देश के अन्य हिस्से में इन फलों का उत्पादन नहीं होता है, लेकिन यहां के फलों के आकार, स्वाद और चमक ने अन्य स्थानों के फलों को पीछे धकेल दिया था। देश के अलावा विदेशों में स्थान पाने वाला इलाहाबादी अमरूद मौजूदा कौशांबी का ही है। इसके अलावा जिले का कुछ हिस्सा गन्ने की मिठास का हब रहा। यहां के गन्ने से बने गुड़ का स्वाद कहीं और नहीं मिलता है। इन सबके पीछे मिट्टी में मिलने वाला मिश्र यौगिक ही है।
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इन तत्वों का रहता है मिश्रण
मोन्ट मोरेलोनाइट (मिश्र यौगिक) में कुछ खास तत्वों का मिश्रण रहता है। जानकारों का कहना है कि इसमें सोडियम, कैल्सियम, एल्युमीनियम, मैगभनीशियम, स्लिकान, ऑक्सीजन और हाइड्रा आक्साइड का मिश्रण रहता है। इन तत्वों से भरपूर दोआबा की मिट्टी अन्न, फलों और फूलों को सुंदर, स्वादिष्ट, खुशबूदार और स्वास्थ्यवर्धक बनाने का काम करती है।

बारिश के दौरान खेतों में होती है यौगिक की पहचान
किसानों के खेतों की मिट्टी में मिश्र यौगिक की मात्रा कितनी है इसकी पहचान बारिश के दिनों में किसान स्वयं कर सकता है। जानकारों के मुताबिक बारिश होने के तुरंत बाद जिस खेत की मिट्टी सूखी और साफ नजर आने लगती है वह भरपूर मिश्र यौगिक होने का प्रमाण देती है। यह स्थिति गंगा और यमुना की तराई वाले इलाके में अधिक देखने को मिलती है। इन खेतों में उर्वरक का प्रयोग कम करने के बाद भी अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है।


दोआबा के खेतों में मोन्ट मोरेलोनाइट की भरपूर मात्रा है। यहां के किसानों को इस बात की जानकारी नहीं है। किसान खेतों में उर्वरक का कम प्रयोग करें। विस्तार से जानकारी मोन्ट मोरेलोनाइट की वेबसाइट से भी ली जा सकती है।
अखंड प्रताप सिंह, डीएम
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